NEET Protest Case : NEET पेपर लीक को लेकर हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान दिया है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी और उनके खिलाफ कोई नई FIR दर्ज नहीं होगी। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान हिंसा और गंभीर अपराधों के आरोप में 2700 से अधिक लोगों के खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं ली जाएंगी।

Written by Kajal Panchal • Published on : 3 August 2026
IBN24 News Network : सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है तो उसे बचाया नहीं जाना चाहिए। वहीं, अदालत ने यह भी कहा कि छात्र आंदोलन की आड़ में किसी गंभीर अपराध में शामिल व्यक्ति को भी राहत नहीं मिलनी चाहिए।
सरकार ने क्या कहा ?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि केंद्र सरकार अपने वादे पर कायम है और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों पर उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाएगी।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य गंभीर अपराधों में जिन 2700 से अधिक लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई हैं, वे वापस नहीं ली जाएंगी।
CJP के आंदोलन के बाद सरकार ने किया था वादा
NEET पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक आंदोलन किया था। आंदोलन के दौरान संगठन ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं।

सरकार ने इनमें से एक महत्वपूर्ण मांग स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी आश्वासन को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दोहराया गया।
मामले की अगली सुनवाई अब 18 अगस्त को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर जताई चिंता
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत इस समय प्रत्येक आरोप की सच्चाई की जांच नहीं कर सकती, लेकिन पहली नजर में ऐसा लगता है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है।

CJI ने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया है तो उसे किसी भी स्थिति में बचाया नहीं जाना चाहिए।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि छात्र आंदोलन की आड़ में किसी कुख्यात अपराधी को भी संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
कोर्ट किन दो मुद्दों पर कर सकता है विचार ?
सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिए कि वह दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार कर सकती है।
पहला, प्रदर्शनकारियों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जा सकता है।
दूसरा, अदालत यह भी जांच कर सकती है कि पुलिसकर्मियों पर हमला वास्तव में छात्रों ने किया था या भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों ने हिंसा को अंजाम दिया था।
पिछली सुनवाई में क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ?
28 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने से रोक दिया था।
अदालत ने कहा था कि जिन प्रदर्शनकारियों की उम्र 18 वर्ष से कम है और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र, बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल सरकार को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई में जवाब देने को कहा था।
साथ ही अदालत ने इन राज्यों को निर्देश दिया था कि प्रदर्शन से जुड़े CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज, PCR लॉग, वायरलेस संचार रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए।
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई थी झड़प
20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हो गई थी। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे।
प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
बाद में 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त कर दिया गया।
फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

इस बीच राज्यसभा सांसद एए रहीम ने सुप्रीम कोर्ट में अलग याचिका दायर कर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) और अन्य बायोमेट्रिक निगरानी तकनीकों के इस्तेमाल को चुनौती दी है।
याचिका में मांग की गई है कि शांतिपूर्ण सार्वजनिक प्रदर्शनों में बिना स्पष्ट कानूनी आधार के बायोमेट्रिक निगरानी को असंवैधानिक घोषित किया जाए।
CJP से जुड़ी याचिकाएं पहले भी तीन बार पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट
24 मई
एक याचिका में CJP से जुड़े लोगों की गतिविधियों की CBI जांच की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था।
22 जुलाई
एक जनहित याचिका में संसद मार्च के दौरान कथित पुलिस बर्बरता की जांच की मांग की गई। सुनवाई के दौरान CJI ने कहा था कि अदालत वीडियो देखने के आधार पर फैसला नहीं करेगी।
24 जुलाई
सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने पुलिस कार्रवाई से जुड़ी दो याचिकाओं का उल्लेख किया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाएं सूचीबद्ध होने के बाद उन पर सुनवाई की जाएगी।
बाद में CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस मामले की सुनवाई से इनकार नहीं किया था, बल्कि उस समय संबंधित रिट याचिका दाखिल ही नहीं हुई थी। उन्होंने मीडिया में चली कुछ खबरों को भी गलत बताया।
अब आगे क्या होगा ?
सुप्रीम कोर्ट 18 अगस्त को मामले की अगली सुनवाई करेगा। इस दौरान अदालत प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों, पुलिस कार्रवाई, संभावित SIT जांच और अन्य लंबित याचिकाओं पर आगे की सुनवाई करेगी।
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