Supreme Court Minor Protesters : छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन पहली नजर में शांतिपूर्ण था और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने 18 वर्ष से कम आयु के उन प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया है, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 28 July 2026
IBN24 News Network : सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पुलिस द्वारा जरूरत से अधिक बल प्रयोग किया गया है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
पुलिस कार्रवाई की होगी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पहली नजर में यह मामला स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी जांच से प्रदर्शनकारियों और पुलिस, दोनों पक्षों के दावों की निष्पक्ष जांच संभव हो सकेगी।

साथ ही अदालत ने कहा कि 2018 में पुलिस कार्रवाई को लेकर बनाए गए दिशा-निर्देशों की समीक्षा का समय आ गया है। वर्ष 2026 की परिस्थितियों के अनुसार इन नियमों को अपडेट किया जाना चाहिए ताकि प्रदर्शन शुरू होते ही तय प्रोटोकॉल प्रभावी ढंग से लागू किए जा सकें।
सॉलिसिटर जनरल ने क्या कहा ?

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का पूरा अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई होना भी आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन के दौरान 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र जांच से दोनों पक्षों के आरोपों और दावों की निष्पक्ष पड़ताल की जा सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट के 4 अहम अंतरिम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चार महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए—
- 18 वर्ष से कम आयु के जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
- पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जरूरत से अधिक बल प्रयोग करने वालों की जवाबदेही तय की जाए।
- प्रदर्शन से जुड़े CCTV फुटेज, ड्रोन वीडियो, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल सबूत सुरक्षित रखे जाएं।
- दिल्ली सहित आठ राज्यों से जवाब मांगा गया है। जिन लोगों के खिलाफ पहले कोई आपराधिक मामला नहीं था, उनके खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
सुनवाई के अंत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एक याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग का विरोध किया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पहले याचिका की तकनीकी कमियां दूर की जाएं।

इसी दौरान एक अन्य वकील ने दावा किया कि हिरासत में लिए गए छात्रों की कानूनी सहायता के दौरान उनके साथ भी मारपीट की गई। अदालत ने संबंधित मामलों की अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय की है। जरूरत पड़ने पर उस दिन अतिरिक्त अंतरिम आदेश भी जारी किए जा सकते हैं।
कई राज्यों को नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि जंतर-मंतर और अन्य राज्यों में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जरूरत से अधिक बल प्रयोग किया। आरोपों के अनुसार पेलेट गन, रबर बुलेट, इलेक्ट्रिक बैटन और कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र घायल हुए। एक छात्र की आंख की रोशनी जाने और एक पत्रकार के गंभीर रूप से घायल होने के भी आरोप लगाए गए हैं।
इन आरोपों को गंभीर मानते हुए अदालत ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, असम और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
क्या है पूरा मामला ?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया और अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए नाबालिग प्रदर्शनकारियों की रिहाई, स्वतंत्र जांच और सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर अत्यधिक बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। अब इस मामले में स्वतंत्र जांच और 3 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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