Online Betting Ban : भारत में ऑनलाइन सट्टेबाजी पर कानून सख्त होने के बावजूद इसका अवैध कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी का अवैध बाजार करीब 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कानून से बचने के लिए कई सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म विदेशों से संचालित किए जा रहे हैं। इसके लिए नए डोमेन, विदेशी सर्वर, टेलीग्राम ग्रुप, म्यूल बैंक अकाउंट और एजेंट नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 15 September 2026
IBN24 NEWS NETWORK : रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 15 अवैध ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म पर 540 करोड़ से ज्यादा विजिट दर्ज की गईं। यानी औसतन हर दिन करीब 1.48 करोड़ बार इन प्लेटफॉर्म तक पहुंच बनाई गई। इसके अलावा 854 इन्फ्लुएंसर भी सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के प्रचार से जुड़े पाए गए। हालांकि, किसी वेबसाइट की विजिट की संख्या सीधे तौर पर अलग-अलग यूजर्स की संख्या नहीं बताती, क्योंकि एक ही व्यक्ति किसी प्लेटफॉर्म पर कई बार विजिट कर सकता है।
2025 में कानून पारित, 1 मई 2026 से लागू
ऑनलाइन मनी गेमिंग और सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए संसद ने 2025 में कानून पारित किया। यह कानून 1 मई 2026 से प्रभावी हुआ। इसके तहत ऑनलाइन मनी गेम चलाने, उसे बढ़ावा देने, उसका विज्ञापन करने और उससे जुड़े भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने पर रोक का प्रावधान है।

कानून में ऑनलाइन मनी गेम को लेकर लक और कौशल आधारित खेलों के बीच अंतर किए बिना संबंधित गतिविधियों पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद निजी मैसेजिंग ग्रुप, सरोगेट विज्ञापन, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एजेंट नेटवर्क के जरिए विदेशी सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म तक यूजर्स को पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।
रोज करोड़ों बार पहुंच रहे सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म
रिपोर्ट में 15 अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म की गतिविधियों का हवाला देते हुए 540 करोड़ से ज्यादा विजिट का आंकड़ा दिया गया है। यह आंकड़ा बताता है कि प्रतिबंध के बावजूद ऐसे प्लेटफॉर्म तक इंटरनेट के जरिए बड़ी संख्या में पहुंच बनी हुई है।

सट्टेबाजी कंपनियां कार्रवाई से बचने के लिए वेबसाइट का डोमेन बदलने, नए लिंक जारी करने और अलग-अलग डिजिटल चैनलों के जरिए यूजर्स तक पहुंचने की कोशिश करती हैं। टेलीग्राम और दूसरे निजी मैसेजिंग ग्रुप भी ऐसे नेटवर्क के लिए इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है।
854 इन्फ्लुएंसर के प्रचार का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 854 इन्फ्लुएंसर सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के प्रचार से जुड़े हुए पाए गए। सोशल मीडिया पर इन प्लेटफॉर्म के लिंक, बोनस ऑफर और दूसरे प्रमोशनल कंटेंट के जरिए यूजर्स को आकर्षित करने की कोशिश की जाती है।
कई बार सट्टेबाजी के सीधे विज्ञापन के बजाय दूसरे नामों या सेवाओं की आड़ में प्रचार किए जाने की बात भी सामने आती है।
दुनियाभर में 8 करोड़ वयस्क सट्टे की लत से प्रभावित
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में करीब 8 करोड़ वयस्क सट्टे की लत से जूझ रहे हैं। सट्टेबाजी की समस्या का असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार और आसपास के लोगों पर भी पड़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक सट्टेबाज से औसतन छह अन्य लोग प्रभावित हो सकते हैं। लगातार पैसे हारने की स्थिति में परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा के जरूरी खर्चों पर भी असर पड़ सकता है।
हार के बाद बढ़ता जाता है दांव
ऑनलाइन सट्टेबाजी में शुरुआत में छोटी रकम से खेल शुरू करने के बाद व्यक्ति धीरे-धीरे ज्यादा रकम लगाने लग सकता है। जीत मिलने पर दोबारा खेलने की इच्छा बढ़ती है, जबकि हार के बाद पिछली रकम वापस पाने के लिए बड़ा दांव लगाने का जोखिम बढ़ जाता है।
यही चक्र धीरे-धीरे सट्टेबाजी की आदत को गंभीर समस्या में बदल सकता है।
सट्टे की लत के 3 संकेत
सट्टेबाजी की आदत गंभीर रूप ले रही है या नहीं, इसे तीन प्रमुख संकेतों से समझा जा सकता है।
1. नियंत्रण खोना
व्यक्ति यह तय नहीं कर पाता कि उसे कब सट्टा खेलना बंद करना है। समय और पैसे पर उसका नियंत्रण कम होता जाता है।
2. सट्टेबाजी को प्राथमिकता देना
व्यक्ति काम, परिवार, पढ़ाई या अन्य जरूरी गतिविधियों की तुलना में सट्टेबाजी को ज्यादा महत्व देने लगता है।
3. नुकसान के बावजूद खेलते रहना
लगातार पैसे हारने के बाद भी व्यक्ति सट्टेबाजी छोड़ने के बजाय नुकसान की भरपाई करने के लिए फिर से दांव लगाता रहता है।
एल्गोरिदम और भ्रामक डिजाइन भी चिंता का विषय
ऑनलाइन मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म पर यूजर्स को लंबे समय तक जोड़े रखने के लिए अलग-अलग डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें आकर्षक बोनस, नोटिफिकेशन, रिवॉर्ड सिस्टम, गेम डिजाइन और यूजर के व्यवहार के आधार पर दिखाया जाने वाला कंटेंट शामिल हो सकता है।
जीत के बाद मिलने वाला इनाम यूजर को दोबारा खेलने के लिए प्रेरित कर सकता है। वहीं हारने के बाद रकम वापस पाने की कोशिश व्यक्ति को लगातार बड़ा दांव लगाने की तरफ ले जा सकती है।
मनी लॉन्ड्रिंग का भी खतरा
ऑनलाइन सट्टेबाजी केवल जुए या गेमिंग तक सीमित समस्या नहीं है। अवैध प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाले वित्तीय लेनदेन से मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर फ्रॉड का खतरा भी जुड़ा है।

म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए पैसों का लेनदेन, फर्जी पहचान और अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करने जैसे तरीकों का इस्तेमाल अवैध नेटवर्क में किया जा सकता है। कुछ मामलों में अवैध रकम को डिजिटल करेंसी या दूसरे माध्यमों से दूसरे देशों तक पहुंचाने की कोशिश भी की जा सकती है।
साइबर एक्सपर्ट ने बताया क्यों जरूरी है अंतरराष्ट्रीय निगरानी
साइबर और डेटा प्राइवेसी एक्सपर्ट रितेश भाटिया के मुताबिक, इंटरनेट की कोई सीमा नहीं है। किसी वेबसाइट या ऐप को ब्लॉक करना अकेले स्थायी समाधान नहीं हो सकता, क्योंकि ऑपरेटर नया डोमेन, ऐप या एपीके फाइल के जरिए दोबारा सामने आ सकते हैं।
उनके अनुसार, सट्टेबाजी के नेटवर्क को रोकने के लिए केवल वेबसाइट ब्लॉक करने के बजाय उसके पूरे नेटवर्क पर नजर रखने की जरूरत है। इसमें वित्तीय लेनदेन, विज्ञापन नेटवर्क, सोशल मीडिया प्रचार और यूजर्स तक पहुंचाने वाले एजेंट शामिल हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने और लगातार निगरानी को भी जरूरी बताया।
क्या केवल बैन से खत्म होगा ऑनलाइन सट्टा ?
ऑनलाइन सट्टेबाजी पर कानून लागू होने के बावजूद विदेशी सर्वर, नए डोमेन, सोशल मीडिया, निजी मैसेजिंग ग्रुप और एजेंट नेटवर्क जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसलिए ऑनलाइन सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए वेबसाइट और ऐप को ब्लॉक करने के साथ-साथ वित्तीय नेटवर्क पर निगरानी, अवैध विज्ञापनों पर कार्रवाई, इन्फ्लुएंसर की जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच सहयोग जरूरी माना जा रहा है।
ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े आंकड़ों में तेजी से बदलाव हो सकता है। इसलिए किसी भी बाजार आकार, यूजर संख्या या विजिट के आंकड़े को संबंधित रिपोर्ट और उसकी पद्धति के संदर्भ में ही देखना जरूरी है।
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