Mamata Banerjee & Kejriwal Detained : दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर शनिवार को सियासी तनाव बढ़ गया। प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। वहीं, अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई के दौरान 1,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव, बैरिकेडिंग तोड़ने और एक युवक के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 10 October 2026
IBN24 NEWS NETWORK : प्रदर्शन का आयोजन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में किया गया था। प्रदर्शनकारियों की मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से जुड़ी थी। हालांकि, पुलिस ने कम समय पहले सूचना दिए जाने का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
बैरिकेडिंग तोड़ने पर पुलिस की कार्रवाई, कई जगह तनाव
प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस और मिंटो ब्रिज समेत दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक, कई जगह प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने और हिरासत में लेने की कार्रवाई की।

इम्तियाज अली मार्ग पर आकाशवाणी भवन के पास प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड पार करने और पत्थर फेंके जाने का भी दावा किया गया। इस घटना में दो पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई। वहीं, एक प्रदर्शनकारी के सिर में चोट लगने की खबर भी है। पुलिस की कार्रवाई के चलते कई प्रदर्शनकारी निर्धारित स्थल तक नहीं पहुंच सके। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की अंतिम संख्या और सभी घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे CJP संस्थापक अभिजीत दीपके हिरासत में
प्रदर्शन से पहले CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद विमान के अंदर से ही हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। उनके साथ CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।

इसके बाद दीपके के एक प्री-रिकॉर्डेड वीडियो में अजिंक्य शिंदे को आंदोलन की कमान सौंपने की बात कही गई। पार्टी ने आरोप लगाया कि उसके नेताओं और समर्थकों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए कार्रवाई की गई। CJP का कहना है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। दूसरी ओर, पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के पीछे निर्धारित प्रक्रिया और कम समय में सूचना मिलने का हवाला दिया।
CJI सूर्यकांत के हस्तक्षेप के बाद वकीलों की रिहाई का दावा
प्रदर्शन के दौरान कुछ वकीलों को हिरासत में लिए जाने का मामला भी सामने आया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से हस्तक्षेप की मांग की थी। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान महिला अधिवक्ताओं समेत कई वकीलों को हिरासत में लिया गया और पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया।

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने बताया कि उन्होंने इस मामले में बात की थी और उनके हस्तक्षेप के बाद हिरासत में लिए गए वकीलों को रिहा कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वह उस समय शहर से बाहर थे। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है।
अभिजीत दीपके की दादी के निधन को लेकर भी विवाद
CJP ने दिल्ली पुलिस पर अभिजीत दीपके की दादी के निधन के मामले में राजनीति करने का आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि दीपके के परिवार और उसके वकीलों को उनकी लोकेशन की जानकारी नहीं दी गई।

वहीं, दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से खबर आई कि दीपके को उनकी दादी के निधन की जानकारी दे दी गई थी। इसके बाद उनके सामने यह निर्णय लेने का विकल्प था कि वह हिरासत में रहते हुए आंदोलन जारी रखें या अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए घर लौटें। इस मामले में पार्टी के आरोपों और पुलिस के पक्ष के बीच स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
प्रियंका गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया।

प्रियंका गांधी ने चुनाव आयोग के कामकाज पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को इस बात का डर है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने विपक्ष के प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए कार्रवाई की आलोचना की। हालांकि, चुनाव में धांधली और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं। इनकी पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
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