Indian tourists kidnapped in Thailand : ईलैंड के पटाया शहर से तीन भारतीय पर्यटकों के अपहरण का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। थाई पुलिस ने इस मामले में पांच भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सस्ते 7 दिन के टूर पैकेज का लालच देकर तीनों युवकों को थाईलैंड बुलाया और फिर उन्हें बंधक बनाकर उनके परिवारों से कुल 1.20 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी। पुलिस का कहना है कि पूरी साजिश दुबई में बैठे एक पाकिस्तानी नागरिक के निर्देश पर रची गई थी।

Written by Kajal Panchal • Published on : 29 July 2026
IBN24 News Network : पीड़ितों की पहचान मोहित (23), आशीष (24) और हिमांशु (20) के रूप में हुई है। तीनों को पटाया पहुंचने के बाद एक मकान में कैद कर लिया गया। इसके बाद उनके परिवारों से प्रत्येक के बदले 40-40 लाख रुपए की फिरौती मांगी गई। रकम नहीं मिलने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि वे पिछले एक महीने से चैट एप्लिकेशन के जरिए दुबई में मौजूद एक पाकिस्तानी नागरिक के संपर्क में थे। उसी ने अपहरण की पूरी योजना बनाई थी और फिरौती की रकम क्रिप्टोकरेंसी के जरिए लेने को कहा था। बदले में आरोपियों को नकदी, कीमती सामान और थाईलैंड से बाहर जाने के लिए एयरलाइन टिकट देने का वादा किया गया था।
थाई पुलिस ने इस मामले में अवतार सिंह (38), जगजीत सिंह (38), रंभालक कुमार (24), सुखबीर सिंह (37) और कुलरा सिंह (27) को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और कथित पाकिस्तानी मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है।
कई दिनों तक भूखा रखा, बेरहमी से की मारपीट

पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि उन्हें कई दिनों तक खाना नहीं दिया गया। उनके हाथ-पैर बांध दिए गए और उल्टा लटकाकर पीटा गया। परिवारों पर दबाव बनाने के लिए आरोपियों ने उनके शरीर पर लाल स्प्रे पेंट लगाया ताकि वीडियो कॉल के दौरान ऐसा लगे कि उन्हें गंभीर चोटें आई हैं और उनके शरीर से खून बह रहा है।
जब परिजनों को शक हुआ तो उन्होंने भारतीय दूतावास से संपर्क किया। इसके बाद 21 जुलाई को दूतावास ने चोनबुरी इमिग्रेशन पुलिस और पटाया पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और खुफिया जानकारी के आधार पर पटाया के एक टाउनहाउस में छापा मारा, जहां तीनों युवक अलग-अलग कमरों में बंधे मिले। उनके मुंह पर टेप लगा हुआ था और शरीर पर चोटों के निशान थे। मौके से टेप, लकड़ी का डंडा और लाल स्प्रे पेंट भी बरामद किया गया।
पहले भी एक भारतीय बना था शिकार
रेस्क्यू किए गए युवकों ने पुलिस को बताया कि उनके आने से पहले भी एक भारतीय नागरिक को उसी मकान में बंधक बनाया गया था। उसके परिजनों ने करीब 30 लाख रुपए की फिरौती देने के बाद उसे छुड़ाया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह गिरोह और कितने मामलों में शामिल रहा है।
थाईलैंड अपराधियों के लिए क्यों बन रहा है सुरक्षित ठिकाना ?

विशेषज्ञों का मानना है कि थाईलैंड में भारतीय पर्यटकों की बड़ी संख्या, आसान यात्रा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय अपराधी नेटवर्क की सक्रियता के कारण ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। म्यांमार और कंबोडिया की सीमा से जुड़े इलाकों में साइबर फ्रॉड और संगठित अपराध के नेटवर्क पहले से सक्रिय हैं। ऐसे में कुछ गिरोह सस्ते टूर पैकेज या नौकरी का झांसा देकर लोगों को बुलाते हैं और बाद में उन्हें बंधक बनाकर फिरौती मांगते हैं।
अपराधी फिरौती के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल क्यों करते हैं ?

जांच एजेंसियों के अनुसार, सीमा-पार अपराधों में कई गिरोह क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल इसलिए करते हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रकम ट्रांसफर करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है और जांच प्रक्रिया अधिक जटिल हो जाती है। हालांकि, कई देशों में क्रिप्टो एक्सचेंज नियामकीय निगरानी के दायरे में हैं और जांच एजेंसियां ब्लॉकचेन ट्रांजेक्शन को ट्रैक करने की भी क्षमता रखती हैं। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय अपराधी नेटवर्क इसका दुरुपयोग करने की कोशिश करते हैं।
जांच जारी
थाई पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। अधिकारियों का फोकस इस अपहरण गिरोह के पूरे नेटवर्क, कथित पाकिस्तानी मास्टरमाइंड और उससे जुड़े अन्य संदिग्धों तक पहुंचने पर है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या यह गिरोह पहले हुई फिरौती और अपहरण की अन्य घटनाओं में भी शामिल रहा है।
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