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Nepal Flood : नेपाल में बाढ़ से तबाही, 8 मौतें और 105 भारतीय लापता, बिहार तक पहुंचा खतरा, बिहार के 8 जिले अलर्ट पर, क्या भारत में भी बढ़ेगा फ्लैश फ्लड का जोखिम ?

Nepal Floods : नेपाल के उत्तरी हिस्से में चीन के तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी के बाद टिमुरे और स्याब्रुबेसी समेत कई इलाकों में घर, सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर से जुड़ा बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ है। बुधवार, 26 अगस्त को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम 8 लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।

Nepal Floods

Written by Kajal Panchal • Published on : 26 August 2026

IBN24 NEWS NETWORK : इस हादसे का सीधा असर भारत पर भी पड़ने की आशंका है। नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार में अलर्ट बढ़ा दिया गया है, क्योंकि ऊपरी कैचमेंट से अचानक पानी आने पर गंडक नदी में फ्लैश फ्लड वेव का खतरा बताया गया है। बिहार सरकार के मुताबिक करीब 3 मीटर तक अचानक पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए संबंधित जिलों में प्रशासन को सतर्क किया गया है।

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105 भारतीय नागरिक भी लापता

नेपाल पर्यटन बोर्ड के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार बाढ़ प्रभावित इलाके में 384 यात्री लापता बताए गए हैं, जिनमें 291 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इनमें 105 भारतीय नागरिक बताए गए हैं। हालांकि, अलग-अलग अपडेट में भारतीयों की संख्या 105 से 108 तक बताई गई है, इसलिए बचाव अभियान के साथ यह आंकड़ा बदल सकता है।

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इसके अलावा रसुवा जिले में नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के कई जवान भी संपर्क से बाहर बताए गए हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार 26 पुलिसकर्मी लापता हैं, जबकि अन्य रिपोर्टों में सुरक्षा बलों के अतिरिक्त जवानों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।

25 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, 14 हेलिकॉप्टर रेस्क्यू में लगे

बाढ़ के बाद नेपाल में बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। नेपाली सेना ने 25 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी दी है। बचाव अभियान में 14 हेलिकॉप्टर लगाए गए हैं, जिनमें सेना और निजी क्षेत्र के हेलिकॉप्टर शामिल हैं। प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों को भी भेजा गया है।

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हालात इतने खराब हैं कि कई जगहों पर हेलिपैड और सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। इससे बचाव दलों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

हेलिपैड बहा, रेस्क्यू हेलिकॉप्टर को लौटना पड़ा

टिमुरे में फंसे लोगों को निकालने के लिए भेजे गए हेलिकॉप्टर को सुरक्षित लैंडिंग की जगह नहीं मिलने के कारण वापस लौटना पड़ा। बाढ़ के पानी से स्थानीय हेलिपैड के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

ऊपर से इलाके का जायजा लेने पर कई हिस्सों में पानी और मलबे के कारण सामान्य रास्ते और बस्तियां पहचानना मुश्किल हो रहा था। इस वजह से राहत और बचाव अभियान में अतिरिक्त चुनौतियां सामने आ रही हैं।

ग्लेशियल झील फटने की आशंका, लेकिन कारण की अभी पुष्टि नहीं

अचानक आई बाढ़ को लेकर अधिकारियों और विशेषज्ञों की नजर तिब्बत की तरफ भी है। शुरुआती तौर पर ग्लेशियल झील फटने यानी Glacial Lake Outburst Flood (GLOF) की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर बाढ़ का सटीक स्रोत अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। कुछ रिपोर्टों में इसे बर्फ और चट्टान से जुड़ी अचानक घटना से भी जोड़ा गया है।

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भोटेकोशी बेसिन में कई ग्लेशियल झीलें मौजूद हैं। किसी झील के टूटने या उसके पानी के अचानक बाहर निकलने की पुष्टि तकनीकी जांच और सैटेलाइट डेटा से ही हो सकेगी।

ग्लेशियल झील कैसे फटती है ?

ग्लेशियल झील आमतौर पर ग्लेशियर के पीछे या उसके आसपास जमा पानी से बनती है। कई बार इसके सामने बर्फ, मिट्टी, पत्थर और मलबे की प्राकृतिक बांध जैसी संरचना होती है।

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अगर यह प्राकृतिक बांध कमजोर होकर टूट जाए तो झील का पानी अचानक बड़ी मात्रा में नीचे की ओर बह सकता है। इससे कुछ ही समय में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है और फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति बन सकती है।

तस्वीरों में क्या दिखाया गया है ?

पहली तस्वीर में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह का बयान दिखाया गया है, जिसमें उन्होंने राहत और बचाव अभियान तेज करने की बात कही है। तस्वीर के अनुसार, आपदा प्रबंधन एजेंसी के साथ मेडिकल टीम, स्काउट्स और रेड क्रॉस की टीमें मिलकर काम कर रही हैं।

दूसरी तस्वीर एक एक्सप्लेनर है, जिसमें ग्लेशियल झील फटने के पांच संभावित कारण बताए गए हैं—पानी का स्तर बढ़ना, ग्लेशियर या चट्टान का गिरना, भूस्खलन, प्राकृतिक बांध का कमजोर होना और भूकंप या अन्य प्राकृतिक हलचल।

बाढ़ के बाद भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता ?

नेपाल से आने वाली कई नदियां भारत में प्रवेश करती हैं। इनमें गंडक, कोसी और बागमती जैसी प्रमुख नदियां शामिल हैं। इसलिए नेपाल के पहाड़ी इलाकों में अचानक पानी बढ़ने का असर निचले इलाकों में भी देखने को मिल सकता है।

इसी वजह से बिहार प्रशासन ने नेपाल में आई बाढ़ के बाद निगरानी बढ़ाई है। आधिकारिक बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली के अनुसार 26 अगस्त को बिहार के कुछ स्थानों पर गंडक, बागमती, कोसी और गंगा समेत कई नदियों का जलस्तर चेतावनी या खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया।

बिहार के इन इलाकों में अलर्ट

बिहार में नेपाल से आने वाले संभावित फ्लैश फ्लड के खतरे को देखते हुए पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर समेत प्रभावित इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

बिहार सरकार ने संबंधित जिलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा की है और जरूरत पड़ने पर NDRF, SDRF, नाव, राहत शिविर और सामुदायिक रसोई जैसी व्यवस्थाओं को सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है।

गंडक में करीब 3 मीटर की फ्लैश फ्लड वेव का खतरा

बिहार सरकार की ओर से गंडक नदी में अचानक करीब 3 मीटर तक फ्लैश फ्लड वेव आने की आशंका जताई गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे बिहार में 3 मीटर पानी भर जाएगा, बल्कि नदी के प्रवाह में अचानक इतनी ऊंची लहर या जलस्तर बढ़ोतरी की संभावना को लेकर चेतावनी दी गई है।

इसलिए नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

नेपाल में सेना और सुरक्षा बलों की तैनाती

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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने प्रभावित इलाकों में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को राहत एवं बचाव अभियान में लगाने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों और मेडिकल स्टाफ को भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। निचले और नदी किनारे के संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

भारत के लिए भी क्यों अहम है यह हादसा ?

नेपाल और भारत के बीच हिमालयी नदियों का सीधा जल-संबंध है। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बाढ़ या ग्लेशियल घटनाओं से निकलने वाला पानी आगे चलकर भारत की नदी प्रणालियों को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता बिहार के सीमावर्ती और नदी किनारे के इलाकों को लेकर है। प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है और संभावित फ्लैश फ्लड की स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।

नेपाल में बचाव अभियान जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है। वहीं भारत में भी अधिकारियों की नजर नेपाल से आने वाले पानी और गंडक समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर पर बनी हुई है। ऐसे में अगले कुछ घंटों में स्थिति किस तरह बदलती है, इस पर भारत और नेपाल दोनों की नजर रहेगी।

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