IPS Isha Singh : दिल्ली पुलिस में तैनात IPS अधिकारी ईशा सिंह को एक और अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। AGMUT कैडर की 2021 बैच की अधिकारी ईशा सिंह फिलहाल DCP (वेलफेयर) के पद पर कार्यरत हैं। अब उन्हें लीगल सेल का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। कम उम्र में पुलिस और प्रशासनिक सेवाओं में अपनी अलग पहचान बनाने वाली ईशा सिंह पहले भी अपनी सख्त और निडर कार्यशैली को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 14 September 2026
IBN24 NEWS NETWORK : पुडुचेरी में अभिनेता विजय की रैली के दौरान बेकाबू भीड़ के सामने डटे रहने और TVK के एक नेता का सामना करने का उनका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ‘लेडी सिंघम’ के नाम से जाना जाने लगा।
तीन पीढ़ियों से पुलिस सेवा से जुड़ा परिवार
ईशा सिंह का पुलिस सेवा से रिश्ता नया नहीं है। वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी की अधिकारी हैं, जिन्होंने IPS को करियर के रूप में चुना है। उनके दिवंगत दादा आर.बी. सिंह और पिता योगेश प्रताप सिंह, दोनों ही IPS अधिकारी रह चुके हैं।

उनके पिता योगेश प्रताप सिंह 1985 बैच के IPS अधिकारी थे और अपनी ईमानदारी तथा बेबाक कार्यशैली के लिए जाने जाते थे। 1990 के दशक में CBI में कार्यरत रहते हुए उन्होंने कई बड़े घोटालों की जांच की और महत्वपूर्ण मामलों का पर्दाफाश किया। हालांकि, उनकी ईमानदारी और सिस्टम के खिलाफ खड़े होने की कीमत भी उन्हें चुकानी पड़ी। लंबे समय तक दबाव और संघर्ष के बाद उन्होंने वर्ष 2004 में इस्तीफा दे दिया।
महज साढ़े आठ साल की उम्र में लिया था बड़ा संकल्प
ईशा सिंह उस समय महज साढ़े आठ साल की थीं, जब उनके पिता को सिस्टम के दबाव के बीच इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने अपने पिता को बिना पेंशन के लंबे समय तक संघर्ष करते देखा। यही अनुभव आगे चलकर उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ बना।

अपने पिता की लड़ाई को आगे बढ़ाने और समाज के प्रति जिम्मेदार भूमिका निभाने के संकल्प के साथ ईशा सिंह ने UPSC परीक्षा देने का फैसला किया। उनका मानना रहा कि देश को संवेदनशील, ईमानदार और सामाजिक रूप से जिम्मेदार नेतृत्व की जरूरत है।
मां भी रहीं केंद्रीय सेवा अधिकारी, कानून की भी पढ़ाई-समझ
ईशा सिंह की मां आभा सिंह भी केंद्रीय सेवा की अधिकारी रह चुकी हैं। बाद में उन्होंने वकालत के क्षेत्र में जाने के लिए VRS लिया। मां के लॉ ऑफिस में काम करते हुए ईशा सिंह को कानून और सामाजिक मुद्दों को करीब से समझने का अवसर मिला।

उन्होंने सफाई कर्मचारियों के अधिकार, विचाराधीन कैदियों को कानूनी सहायता, कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न और गैरकानूनी गिरफ्तारी जैसे मामलों में कोर्ट में बहस की। कानून से जुड़े इस अनुभव का फायदा अब उन्हें पुलिस सेवा में भी मिल रहा है।
UPSC में हासिल की 191वीं रैंक
ईशा सिंह ने वर्ष 2020 की UPSC परीक्षा में 191वीं रैंक हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने IPS के AGMUT कैडर को जॉइन किया। उनकी पहली पोस्टिंग पुडुचेरी में हुई।
दिसंबर 2025 में पुडुचेरी में एक राजनीतिक रैली के दौरान वह उस समय सुर्खियों में आईं, जब उन्होंने बेकाबू भीड़ के सामने मजबूती से मोर्चा संभाला। इस दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और उन्हें ‘लेडी सिंघम’ का नाम दिया गया।
इसके बाद जनवरी 2026 में उनका दिल्ली ट्रांसफर हुआ। दिल्ली पुलिस में उन्हें लीगल सेल की जिम्मेदारी दी गई है। अब वह पुलिस के कानूनी मामलों और अदालत से जुड़े मामलों में अपनी भूमिका निभाएंगी।
दिल्ली पुलिस में कई IPS अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

ईशा सिंह के अलावा दिल्ली पुलिस में कई अन्य वरिष्ठ IPS अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
- 2008 बैच के IPS अधिकारी चिन्मय बिस्वाल को ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ऑपरेशन्स) नियुक्त किया गया है। उन्हें IFSO यूनिट का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
- 2010 बैच के IPS अधिकारी ईश सिंघल को एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (इकोनॉमिक ऑफेंस विंग) की जिम्मेदारी दी गई है।
- दिनेश कुमार गुप्ता को एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (ट्रैफिक) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
- 2013 बैच के IPS अधिकारी विकास कुमार को डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (ट्रैफिक) नियुक्त किया गया है।
पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहीं ईशा सिंह
ईशा सिंह की कहानी सिर्फ एक IPS अधिकारी के करियर की कहानी नहीं है, बल्कि यह परिवार, संघर्ष और संकल्प की कहानी भी है। जिस परिवार की दो पीढ़ियां पुलिस सेवा में रह चुकी हैं, उसी विरासत को ईशा सिंह ने आगे बढ़ाया है।

पिता के संघर्ष को बचपन से देखने और कानून के क्षेत्र में काम करने के बाद पुलिस सेवा में आने वाली ईशा सिंह के सामने अब दिल्ली पुलिस में कानूनी मामलों की अहम जिम्मेदारी है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, मजबूत इरादे और साफ नीयत के साथ लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
ईशा सिंह का सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल करने का सपना देखते हैं।
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