CJP Protest : दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी है। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने रिहाई के बाद पुलिस और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। CJP नेता आशुतोष रांका ने दावा किया कि उन्हें, अभिजीत दीपके और सौरव दास को शनिवार को फ्लाइट से उतरते ही किडनैप कर लिया गया था। वहीं, सौरव दास ने देश में इमरजेंसी जैसे हालात होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अपने ही लोगों से जंग लड़ रही है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 11 October 2026
IBN24 NEWS NETWORK : तीनों नेता करीब 23 घंटे हिरासत में रहने के बाद रविवार सुबह 10 बजे रिहा हुए। अभिजीत दीपके अपनी दादी के निधन के कारण महाराष्ट्र स्थित अपने घर रवाना हो गए। दूसरी ओर, दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की आवाजाही रोकने और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने का मामला भी सामने आया है।
दिल्ली में प्रदर्शन जारी, छात्र संगठनों के कई कार्यकर्ता हिरासत में
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में दूसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा। कनॉट प्लेस और राजीव चौक से जंतर-मंतर की ओर जा रहे SFI, AISA समेत अन्य छात्र संगठनों के कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

SFI के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर मारपीट करने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। स्थिति को देखते हुए दिल्ली में भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।
CJP ने कहा- आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे
रिहाई के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। सौरव दास ने कहा कि उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने के लिए कहा गया था। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि शांति भंग करने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने किया है।

दास ने कहा कि आंदोलनकारी पीछे नहीं हटेंगे और देश के नागरिकों से सड़कों पर उतरकर विरोध में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जहां भी उन्हें रोका जाएगा, वे वहीं प्रदर्शन करेंगे। साथ ही, उन्होंने आंदोलन को दिल्ली से बाहर देश के अन्य हिस्सों तक ले जाने की बात कही।
चार पूर्व मुख्यमंत्रियों का जताया आभार
CJP नेता आशुतोष रांका ने पूर्व मुख्यमंत्रियों अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, माणिक सरकार और पिनराई विजयन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि ये नेता प्रदर्शन के दौरान सड़कों पर उतरे और उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में भी राजनीतिक दल और विभिन्न संगठन एकजुट होकर आंदोलन जारी रखेंगे।

रांका ने यह भी आरोप लगाया कि CJP के कई अन्य साथियों को हिरासत में लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने AISF के सदस्यों को हिरासत में लिए जाने और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार का भी जिक्र किया।
रत्ना सिंह ने पूछा- पुलिस को कार्रवाई के आदेश किसने दिए ?
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से पूछा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश किसने दिए और इसके पीछे क्या वजह थी।

सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान भाजपा से जुड़े लोगों को नहीं रोका गया, जबकि प्रदर्शनकारी युवाओं के साथ गलत व्यवहार किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि घर लौटने के बाद सरकारी अधिकारी उनके घर के नीचे खड़े रहे।
सौरव दास का आरोप- ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए बनाया जा रहा डर का माहौल
सौरव दास ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद पर बनाए रखने के लिए देश में डर का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ज्ञानेश कुमार के पास ऐसा क्या है, जिसके कारण सरकार उन्हें पद से हटाने के पक्ष में नहीं है।

दास ने यह दावा भी किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी ज्ञानेश कुमार को हटाने के पक्ष में है। इसके अलावा, उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दिल्ली को छावनी बनाने का आरोप, आंदोलन देशभर में फैलाने की चेतावनी
सौरव दास ने दिल्ली में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राजधानी को छावनी में बदल दिया गया है। उनके मुताबिक, बॉर्डर क्षेत्रों से भी सुरक्षाबलों को दिल्ली में तैनात किया गया है और प्रदर्शनकारियों की गलत छवि पेश करने की कोशिश हो रही है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के कारण ट्रेनें और दुकानें बंद कर दी गईं। दास ने कहा कि सरकार को लगता है कि इससे युवाओं के खिलाफ माहौल बनेगा, लेकिन ऐसा नहीं होगा। CJP नेताओं ने स्पष्ट किया कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर उनका विरोध जारी रहेगा। अब देखना होगा कि दिल्ली में जारी प्रदर्शन को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है और आंदोलन को अन्य राज्यों में कितना समर्थन मिलता है।
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