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Jantar Mantar Removed as Protest Sites : दिल्ली में धरना-प्रदर्शन का ठिकाना बदला ! जहां 36 दिन चला था CJP का धरना, वही जंतर-मंतर अब सूची से बाहर ! 33 साल बाद बड़ा बदलाव, अब इन 3 जगहों पर होंगे आंदोलन

Jantar Mantar Removed as Protest Sites : दिल्ली में धरना-प्रदर्शन करने वाले राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन करने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों को लेकर बदलाव किया गया है। दिल्ली पुलिस के नए आदेश के अनुसार, जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। वहीं, अब रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों में शामिल किया गया है।

Jantar Mantar Removed as Protest Sites
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Written by Kajal Panchal • Published on : 12 October 2026

IBN24 NEWS NETWORK : इस फैसले के बाद दिल्ली में धरना-प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों को अपनी आगे की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। लंबे समय से जंतर-मंतर राजनीतिक आंदोलनों, सामाजिक अभियानों और विभिन्न संगठनों की मांगों को उठाने का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में इस स्थान को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का निर्णय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस बदलाव का असर उन संगठनों पर भी पड़ सकता है, जो अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए दिल्ली में धरना देने, प्रदर्शन करने या विरोध मार्च आयोजित करने की योजना बनाते हैं। हालांकि, नए निर्धारित स्थलों पर प्रदर्शन की अनुमति, आयोजन की प्रक्रिया और अन्य शर्तों को लेकर संबंधित अधिकारियों के दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा।

दिल्ली पुलिस के नए आदेश में क्या कहा गया ?

दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों को लेकर जारी नए आदेश के अनुसार, पहले से लागू व्यवस्था में संशोधन किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से 11 अक्टूबर 2026 को जारी स्टैंडिंग ऑर्डर में यह बदलाव किया गया। इससे पहले 28 अप्रैल 2022 को जारी आदेश के तहत प्रदर्शन स्थलों से संबंधित व्यवस्था लागू थी। नए आदेश में निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची में बदलाव करते हुए जंतर-मंतर को इससे बाहर कर दिया गया है। इसके साथ ही रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड, पूर्वी दिल्ली को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों में शामिल किया गया है।

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यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया बताया जा रहा है। समिति का उद्देश्य विरोध-प्रदर्शनों के लिए वैकल्पिक और उपयुक्त स्थानों की पहचान करना था। हालांकि, किसी स्थान को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची में शामिल किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि वहां किसी भी समय और किसी भी संख्या में लोग बिना अनुमति के प्रदर्शन कर सकते हैं। आयोजन से पहले लागू नियमों, अनुमति की प्रक्रिया और प्रशासन की शर्तों की जानकारी लेना जरूरी होगा।

जंतर-मंतर पर अब क्या होगा ?

जंतर-मंतर दिल्ली के उन प्रमुख स्थानों में शामिल रहा है, जहां लंबे समय से विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन होते रहे हैं। राजनीतिक दलों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, कई समूहों ने यहां अपनी मांगों को उठाया है। सरकारी नीतियों के विरोध, सामाजिक न्याय, रोजगार, महंगाई और अन्य सार्वजनिक मुद्दों पर भी यहां प्रदर्शन आयोजित किए जाते रहे हैं। जंतर-मंतर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी राजधानी के मध्य में स्थित होने और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े प्रमुख केंद्रों तक पहुंच के कारण रही है। यहां होने वाले विरोध-प्रदर्शनों को मीडिया का ध्यान भी मिलता रहा है। इसी वजह से कई आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए।

अब इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि भविष्य में प्रदर्शन करने वाले संगठनों को किन नियमों के तहत अनुमति मिलेगी और क्या किसी विशेष परिस्थिति में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दी जा सकेगी। इस संबंध में अंतिम स्थिति समझने के लिए दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आदेश और संशोधित दिशा-निर्देश देखना जरूरी होगा। केवल सूची से नाम हटाए जाने के आधार पर हर प्रकार के प्रदर्शन या किसी विशेष अनुमति की स्थिति के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

अब दिल्ली में इन 3 जगहों पर होंगे धरना-प्रदर्शन

दिल्ली पुलिस के नए आदेश के अनुसार, प्रदर्शन के लिए तीन निर्धारित स्थानों का उल्लेख किया गया है। इन स्थानों की जानकारी उन संगठनों के लिए महत्वपूर्ण है, जो राजधानी में धरना, विरोध-प्रदर्शन या अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करना चाहते हैं।

1. रामलीला मैदान

रामलीला मैदान दिल्ली के प्रमुख सार्वजनिक मैदानों में से एक है। यहां समय-समय पर बड़े राजनीतिक, सामाजिक और सार्वजनिक आयोजन होते रहे हैं। मैदान का उपयोग विभिन्न प्रकार की सभाओं और आयोजनों के लिए किया जाता रहा है।

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दिल्ली में प्रदर्शन के लिए इस स्थान का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि बड़े आयोजनों के लिए खुले मैदान की आवश्यकता होती है। यदि किसी संगठन को बड़ी संख्या में लोगों के साथ प्रदर्शन करना है, तो उसे संबंधित अधिकारियों से आयोजन की अनुमति और आवश्यक शर्तों की जानकारी लेनी होगी।

रामलीला मैदान को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल किए जाने से उन संगठनों को एक वैकल्पिक स्थान मिल सकता है, जो पहले अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करने की योजना बनाते थे। हालांकि, यहां किसी कार्यक्रम के आयोजन की वास्तविक अनुमति संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

2. बुराड़ी मैदान

बुराड़ी मैदान को भी प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों में शामिल किया गया है। दिल्ली के इस क्षेत्र में स्थित खुले मैदान का उपयोग बड़े जमावड़े और सार्वजनिक आयोजनों के लिए किया जा सकता है।

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राजधानी में भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन के लिए स्थान निर्धारित करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में बुराड़ी मैदान जैसे स्थानों की भूमिका बढ़ सकती है।

हालांकि, प्रदर्शन करने वाले संगठनों को यहां पहुंचने के साधनों, आयोजन की व्यवस्था, निर्धारित समय और अनुमति से जुड़ी शर्तों की जानकारी पहले से जुटानी चाहिए। मैदान को निर्धारित सूची में शामिल किए जाने से संबंधित सभी व्यावहारिक व्यवस्थाओं की पुष्टि आधिकारिक दिशा-निर्देशों से करना जरूरी होगा।

3. CBD ग्राउंड, पूर्वी दिल्ली

पूर्वी दिल्ली स्थित CBD ग्राउंड को भी निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल किया गया है। इससे दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदर्शन आयोजित करने के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की व्यवस्था सामने आती है।

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राजधानी में किसी भी बड़े प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा, सार्वजनिक आवागमन और आसपास के इलाकों में सामान्य गतिविधियों को बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। इसलिए प्रदर्शन स्थल का चयन करते समय प्रशासन को कई पहलुओं पर विचार करना पड़ता है।

CBD ग्राउंड में प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बनाने वाले संगठनों को भी दिल्ली पुलिस के लागू नियमों और अनुमति संबंधी प्रक्रिया का पालन करना होगा। आयोजन की तारीख, प्रतिभागियों की संख्या और कार्यक्रम की प्रकृति के अनुसार अतिरिक्त शर्तें लागू हो सकती हैं। इनका विवरण संबंधित अधिकारियों से प्राप्त करना चाहिए।

गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश पर लिया गया फैसला

प्रदर्शन स्थलों में बदलाव को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों का उल्लेख किया गया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के लिए वैकल्पिक और उपयुक्त स्थानों की पहचान करना बताया गया है। राजधानी दिल्ली में केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण कार्यालय, प्रशासनिक संस्थान और राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक केंद्र स्थित हैं। इस कारण यहां होने वाले विरोध-प्रदर्शनों का महत्व केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता। कई बार किसी मुद्दे पर आयोजित प्रदर्शन राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन जाते हैं।

दूसरी ओर, बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से यातायात, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित चुनौतियां भी पैदा हो सकती हैं। इसलिए प्रशासन के सामने नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन स्थापित करने की जिम्मेदारी होती है। समिति की सिफारिशों के आधार पर निर्धारित स्थलों में बदलाव इसी प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बताया जा रहा है। हालांकि, समिति की विस्तृत सिफारिशों और फैसले के पीछे दिए गए सभी कारणों को समझने के लिए संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों का अध्ययन आवश्यक है।

प्रदर्शन आयोजित करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना होगा ?

दिल्ली में धरना-प्रदर्शन करने की योजना बना रहे संगठनों के लिए नए आदेश के बाद कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी होगा। सबसे पहले, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए चुना गया स्थान वर्तमान नियमों के तहत निर्धारित है या नहीं। इसके बाद दिल्ली पुलिस और संबंधित प्रशासन से अनुमति की प्रक्रिया के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। प्रदर्शन की तारीख, समय, संभावित प्रतिभागियों की संख्या और कार्यक्रम की प्रकृति के आधार पर आवश्यक औपचारिकताएं अलग-अलग हो सकती हैं।

इसके अतिरिक्त, आयोजकों को यातायात, सुरक्षा, सार्वजनिक रास्तों और आसपास के क्षेत्र में सामान्य गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना चाहिए। प्रशासन की ओर से निर्धारित शर्तों का पालन करना भी जरूरी होगा। यदि किसी संगठन ने पहले से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की योजना बनाई हुई है, तो उसे पुराने कार्यक्रम की अनुमति को स्वतः वैध या नए नियमों के अनुरूप मानने के बजाय संबंधित अधिकारियों से अपनी स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए।

क्या नए फैसले से राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों पर पड़ेगा असर ?

जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न जन आंदोलनों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है। प्रदर्शन के लिए स्थान केवल लोगों के एकत्र होने की जगह नहीं होता, बल्कि वह आंदोलन की पहचान, मीडिया की पहुंच और आम लोगों तक संदेश पहुंचाने में भी भूमिका निभाता है। जंतर-मंतर लंबे समय से इसी तरह के आयोजनों के लिए पहचाना जाता रहा है। इसलिए निर्धारित स्थलों की सूची में बदलाव होने से संगठनों को अपने कार्यक्रमों की योजना नए सिरे से तैयार करनी पड़ सकती है।

हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस फैसले से सभी प्रकार के आंदोलनों पर एक जैसा असर पड़ेगा। इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संशोधित SOP में क्या नियम दिए जाते हैं, अनुमति कैसे मिलेगी और अलग-अलग प्रकार के कार्यक्रमों के लिए प्रशासन क्या शर्तें तय करता है। साथ ही, किसी भी नए नियम के व्यावहारिक प्रभाव का आकलन करने के लिए यह देखना होगा कि निर्धारित स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने की व्यवस्था कितनी सुगम रहती है और आयोजकों को अनुमति प्राप्त करने में किन प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है।

नए नियमों और SOP पर रहेगी नजर

प्रदर्शन स्थलों में बदलाव के साथ संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। SOP के माध्यम से आमतौर पर किसी प्रक्रिया को संचालित करने के नियम, जिम्मेदारियां और आवश्यक औपचारिकताएं स्पष्ट की जाती हैं। दिल्ली में प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि नए दिशा-निर्देशों में आवेदन की प्रक्रिया, अनुमति, आयोजन की समय-सीमा, भीड़ प्रबंधन और अन्य शर्तों को लेकर क्या प्रावधान किए गए हैं।

जब तक संबंधित SOP और विस्तृत निर्देशों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक किसी विशेष समय-सीमा, प्रतिभागियों की अधिकतम संख्या या अनुमति की अनिवार्य शर्तों के बारे में निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा। इसलिए प्रदर्शन की योजना बनाने वाले संगठनों को दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आदेशों पर नजर रखनी चाहिए और किसी भी कार्यक्रम की घोषणा से पहले आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी चाहिए।

दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों में बदलाव क्यों है महत्वपूर्ण ?

दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों को लेकर किया गया यह बदलाव प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। एक ओर निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने की व्यवस्था से प्रशासन को सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन में मदद मिल सकती है। वहीं, दूसरी ओर संगठनों के लिए यह जरूरी होगा कि वे नए नियमों के अनुरूप अपनी गतिविधियों की योजना बनाएं।

जंतर-मंतर की लंबे समय से चली आ रही पहचान के कारण इस फैसले पर लोगों और विभिन्न संगठनों की नजर रह सकती है। आने वाले समय में संशोधित SOP और प्रशासनिक दिशा-निर्देश यह स्पष्ट करेंगे कि नए निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने की प्रक्रिया किस तरह संचालित होगी। फिलहाल, प्रदर्शन करने वाले संगठनों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि वे नए आदेश की आधिकारिक जानकारी प्राप्त करें, सही स्थान का चयन करें और अनुमति से जुड़ी प्रक्रिया का पालन करें।

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