Lok Sabha Passes Tough Paper Leak Law 2026 : संसद के मानसून सत्र में बुधवार को दो अहम विधेयकों को मंजूरी मिल गई। लोकसभा ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ ध्वनि मत से पारित कर दिया, जिससे पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों पर कानून पहले से अधिक सख्त हो गया है। वहीं, राज्यसभा ने राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी, जिसके बाद ‘वंदे मातरम’ को भी ‘जन-गण-मन’ की तरह कानूनी संरक्षण मिलेगा।

Written by Kajal Panchal • Published on : 29 July 2026
IBN24 News Network : पेपर लीक संशोधन विधेयक पर मंगलवार को करीब 9 घंटे तक चर्चा हुई। बुधवार को विपक्ष की ओर से राहुल गांधी ने लगभग 50 मिनट तक अपनी बात रखी। बहस और हंगामे के बाद सरकार ने बिल को ध्वनि मत से पारित करा लिया। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बढ़ाना, संगठित पेपर लीक गिरोहों पर कार्रवाई तेज करना और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना है।
पेपर लीक पर अब और सख्त होगी कार्रवाई
संशोधित कानून के तहत पेपर लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल और संगठित परीक्षा अपराधों के लिए सजा और जुर्माने दोनों को बढ़ा दिया गया है।
नए कानून की प्रमुख बातें

- पेपर लीक से जुड़े मामलों में कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल।
- दोषियों पर 50 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
- संगठित अपराधों में कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रावधान।
- जांच 2 महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य।
- चार्जशीट दाखिल होने के बाद 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का प्रयास।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का अधिकार।
- जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार विशेष STF गठित कर जांच करा सकेगी।
- कानून में 15 प्रकार के परीक्षा अपराधों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
- परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन, प्री-ऑडिट, सुरक्षा जांच, सीट आवंटन, प्रश्नपत्र सुरक्षा और परीक्षा के बाद की प्रक्रिया के लिए विस्तृत मानक तय किए जाएंगे।
पहले और अब में क्या अंतर ?

2024 के कानून में पेपर लीक के मामलों में 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान था। संशोधन के बाद कई मामलों में सजा बढ़ाकर 10 साल तक कर दी गई है। संगठित गिरोहों पर कार्रवाई के लिए जुर्माने की सीमा भी बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए तक कर दी गई है। इसके अलावा पहली बार जांच और ट्रायल के लिए समय-सीमा तय करने का प्रयास किया गया है।
राज्यसभा से वंदे मातरम से जुड़ा संशोधन विधेयक भी पास

राज्यसभा ने राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दे दी। इसके तहत अब ‘वंदे मातरम’ को भी राष्ट्रीय गान ‘जन-गण-मन’ की तरह कानूनी संरक्षण मिलेगा।
क्या होगा नया प्रावधान ?

नए कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति—
- वंदे मातरम का अपमान करता है,
- इसके सम्मान में बाधा उत्पन्न करता है,
- या सार्वजनिक रूप से इसके गायन में जानबूझकर व्यवधान डालता है,
तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
वंदे मातरम का इतिहास

‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह 1882 में प्रकाशित उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल था। वर्ष 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार गाया था। 14 अगस्त 1947 को संविधान सभा की पहली बैठक की शुरुआत भी इसी गीत से हुई थी। बाद में 1950 में इसे भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया।
सरकार का क्या कहना है ?
सरकार का कहना है कि दोनों संशोधनों का उद्देश्य देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना तथा राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों को कानूनी संरक्षण देना है। सरकार के अनुसार इससे परीक्षा माफियाओं पर प्रभावी कार्रवाई होगी और राष्ट्रीय गीत के सम्मान को भी कानूनी मजबूती मिलेगी।
संसद से पारित दोनों विधेयक शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े महत्वपूर्ण बदलाव माने जा रहे हैं। एक ओर पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ है, वहीं दूसरी ओर वंदे मातरम को भी कानूनी संरक्षण देकर उसके सम्मान को नई संवैधानिक मजबूती देने की दिशा में कदम उठाया गया है।
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