Trump Midterm Election Defeat : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को मिडटर्म चुनाव में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। उनकी रिपब्लिकन पार्टी को सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों सदनों में हार का सामना करना पड़ा है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी ने दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे के बाद ट्रम्प के लिए आने वाले दिनों में कई राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 4 November 2026
IBN24 NEWS NETWORK : इस चुनाव में एक और बड़ी खबर मिशिगन से सामने आई है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने जीत दर्ज कर अमेरिकी इतिहास में सीनेटर चुने जाने वाले पहले मुस्लिम व्यक्ति बनने का इतिहास रच दिया है। खास बात यह है कि चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प ने उन्हें सार्वजनिक मंच से ‘जिहादी’ तक कहा था।
दोनों सदनों में बहुमत खोने से ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ेंगी
अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से ट्रम्प सरकार के लिए अपने फैसलों को लागू करना पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है। दरअसल, अमेरिका में कानून बनाने, बजट पास करने और सरकारी नियुक्तियों को मंजूरी देने में संसद की अहम भूमिका होती है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं। यहां बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है।

शुरुआती चुनावी आंकड़ों के अनुसार, डेमोक्रेट्स को कम से कम 231 सीटें मिली हैं, जबकि रिपब्लिकन को 141 सीटें मिली हैं। कुछ सीटों पर नतीजों की प्रक्रिया जारी रहने के कारण आंकड़े बदल सकते हैं। वहीं, सीनेट में कुल 100 सीटें हैं और बहुमत के लिए 51 सीटों की जरूरत होती है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन पार्टी से 7 सीटें छीनकर सीनेट में भी अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है। शुरुआती आंकड़ों में डेमोक्रेट्स को 54 और रिपब्लिकन को 44 सीटें मिली हैं।
अब्दुल अल-सैयद बने अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर
मिशिगन की सीनेट सीट पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इसके साथ ही वह अमेरिकी इतिहास में सीनेटर चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बन गए हैं। अब्दुल अल-सैयद की जीत इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उनके खिलाफ तीखे बयान दिए थे। 25 अक्टूबर को मिशिगन की एक चुनावी रैली में ट्रम्प ने उन्हें ‘जिहादी’ और मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य बताते हुए अमेरिकी सीनेट में पहुंचने से रोकने की बात कही थी।

ट्रम्प ने अल-सैयद पर आतंकवादियों का समर्थन करने के आरोप भी लगाए थे। यहां तक कि उन्होंने कहा था कि अगर अल-सैयद सीनेटर बनते हैं तो उन्हें संसद में प्रवेश से पहले मेटल डिटेक्टर से गुजरना चाहिए। हालांकि, इन विवादित बयानों के बावजूद अल-सैयद ने चुनाव में जीत हासिल कर ली।
मिसिसिपी में सिर्फ 43 वोटों का अंतर
मिसिसिपी में सीनेट चुनाव का मुकाबला भी बेहद दिलचस्प रहा। यहां रिपब्लिकन उम्मीदवार सिंडी हाइड-स्मिथ और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार स्कॉट कोलम के बीच बेहद कम वोटों का अंतर बताया गया। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, दोनों उम्मीदवारों के बीच केवल 43 वोटों का अंतर था।

निर्दलीय उम्मीदवार टाय पिंकिंस को भी करीब 2.1% वोट मिलने का अनुमान जताया गया। इस मुकाबले पर इसलिए भी नजरें टिकी रहीं, क्योंकि बेहद कम अंतर से नतीजा पलटने की संभावना थी।
नेवाडा में आरोन फोर्ड की जीत
गवर्नर चुनाव में भी डेमोक्रेटिक पार्टी को सफलता मिली। नेवाडा में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार आरोन फोर्ड ने रिपब्लिकन उम्मीदवार और मौजूदा गवर्नर जो लोम्बार्डो को हराया।

फोर्ड ने अपने चुनाव प्रचार में महंगे घर, पेट्रोल और रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतों को प्रमुख मुद्दा बनाया था। इसके अलावा उन्होंने मजदूर यूनियनों को मजबूत करने और गरीब लोगों का मेडिकल कर्ज माफ करने का वादा भी किया था।
ट्रम्प के लिए आगे क्या होंगी चुनौतियां ?
दोनों सदनों में बहुमत गंवाने के बाद ट्रम्प प्रशासन को कई मोर्चों पर विपक्ष का सामना करना पड़ सकता है।
- कानून बनाने में मुश्किल: टैक्स, इमिग्रेशन और टैरिफ से जुड़े नए कानूनों को मंजूरी दिलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- बजट पर दबाव: सरकार के खर्च और विदेश नीति से जुड़े बजट प्रस्तावों पर डेमोक्रेट्स की शर्तें लागू हो सकती हैं।
- महाभियोग की आशंका: डेमोक्रेट्स ट्रम्प प्रशासन के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई समर्थन जरूरी होता है।
- सरकारी कामकाज की जांच: संसदीय समितियां ट्रम्प के फैसलों, सरकारी नीतियों और प्रशासनिक कामकाज की जांच कर सकती हैं।
इस तरह मिडटर्म चुनाव के नतीजे ट्रम्प के कार्यकाल के अगले दो वर्षों के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं।
34 साल पुराना रिकॉर्ड बना सकते हैं डेमोक्रेट्स
चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत को अमेरिकी राजनीति में बड़ी वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 258 सीटें तक मिल सकती हैं।

अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो डेमोक्रेट्स 1992 के बाद पहली बार इतनी सीटें हासिल करेंगे। 1992 में पार्टी को 258 सीटें मिली थीं, जबकि 2008 में उसने 257 सीटें जीती थीं।
ईरान और रूस पर भी पड़ सकता है असर
अमेरिकी चुनाव के नतीजों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है। खासकर ईरान और रूस के साथ अमेरिका के संबंधों को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।
डेमोक्रेट्स के नियंत्रण वाली संसद ट्रम्प प्रशासन की विदेश नीति, सैन्य खर्च और अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर सवाल उठा सकती है। हालांकि, विदेश नीति के कई फैसलों में राष्ट्रपति के पास महत्वपूर्ण अधिकार बने रहते हैं। कुल मिलाकर, मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार ने अमेरिकी राजनीति का समीकरण बदल दिया है। अब देखना होगा कि ट्रम्प प्रशासन विपक्ष के दबाव के बीच अपनी नीतियों को किस तरह आगे बढ़ाता है।
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