UPI Payment Charges : भारत में UPI से पेमेंट करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए बड़ी खबर है। वित्त मंत्रालय ने UPI पेमेंट पर लगने वाले संभावित चार्ज को लेकर स्थिति साफ कर दी है। सरकार के मुताबिक, ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर किसी तरह की डायरेक्ट या इनडायरेक्ट फीस नहीं लगा सकते।

Written by Kajal Panchal • Published on : 15 September 2026
IBN24 NEWS NETWORK : हालांकि, ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। क्या अब ₹2,500, ₹5,000 या ₹10,000 का UPI पेमेंट करने पर चार्ज देना होगा? क्या दुकानदारों से MDR यानी Merchant Discount Rate लिया जाएगा? और क्या इसका असर आम ग्राहक की जेब पर पड़ेगा? आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब।
क्या ₹2,000 UPI पेमेंट की नई लिमिट है ?
नहीं। ₹2,000 UPI की नई पेमेंट लिमिट नहीं है। यूजर UPI के जरिए ₹2,000 से ज्यादा रकम का भुगतान कर सकता है।
₹2,000 की राशि सिर्फ उस सीमा से जुड़ी है जिस पर फिलहाल बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर किसी तरह की फीस नहीं लगा सकते। यानी ₹2,000 से ज्यादा का पेमेंट करना प्रतिबंधित नहीं है।
₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर अभी चार्ज लगेगा ?
अभी ऐसी कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। अगर कोई व्यक्ति ₹2,500, ₹5,000 या ₹10,000 का UPI पेमेंट करता है तो सिर्फ रकम ₹2,000 से ज्यादा होने की वजह से उससे कोई नया चार्ज नहीं लिया जाएगा।

भविष्य में अगर ₹2,000 से ज्यादा के कुछ पेमेंट पर शुल्क लगाने की व्यवस्था बनाई जाती है तो उसके लिए सरकार को अलग से नियम और रेट तय करने होंगे।
₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट की चर्चा क्यों हो रही है ?
इसकी मुख्य वजह बड़े मर्चेंट पेमेंट हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दुकानदारों को किए गए UPI पेमेंट में करीब 4 फीसदी ट्रांजैक्शन ₹2,000 से ज्यादा के थे। हालांकि, कुल रकम के हिसाब से इन ट्रांजैक्शन की हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई रही।
यानी संख्या में बड़े पेमेंट कम हैं, लेकिन इनमें काफी ज्यादा रकम का लेनदेन होता है। इसी वजह से ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर संभावित शुल्क को लेकर चर्चा शुरू हुई।
क्या बैंक खुद से बड़े UPI पेमेंट पर फीस लेना शुरू कर सकते हैं ?
नहीं। सिर्फ इसलिए कि कोई UPI पेमेंट ₹2,000 से ज्यादा का है, बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर अपनी तरफ से मनमाना चार्ज नहीं लगा सकते।

इसके लिए सरकार की ओर से नियम और शुल्क की दर तय होना जरूरी होगा।
दोस्त या परिवार को ₹5,000 या ₹10,000 भेजने पर क्या चार्ज लगेगा ?
नहीं। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले P2P यानी Person-to-Person पेमेंट मुफ्त रहने की बात कही गई है।
इसका मतलब है कि अगर आप अपने दोस्त, परिवार के सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति को ₹5,000 या ₹10,000 UPI के जरिए भेजते हैं तो केवल रकम ज्यादा होने के कारण कोई नया चार्ज नहीं लगेगा।
फिर चार्ज की चर्चा किन पेमेंट को लेकर है ?
मुख्य चर्चा मर्चेंट यानी दुकानदारों और कारोबारियों को किए जाने वाले बड़े UPI पेमेंट को लेकर है।
जब कोई ग्राहक किसी दुकान, कारोबारी या सर्विस प्रोवाइडर को UPI के जरिए भुगतान करता है, तो भविष्य में ऐसे कुछ बड़े मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।
MDR क्या होता है ?
MDR यानी Merchant Discount Rate डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा के बदले मर्चेंट से लिया जाने वाला शुल्क है। आसान उदाहरण से समझें। अगर कोई ग्राहक दुकान पर ₹5,000 का UPI पेमेंट करता है और भविष्य में MDR की दर 0.4 फीसदी तय की जाती है, तो ₹5,000 का 0.4 फीसदी यानी ₹20 MDR होगा।
हालांकि, 0.4 फीसदी को UPI की नई MDR दर नहीं माना जाना चाहिए। यह सिर्फ उदाहरण के तौर पर समझाया गया है। फिलहाल ऐसी दर तय नहीं हुई है।
अगर MDR लागू हुआ तो फीस किससे ली जाएगी ?
MDR मुख्य रूप से मर्चेंट यानी दुकानदार या कारोबारी से जुड़ा शुल्क है। सरकार ने आम यूजर के लिए UPI को मुफ्त रखने की नीति जारी रहने की बात कही है।

ग्राहक से सीधे कोई अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा या नहीं, यह भविष्य में बनाए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगा।
सरकार ने UPI कानून में बदलाव क्यों किया ?
अगस्त 2026 में संसद ने Taxation and Other Laws (Amendment) Act, 2026 पास किया था। इसके जरिए Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में बदलाव किया गया। इस बदलाव के बाद सरकार को यह तय करने का अधिकार मिला कि किन डिजिटल पेमेंट पर फीस नहीं लगाई जाएगी।
इसके बाद ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर संभावित चार्ज को लेकर अटकलें शुरू हुईं। इसी बीच वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी कर ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर किसी तरह का चार्ज नहीं लगाने की स्थिति स्पष्ट की।
क्या सरकार UPI को महंगा करना चाहती है ?
सरकार ने ऐसा नहीं कहा है। सरकार की ओर से आम यूजर के लिए UPI को मुफ्त रखने की नीति जारी रहने की बात कही गई है।
कानून में बदलाव को UPI सिस्टम को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने की जरूरत से जोड़कर देखा जा रहा है। UPI नेटवर्क को सुरक्षित रखने, साइबर फ्रॉड से निपटने, तकनीकी ढांचे को अपग्रेड करने और पेमेंट सिस्टम को बेहतर बनाए रखने में लगातार खर्च होता है।
भारत में UPI का नेटवर्क कितना बड़ा है ?
जुलाई 2026 तक देश में 741 बैंक UPI नेटवर्क से जुड़े हुए थे। जुलाई 2026 में करीब 2,366 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल रकम लगभग ₹29.88 लाख करोड़ रही।
वित्त वर्ष 2025-26 में देश के कुल डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी करीब 84 फीसदी रही। छोटे दुकानदारों से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े कारोबारी भुगतान तक, UPI आज भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है।
UPI कैसे काम करता है ?
UPI यानी Unified Payments Interface के जरिए बैंक अकाउंट से सीधे डिजिटल पेमेंट किया जा सकता है। इसके लिए यूजर को अपने बैंक अकाउंट को UPI ऐप से लिंक करना होता है।

इसके बाद पेमेंट करने के लिए बैंक अकाउंट नंबर, बैंक का नाम या IFSC कोड बार-बार डालने की जरूरत नहीं होती। UPI ID, मोबाइल नंबर या QR कोड के जरिए पेमेंट किया जा सकता है। UPI का इस्तेमाल सिर्फ पैसे भेजने और प्राप्त करने के लिए ही नहीं, बल्कि बिजली-पानी के बिल, ऑनलाइन शॉपिंग, दुकानों पर खरीदारी और कई दूसरी सेवाओं के भुगतान के लिए भी किया जाता है।
आम UPI यूजर पर क्या असर पड़ेगा ?
रोजमर्रा के छोटे-मोटे भुगतान करने वाले यूजर्स पर फिलहाल कोई सीधा अतिरिक्त असर नहीं पड़ेगा। ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर शुल्क नहीं लगाया जा सकता।
वहीं, ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट को लेकर आगे आने वाले नियम महत्वपूर्ण होंगे। अभी बड़े UPI पेमेंट पर कोई नई फीस लागू नहीं हुई है। अगर भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो सरकार की ओर से इसकी सीमा, दर और भुगतान की शर्तें स्पष्ट की जाएंगी।
UPI चार्ज को लेकर याद रखें ये बातें
• ₹2,000 UPI की नई ट्रांजैक्शन लिमिट नहीं है।
• ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर फिलहाल कोई चार्ज नहीं लगाया जा सकता।
• ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर अभी कोई नई फीस लागू नहीं हुई है।
• दोस्त या परिवार को पैसे भेजने वाले P2P पेमेंट मुफ्त रहने की बात कही गई है।
• संभावित MDR की चर्चा मुख्य रूप से बड़े मर्चेंट पेमेंट को लेकर है।
• 0.4 फीसदी MDR कोई तय नई UPI दर नहीं है, यह सिर्फ उदाहरण है।
• बड़े मर्चेंट पेमेंट पर भविष्य में क्या व्यवस्था होगी, यह सरकार के अगले नियमों से स्पष्ट होगा।
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