New Immigration Rules 2026 India : भारत सरकार ने इमिग्रेशन नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए कुछ विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट और वीजा संबंधी छूट की शर्तों में संशोधन किया है। इस फैसले का असर हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के उन लोगों पर पड़ेगा, जो धार्मिक उत्पीड़न के कारण इन देशों से भारत आए थे।

Written by Kajal Panchal • Published on : 6 November 2026
IBN24 NEWS NETWORK : गृह मंत्रालय की ओर से 6 नवंबर को जारी नए आदेश में कई श्रेणियों के विदेशी नागरिकों के लिए नियमों को स्पष्ट किया गया है। इसके अलावा, कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को पासपोर्ट रिन्यू कराने में राहत दी गई है। वहीं, मलेशिया और सिंगापुर की नागरिकता लेने वाले भारतीय मूल के कुछ लोगों को भी विशेष छूट मिलेगी।
नए आदेश में भारत, नेपाल और भूटान के बीच यात्रा करने वाले नागरिकों के लिए पहचान संबंधी नियमों को भी स्पष्ट किया गया है। आइए जानते हैं इमिग्रेशन नियमों में हुए 5 बड़े बदलाव।
1. पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए 6 समुदायों के लिए बदले नियम
नए इमिग्रेशन आदेश के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए छह गैर-मुस्लिम समुदायों के लोगों के लिए पासपोर्ट और वीजा संबंधी छूट की शर्तों में बदलाव किया गया है। इन समुदायों में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शामिल हैं। यह प्रावधान उन लोगों से संबंधित है, जो धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए थे और 31 दिसंबर 2024 या उससे पहले देश में प्रवेश कर चुके थे।

इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो बिना वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के भारत पहुंचे थे या जिनके यात्रा दस्तावेजों की वैधता समाप्त हो चुकी है। नए आदेश के तहत भारत में आगे रहने के लिए निर्धारित इमिग्रेशन और वीजा संबंधी शर्तों का पालन करना होगा।
2. कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को पासपोर्ट रिन्यू कराने से राहत
नए आदेश में पाकिस्तान से आए कुछ ऐसे नागरिकों को राहत दी गई है, जो लंबे समय से भारत में स्थायी रूप से रह रहे हैं और अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट रिन्यू नहीं करा पा रहे हैं। यह छूट उन लोगों के लिए है, जो 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले भारत आए थे। खासतौर पर ऐसे नागरिक, जिनके पास पाकिस्तान का कंप्यूटरीकृत राष्ट्रीय पहचान पत्र (CNIC) नहीं है और इसी वजह से उनका पासपोर्ट रिन्यू नहीं हो पा रहा।

हालांकि, इस राहत के लिए कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं। संबंधित व्यक्ति को लिखित आश्वासन देना होगा कि वह दोबारा पाकिस्तान नहीं लौटेगा। यानी केवल भारत में लंबे समय से रहने के आधार पर यह छूट अपने आप नहीं मिलेगी।
3. मलेशिया और सिंगापुर की नागरिकता लेने वाले भारतीय मूल के लोगों को राहत
मलेशिया और सिंगापुर की नागरिकता हासिल कर चुके भारतीय मूल के कुछ लोगों को भी नए आदेश में राहत दी गई है। इसके तहत ऐसे लोगों को पासपोर्ट रिन्यू कराने की अनिवार्यता से छूट मिल सकती है, जो 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले संबंधित देश के पासपोर्ट पर भारत आए थे। यह सुविधा उन लोगों के लिए है, जिनका पासपोर्ट एक्सपायर हो चुका है और संबंधित देश के नियमों के कारण उसका नवीनीकरण संभव नहीं हो पा रहा।
भारतीय मूल का विदेशी नागरिक किसे माना जाएगा ?

- ऐसा व्यक्ति, जो पहले भारतीय नागरिक रहा हो और अब किसी अन्य देश की नागरिकता रखता हो।
- जिसके पास पहले भारत का पासपोर्ट रहा हो।
- जिसके माता-पिता, दादा-दादी या परदादा-परदादी का जन्म भारत में हुआ हो और वे भारत में स्थायी रूप से रहते रहे हों।
हालांकि, इस विशेष छूट का लाभ पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल और चीन के नागरिकों को नहीं मिलेगा।
4. भारत, नेपाल और भूटान के बीच यात्रा के नियम हुए स्पष्ट
नए आदेश में भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों के बीच आवागमन को लेकर भी महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया गया है। तीनों देशों के नागरिक जमीन या हवाई मार्ग से सीधे एक-दूसरे के देश में यात्रा करते समय निर्धारित पहचान दस्तावेज दिखाकर आवागमन कर सकेंगे। इमिग्रेशन अधिकारी जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जानकारी और दस्तावेज भी मांग सकते हैं।
हालांकि, कुछ परिस्थितियों में पासपोर्ट और वीजा अनिवार्य होंगे।

- यदि कोई भारतीय नागरिक नेपाल या भूटान के रास्ते किसी तीसरे देश से भारत आता है या वहां जाता है, तो उसे वैध पासपोर्ट रखना होगा और निर्धारित इमिग्रेशन पोस्ट का इस्तेमाल करना होगा।
- नेपाल और भूटान के ऐसे नागरिक, जिन्होंने चीन, मकाऊ, हांगकांग या पाकिस्तान से अपनी यात्रा शुरू की है अथवा इन क्षेत्रों से होकर आए हैं, उन्हें वैध पासपोर्ट और वीजा की जरूरत होगी।
इस बदलाव का उद्देश्य तीनों देशों के बीच सामान्य यात्रा और विशेष परिस्थितियों में होने वाले अंतरराष्ट्रीय आवागमन के नियमों को स्पष्ट करना है।
5. श्रीलंकाई तमिलों, तिब्बतियों और सैन्य कर्मियों को भी विशेष छूट
नए आदेश में कुछ अन्य श्रेणियों के लोगों को पहले से मिल रही विशेष छूट भी जारी रखी गई है। श्रीलंकाई तमिल: सितंबर 2025 के आदेश के तहत 9 जनवरी 2015 या उससे पहले भारत में शरण लेने वाले पंजीकृत श्रीलंकाई तमिलों को पासपोर्ट और वीजा के सामान्य नियमों से छूट दी गई थी। नए आदेश में भी यह व्यवस्था बरकरार रखी गई है।

तिब्बती नागरिक: उन तिब्बतियों को भी विशेष छूट जारी रहेगी, जो 1959 से 30 मई 2003 के बीच काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से परमिट लेकर भारत आए थे। इसके अलावा, 30 मई 2003 के बाद भारत-नेपाल सीमा के निर्धारित इमिग्रेशन पोस्ट से विशेष परमिट के आधार पर आने वाले तिब्बतियों को भी निर्धारित पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
सेना और विदेशी सैन्य जहाजों के कर्मचारी: नए आदेश में सेना के जवानों और विदेशी सैन्य जहाजों के कर्मचारियों की कुछ श्रेणियों को भी इमिग्रेशन नियमों के तहत विशेष छूट दी गई है।
CAA 2019 और इमिग्रेशन आदेश 2026 में क्या है अंतर ?
नागरिकता संशोधन कानून (CAA), 2019 और नए इमिग्रेशन आदेश, 2026 का संबंध पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए छह गैर-मुस्लिम समुदायों से है। हालांकि, दोनों के उद्देश्य अलग-अलग हैं।

CAA के तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवेदन करने का रास्ता दिया गया है। वहीं, इमिग्रेशन आदेश का संबंध देश में प्रवेश, रहने, पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों से जुड़ी शर्तों से है। इसलिए दोनों कानूनों और आदेशों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। नए इमिग्रेशन नियमों के तहत मिलने वाली छूट का अर्थ अपने आप भारतीय नागरिकता मिलना नहीं है।
Please also read this article :
Instagram: https://www.instagram.com/ib





