Kaushambi Firecracker Factory Blast : कौशांबी के मंझनपुर क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने 11 जिंदगियां छीन लीं। मृतकों में 8 बच्चे शामिल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस फैक्ट्री का लाइसेंस दो साल पहले निलंबित हो चुका था, वहां दोबारा सैकड़ों किलो पटाखे और बारूद कैसे जमा हो गए? अब पुलिस और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 1 September 2026
IBN24 NEWS NETWORK : कौशांबी के पिपरी थाना क्षेत्र में आने वाला मनौरी गांव करीब 25 हजार की आबादी वाला है। गांव से लगभग एक किलोमीटर बाहर नई बस्ती विकसित हो रही है। यहां 8 से 10 मकान भी बन चुके हैं। इसी इलाके में नौशाद अली ने कई साल पहले पटाखा फैक्ट्री चलाने का लाइसेंस हासिल किया था। 8 अक्टूबर 2024 को हुई जांच के दौरान नौशाद के गोदाम से करीब 12 किलो बारूद और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। इसके अगले ही दिन उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। साथ ही फैक्ट्री का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया था। लेकिन जेल से बाहर आने के बाद कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
जेल से बाहर आया तो फिर शुरू कर दिया बारूद का कारोबार
आरोप है कि जेल से रिहा होने के बाद नौशाद ने दोबारा पटाखों का कारोबार शुरू कर दिया। इस बार परिवार के अन्य सदस्य भी उसके साथ जुड़ गए। इनमें उसका भाई शकील, बेटा आदिल और परिवार की महिलाएं भी शामिल थीं। पटाखों और बारूद का भंडारण आबादी के बीच जारी रहा। देखते ही देखते वहां इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक जमा हो गया कि 31 अगस्त को हुए धमाके ने पूरे इलाके को हिला दिया। विस्फोट इतना भीषण था कि फैक्ट्री पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गई। 100 मीटर के दायरे में मौजूद आठ मकान क्षतिग्रस्त हुए, जबकि तीन मकान पूरी तरह ढह गए।
चार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही निलंबित किया जा चुका था और संचालक पर अवैध विस्फोटक रखने का मुकदमा भी हो चुका था, तो वह दोबारा उसी इलाके में पटाखे और बारूद कैसे जमा करता रहा?
जिम्मेदारी तय करने के दौरान चार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
1. पिपरी थाना प्रभारी विकास सिंह
विस्फोट वाली जगह पिपरी थाना क्षेत्र में आती है। इलाके में अवैध गतिविधियों की निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी थाना पुलिस की थी। सवाल यह है कि आबादी के बीच सैकड़ों किलो विस्फोटक सामग्री और बड़ी मात्रा में पटाखों का भंडारण होता रहा, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक कैसे नहीं लगी?
जिस व्यक्ति को दो साल पहले अवैध विस्फोटक रखने के आरोप में जेल भेजा गया था, उसके दोबारा इसी तरह का कारोबार शुरू करने की जानकारी स्थानीय पुलिस को क्यों नहीं हुई? अब यह भी जांच का विषय होगा कि क्या थाना स्तर पर पहले हुई कार्रवाई की निगरानी की गई थी या नहीं।
2. चायल सीओ शिवांक सिंह
चायल सर्किल के क्षेत्राधिकारी शिवांक सिंह के स्तर पर भी निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सीओ के पास अपने सर्किल के थानों के कामकाज की निगरानी की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में सवाल है कि जिस व्यक्ति पर पहले से विस्फोटक अधिनियम के तहत कार्रवाई हो चुकी थी, वह उसी सर्किल में दोबारा बड़ी मात्रा में विस्फोटक जमा करता रहा और पुलिस की निगरानी व्यवस्था को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
क्या संवेदनशील लाइसेंस धारकों की नियमित निगरानी होती थी? क्या विस्फोटक अधिनियम के पुराने मामलों में आरोपी रहे लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी गई? इन सवालों के जवाब जांच में सामने आने हैं।
3. चायल SDM प्रेरणा गौतम
मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आबादी के बीच पटाखों का कारोबार कैसे चलता रहा? जिस जमीन पर गोदाम और फैक्ट्री संचालित हो रही थी, उसका भूमि उपयोग क्या था? क्या वहां इस तरह की गतिविधि की अनुमति थी?
सबसे अहम सवाल यह है कि जब फैक्ट्री का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था, तो उसके बाद प्रशासन ने मौके की स्थिति की जांच क्यों नहीं की? लाइसेंस निलंबन के बाद यह सुनिश्चित करना जरूरी था कि वहां दोबारा विस्फोटक सामग्री का भंडारण तो नहीं किया जा रहा। अब इन पहलुओं की भी जांच की जाएगी।
4. मुख्य अग्निशमन अधिकारी मंगेश कुमार
पटाखों और विस्फोटक सामग्री से जुड़े कारोबार में अग्नि सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में मुख्य अग्निशमन अधिकारी मंगेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या लाइसेंस निलंबित होने के बाद अग्निशमन विभाग ने मौके का निरीक्षण किया था? क्या यह सत्यापित किया गया कि वहां अवैध रूप से पटाखे या विस्फोटक सामग्री तो नहीं रखी जा रही?
क्या स्थानीय स्तर से कभी इस जगह को लेकर कोई रिपोर्ट या सूचना अग्निशमन विभाग तक पहुंची थी? इन सभी सवालों के जवाब अब जांच का हिस्सा होंगे।
धमाके की भयावहता ने खोल दी बारूद के बड़े भंडारण की पोल
धमाके की तीव्रता से अंदाजा लगाया जा सकता है कि घटनास्थल पर कितना बड़ा खतरा जमा था। विस्फोट की आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। धमाके के बाद मलबा और विस्फोट के अवशेष करीब 500 मीटर तक बिखरे मिले। फैक्ट्री के सामान के साथ ईंटें, लोहे की सरिया और आसपास के मकानों का मलबा भी दूर-दूर तक जा गिरा।
200 मीटर दूर तीन मंजिला मकान की दीवारें तक उखड़ गईं

धमाके की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि घटनास्थल से करीब 200 मीटर दूर स्थित तीन मंजिला मकान की पहली और दूसरी मंजिल की एक तरफ की दीवारें तक उड़ गईं। हादसे में क्षतिग्रस्त एक मकान का RCC पिलर भी करीब 500 मीटर दूर जा गिरा। आसपास के पांच मकानों के पिछले हिस्से पूरी तरह ढह गए।
33 हजार वोल्ट की बिजली लाइन का टावर भी क्षतिग्रस्त

विस्फोट का असर करीब 200 मीटर दूर मौजूद 33 हजार वोल्ट की बिजली लाइन के टावर तक पहुंचा। टावर भी क्षतिग्रस्त हो गया और बिजली की लाइन को भी नुकसान पहुंचा। बिजली विभाग की टीमें देर शाम तक क्षतिग्रस्त लाइन को ठीक करने में जुटी रहीं।
9 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती मलबे में दबे लोगों को तलाशना थी। दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन रात 9 बजे तक चलता रहा। फायर ब्रिगेड और NDRF की टीमों ने लगातार मलबा हटाकर लोगों की तलाश की। मौके पर 10 JCB मशीनें, 11 दमकल गाड़ियां और 14 एंबुलेंस लगाई गईं।
पड़ोसी ने कहा- परिवार को लेकर भागा, इसलिए बच गई जान
फैक्ट्री से करीब 50 मीटर दूर रहने वाले शिवम गुप्ता ने बताया कि धमाके के वक्त वह नहा रहे थे। अचानक बिजली चली गई। उन्हें लगा कि शायद बिजली में कोई खराबी हुई है। इसके बाद लगातार धमाके होने लगे। पीछे की तरफ उनका मकान भी ढह गया, लेकिन उन्हें तुरंत इसका पता नहीं चला।
शिवम के मुताबिक जैसे ही उन्हें स्थिति का अंदाजा हुआ, वह अपनी दो भतीजियों, भाभी और बहन को लेकर घर से बाहर भाग गए। इससे उनकी जान बच गई। उन्होंने बताया कि पिछले छह-सात महीनों से इस जगह पर पटाखे बनाए जा रहे थे। इससे पहले सामने वाली फैक्ट्री में पटाखे बनाए जाते थे। उसके सील होने के बाद यहां निर्माण शुरू कर दिया गया।
पास में बूंदी बनाने की फैक्ट्री भी चल रही थी
स्थानीय बुजुर्ग मुनीश कुमार पांडेय ने बताया कि यहां पटाखे बनाए जाते थे और बगल में गोदाम भी था। इस लाइन में मौजूद कई मकान धमाके में ढह गए। अजय सिंह ने बताया कि उन्हें सूचना मिली कि जिस जगह उनका भाई काम करता था, वहां विस्फोट हो गया है। जब वह मौके पर पहुंचे तो पता चला कि उनके भाई ज्ञान सिंह की मौत हो चुकी थी।
बताया गया कि पास में बूंदी बनाने का काम भी चल रहा था और ज्ञान सिंह वहीं काम कर रहे थे।
महिला ने कहा- पूरी बस्ती और बच्चों को तबाह कर दिया
प्रयागराज के स्वरूप रानी अस्पताल पहुंची रानी ने बताया कि बिजली का पोल गिरने के बाद अचानक जोरदार धमाका हुआ। उनके मुताबिक फैक्ट्री में पटाखे या बम बनाने के लिए विस्फोटक सामग्री रखी गई थी। उन्होंने कहा कि धमाके ने पूरी बस्ती को तबाह कर दिया और कई बच्चों की जान चली गई।
11 मौतें, इनमें 8 बच्चे

इस हादसे में कुल 11 लोगों की मौत हुई, जिनमें आठ बच्चे शामिल हैं। मृतकों में मंजीत कुमार के बच्चे प्रियंजलि और प्रवीण सिंह शामिल हैं। वहीं गया प्रसाद के तीन बच्चों जाह्नवी, आदित्य और रवि की भी मौत हो गई। गया प्रसाद की पत्नी अनीता, उम्र करीब 38 वर्ष, हादसे में घायल हुईं। अनीता ने फैक्ट्री मालिक के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। उनका कहना है कि हादसे में उनका पूरा परिवार उजड़ गया।
रेलवे कर्मचारी विक्रम भी हादसे में परिवार समेत मारे गए। वह घर खाना खाने आए थे। विस्फोट में उनकी पत्नी अंजू, बेटी अंशु और बेटे नन्हा की मौत हो गई। उनकी बड़ी बेटी संजना सामान लेने किराने की दुकान पर गई थी, इसलिए उसकी जान बच गई।
छह लोगों के खिलाफ FIR, गिरफ्तारी के लिए चार टीमें
कौशांबी के पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण प्रजापति के मुताबिक मामले में छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार पुलिस टीमें गठित की गई हैं। पुलिस के अनुसार फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित की जा रही थी और उसका लाइसेंस दो साल पहले ही रद्द/निलंबित किया जा चुका था।
कमिश्नर एम. लोकेश ने कहा कि शुरुआती प्राथमिकता राहत और बचाव अभियान थी। अब इस बात की जांच की जाएगी कि आवासीय क्षेत्र में पटाखा फैक्ट्री कैसे संचालित होती रही। वहीं डीएम अमित पाल शर्मा ने कहा है कि जांच में जो भी लापरवाही का जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल: लाइसेंस रद्द था तो बारूद का कारोबार दोबारा कैसे शुरू हुआ?
कौशांबी का यह हादसा सिर्फ एक फैक्ट्री में हुए विस्फोट की कहानी नहीं है। यह निगरानी और जवाबदेही की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। जिस फैक्ट्री का लाइसेंस दो साल पहले निलंबित हो चुका था, जिसके संचालक को अवैध विस्फोटक रखने के आरोप में जेल जाना पड़ा था, उसी जगह दोबारा बड़ी मात्रा में पटाखे और बारूद जमा होते रहे।
अगर यह कारोबार महीनों से चल रहा था, तो पुलिस, प्रशासन और अग्निशमन विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है—11 लोगों की मौत के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है और उस सिस्टम ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की, जो इस हादसे को रोक सकता था?
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