Cancer Medicine Price Cut : कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाओं की कीमतों को लेकर मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के फैसले के बाद कैंसर की 543 दवा ब्रांडों और पैक की कीमतों में बदलाव किया गया है। इनमें 397 दवाओं की कीमतें घटाई गई हैं। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी।

Written by Kajal Panchal • Published on : 29 October 2026
IBN24 NEWS NETWORK : कीमतों में कटौती का सबसे बड़ा असर कुछ बेहद महंगी दवाओं पर पड़ा है। सैमटेपा इंजेक्शन की कीमत ₹80,071 से घटाकर ₹7,150 कर दी गई है। वहीं, पैलबोप्रो दवा के 21 कैप्सूल वाले पैक की कीमत ₹40,421 से घटकर ₹2,720 रह गई है। इससे कैंसर के इलाज पर होने वाला खर्च कम होने की उम्मीद है।
543 दवा ब्रांडों में से 397 की कीमतें घटीं
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 543 दवा ब्रांडों और पैक में से 397 यानी करीब 73% की कीमतें कम की गई हैं। इनमें 217 दवाओं की कीमतें आधे से भी कम रह गई हैं। इसके अलावा, 97 ब्रांडों की कीमतों में 70% से अधिक और 50 ब्रांडों की कीमतों में 80% से अधिक की कटौती हुई है। पांच दवाओं की कीमतों में 90% से ज्यादा कमी की गई है।

हालांकि, सभी दवाओं के दाम नहीं घटाए गए हैं। कुल 146 ब्रांड-पैक की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए मरीजों को दवा खरीदने से पहले उसके नए अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) की जानकारी लेनी चाहिए।
इन महंगी कैंसर दवाओं के नए रेट
| दवा का नाम | पुरानी कीमत | नई कीमत |
|---|---|---|
| सैमटेपा इंजेक्शन | ₹80,071 | ₹7,150 |
| पैलबोप्रो, 21 कैप्सूल का पैक | ₹40,421 | ₹2,720 |

इन दवाओं की कीमतों में भारी कटौती से मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक खर्च इलाज की योजना, निर्धारित खुराक और अस्पताल की अन्य फीस पर भी निर्भर करेगा।
कुछ महंगी दवाओं की कीमतें अब भी बरकरार
कैंसर की कई दवाओं के दाम घटाए जाने के बावजूद कुछ महंगी दवाओं की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इनमें इम्यूनोथेरेपी की दवा कीट्रूडा भी शामिल है, जिसका इस्तेमाल कई प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है। इसकी बताई गई कीमत अभी भी ₹2,16,500 है।
इसके अलावा, ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रिबोसाइक्लिब की कीमत ₹24,435 पर बनी हुई है। टैग्रिसो, टेसेंट्रिक, डार्जालेक्स और इम्फिंजी जैसी दवाओं के दामों में भी बदलाव नहीं हुआ है। इनमें से कई दवाएं पेटेंट और नई तकनीक से जुड़ी हैं। ऐसी दवाओं की कीमतों में बदलाव करना नियामकीय और व्यावसायिक चुनौतियों से जुड़ा हो सकता है।
एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% तक सीमित
सरकार ने 137 एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30% तक सीमित किया है। इसका उद्देश्य दवा की खरीद कीमत और मरीज को बेची जाने वाली कीमत के बीच अत्यधिक अंतर को कम करना है।
सरकार के अनुसार, इस कदम से मरीजों को सालाना करीब ₹2,500 करोड़ की बचत होने की उम्मीद है। हालांकि, इस बचत का वास्तविक लाभ दवाओं की कीमतों, उपलब्धता और मरीजों के इलाज पर निर्भर करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की कीमतों पर उठाए सवाल
कैंसर की दवाओं पर भारी मुनाफे और मरीजों पर बढ़ते इलाज के खर्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। अदालत ने दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत और रिटेलर को मिलने वाली कीमतों के बीच बड़े अंतर पर चिंता जताई है।

27 अक्टूबर: दवा निर्माताओं को फायदा पहुंचाने वाले सिस्टम पर सवाल
27 अक्टूबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि दवाओं की MRP और उनकी खरीद कीमत के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों है। अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि मरीजों को राहत देने के लिए कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं किया जा रहा।
12 अक्टूबर: ट्रेड मार्जिन सीमित करने पर केंद्र से सवाल
12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को MRP के 30% तक सीमित करने के केंद्र सरकार के फैसले पर चर्चा की। अदालत ने यह भी सवाल किया कि दूसरी दवाओं के ट्रेड मार्जिन को नियंत्रित करने के लिए इसी तरह के कदम क्यों नहीं उठाए जा सकते।
29 सितंबर: कैंसर की दवाओं की ऊंची कीमतों पर नाराजगी
29 सितंबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की दवाओं की कीमतों में भारी अंतर पर नाराजगी जताई थी। अदालत के सामने ₹2,700 की दवा पर ₹27,000 की MRP होने का मामला भी उठा था।
इन सुनवाइयों के बीच दवाओं की कीमतों में की गई ताजा कटौती को कैंसर के इलाज को अधिक किफायती बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
Please also read this article :
नक्शे देखें
Instagram: https://www.instagram.com/ib





