Karnal Girl Yashika Selected for NASA Program : करनाल की बेटी यशिका मैहला ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में शहर और परिवार का नाम रोशन किया है। टैगोर स्कूल की 11वीं कक्षा की नॉन मेडिकल छात्रा यशिका का भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए यूनाइटेड स्पेस स्कूल के कार्यक्रम में चयन हुआ। कार्यक्रम के तहत यशिका ने अमेरिका में 15 दिन बिताए और 35 देशों से आए विद्यार्थियों के साथ मंगल ग्रह से जुड़े मिशन पर काम किया।

Written by Kajal Panchal • Published on : 19 August 2026
IBN24 NEWS NETWORK : इस दौरान यशिका को अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से समझने का अवसर मिला। उसने NASA के वैज्ञानिकों से मुलाकात की और अंतरिक्ष अभियानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं। अलग-अलग देशों के विद्यार्थियों के साथ टीम में काम करना भी उसके लिए खास अनुभव रहा।
35 देशों के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
यशिका ने बताया कि उसे कार्यक्रम में चयन की जानकारी स्कूल के शिक्षकों के माध्यम से मिली थी। यह उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि थी और वह इसे लेकर काफी उत्साहित थी। यूनाइटेड स्पेस स्कूल का यह कार्यक्रम करीब 29 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। इसमें अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले 35 देशों के विद्यार्थी हिस्सा लेते हैं।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उनकी रुचि और जिम्मेदारी के अनुसार अलग-अलग टीमों में बांटा गया। यशिका का चयन ग्रीन टीम में हुआ। उसे ‘सभ्यता एवं मंगल ग्रह पर आवास’ से जुड़ी भूमिका दी गई। टीम ने मंगल ग्रह पर भविष्य के मिशन और वहां मानव आवास की संभावनाओं से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम किया।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों पर व्याख्यान दिए। इससे विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और मंगल मिशन की तकनीकी एवं व्यावहारिक चुनौतियों को समझने का अवसर मिला।
कल्चर फेयर में भारत का प्रतिनिधित्व
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को अमेरिका में अलग-अलग स्थानों का भ्रमण भी कराया गया। इसके अलावा विभिन्न देशों से आए विद्यार्थियों को एक-दूसरे की संस्कृति और परंपराओं को समझने का अवसर मिला।
पहले सप्ताह में आयोजित कल्चर फेयर में विद्यार्थियों ने अपने-अपने देशों की संस्कृति को प्रस्तुत किया। इसमें कहानी, संगीत, नृत्य और पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से देशों की संस्कृति दिखाई गई। यशिका ने भारत की ओर से ब्रेड पकौड़ा बनाकर पेश किया।
यशिका के मुताबिक, इस कार्यक्रम से उसे न केवल अंतरिक्ष विज्ञान को समझने का मौका मिला, बल्कि अलग-अलग देशों के विद्यार्थियों के साथ बातचीत और टीमवर्क का अनुभव भी हासिल हुआ।
एयरोनॉटिकल इंजीनियर बनना चाहती हैं यशिका
यशिका ने बताया कि वह भविष्य में एयरोनॉटिकल इंजीनियर बनना चाहती हैं। अंतरिक्ष विज्ञान में उनकी विशेष रुचि है और वह आगे भी NASA जाने का सपना देखती हैं।

उन्होंने कल्पना चावला को अपनी प्रेरणा बताया। यशिका का कहना है कि कल्पना चावला की उपलब्धियां उन्हें अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
कार्यक्रम के अंतिम दिन अंतरिक्ष यात्री स्टीवन विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देने पहुंचे। इस दौरान यशिका को भी कार्यक्रम में भागीदारी का प्रमाण पत्र मिला।
तीन चरणों में होता है चयन
डॉ. पारूल ने बताया कि यूनाइटेड स्पेस स्कूल कार्यक्रम के लिए विद्यार्थियों का चयन तीन चरणों में किया जाता है। इसमें 15 से 19 वर्ष की आयु के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं।

पहले चरण में विद्यार्थियों से निबंध लिखवाया जाता है। निबंध के अंकों के आधार पर विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग की जाती है। इसके बाद ऑनलाइन साक्षात्कार होता है। चयन प्रक्रिया के दौरान NASA की ओर से भी ऑनलाइन इंटरव्यू लिया जाता है।
अंतिम रूप से चयनित विद्यार्थियों को कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिलता है। वहां उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विषयों की गहन जानकारी दी जाती है और अंतरिक्ष यात्रियों के परिवार के साथ रहने का अनुभव भी मिलता है।
यशिका की यह उपलब्धि करनाल के साथ-साथ उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है, जो अंतरिक्ष विज्ञान और एयरोस्पेस के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।
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