Kulgam Terror Attack : जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार को आतंकियों ने पहलगाम हमले जैसी वारदात को अंजाम देते हुए दो प्रवासी मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी। आतंकवादियों ने पहले ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे मजदूरों के नाम पूछे और फिर समूह से दो हिंदू मजदूरों को अलग कर उन पर फायरिंग कर दी। हमले में एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

Written by Kajal Panchal • Published on : 1 August 2026
IBN24 News Network : मृतकों की पहचान छत्तीसगढ़ निवासी 24 वर्षीय दीपक रात्रे और 28 वर्षीय भूपेंद्र के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार, यह हमला कुलगाम से करीब 20 किलोमीटर दूर केलाम इलाके में हुआ। आतंकियों ने तीन से चार राउंड फायरिंग की और वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए।
हिंदू मजदूरों को अलग कर बनाया निशाना
घटना के समय ईंट-भट्ठे पर कई प्रवासी मजदूर मौजूद थे, लेकिन हिंदू केवल यही दो मजदूर थे। आतंकियों ने पहले सभी के नाम पूछे और पहचान सुनिश्चित करने के बाद दोनों को अलग कर गोली मार दी। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि हमले से पहले आतंकियों ने इलाके की रेकी की थी और सुनियोजित तरीके से इस स्थान को चुना गया।
घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। सभी प्रमुख मार्गों पर वाहनों की जांच शुरू कर दी गई है और पुलिस तथा सेना की संयुक्त टीमें हमलावरों की तलाश में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
एक स्थानीय और एक पाकिस्तानी आतंकी पर शक

सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों को हमले में एक स्थानीय और एक पाकिस्तानी आतंकी के शामिल होने की आशंका है। शुरुआती जांच का फोकस मोहम्मद लतीफ नाम के संदिग्ध पर है, जिसके बारे में बताया जा रहा है कि वह पिछले वर्ष लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) में शामिल हुआ था।
हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी तक किसी भी संदिग्ध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मामले की जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
10 दिन पहले भी पुलिस जवान पर हुआ था हमला

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले ही अनंतनाग जिले के लाल चौक इलाके में आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला किया था। 21 जुलाई को हुए इस हमले में हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाया था।
हाल के दिनों में बढ़ीं आतंकी गतिविधियां
जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ सप्ताह के दौरान आतंकियों की गतिविधियों में तेजी देखने को मिली है। 18 जुलाई को राजौरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर घुसपैठ की कोशिश के दौरान भारतीय सेना ने संदिग्ध गतिविधियां देखकर करीब डेढ़ घंटे तक जवाबी फायरिंग की थी। सेना का कहना था कि आतंकी सीमा पार से घुसपैठ का प्रयास कर रहे थे।
इससे पहले 8 जुलाई को शोपियां में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त अभियान में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर जाकिर अहमद गनी को मार गिराया गया था। वह पहलगाम आतंकी हमले के बाद जारी 14 मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल था।
टारगेट किलिंग की घटनाएं फिर बनी चिंता
जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान टारगेट किलिंग की कई घटनाएं सामने आई हैं। इन हमलों में गैर-मुस्लिम समुदाय, कश्मीरी पंडितों, भाजपा कार्यकर्ताओं, सुरक्षाबलों के जवानों और दूसरे राज्यों से रोजगार के लिए आए मजदूरों को निशाना बनाया गया है।

साल 2000 में पहलगाम, 2006 और 2017 में अमरनाथ यात्रा से जुड़े हमले, 2019 में कुलगाम में पश्चिम बंगाल के मजदूरों की हत्या, 2021 में बिहार के स्ट्रीट वेंडरों की हत्या, 2022 में बडगाम में प्रवासी मजदूर की हत्या और 2024 में रियासी बस हमला जैसी घटनाएं पहले भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। कुलगाम में ताजा हमला एक बार फिर घाटी में टारगेट किलिंग की वापसी को लेकर चिंता बढ़ा रहा है।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कुलगाम में सुरक्षा बलों का सर्च ऑपरेशन जारी है और उन्होंने आतंकवादियों का सफाया करने के लिए डीजीपी सहित सभी सुरक्षा एजेंसियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
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