FSSAI Cracks Down on Energy Drink Labels : अगर आप थकान दूर करने या तुरंत एनर्जी पाने के लिए रेड बुल, स्टिंग, मोंस्टर या अन्य तथाकथित एनर्जी ड्रिंक का सेवन करते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इन कंपनियों को अपने उत्पादों से ‘Energy Drink’ शब्द और इससे जुड़े सभी दावों को हटाने का निर्देश दिया है। नियामक का कहना है कि इन पेय पदार्थों को पीने से तुरंत ऊर्जा मिलने या शरीर और दिमाग को तुरंत तरोताजा करने जैसे दावों का कोई निर्धारित वैज्ञानिक या नियामकीय आधार नहीं है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 28 July 2026
IBN24 News Network : FSSAI के अनुसार, भारत में फिलहाल ‘Energy Drink’ नाम से कोई अलग खाद्य श्रेणी या मानक तय नहीं है। ऐसे में कंपनियां इस शब्द का इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं को भ्रमित नहीं कर सकतीं। इसी वजह से स्टिंग, रेड बुल, मोंस्टर, कैम्पा एनर्जी और हेल एनर्जी जैसी कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबल और प्रचार सामग्री से यह शब्द हटाने का आदेश दिया गया है।
90 दिनों में बदलनी होगी पैकेजिंग
FSSAI ने सभी कंपनियों को 90 दिनों के भीतर अपने उत्पादों की पैकेजिंग और लेबल में बदलाव करने की समय-सीमा दी है। इसके बाद केवल नए नियमों के अनुरूप लेबल वाले उत्पाद ही बाजार में बेचे जा सकेंगे। हाल ही में हुई बैठक में FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रजीत पुन्हानी ने कंपनियों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी कंपनी को इस फैसले पर आपत्ति है तो वह कानूनी विकल्प अपना सकती है।

कंपनियों को ब्रांड इमेज पर असर का डर
इस फैसले से पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों की चिंता बढ़ गई है। स्टिंग अपने विज्ञापनों में शरीर में बिजली जैसी ऊर्जा आने का दावा करता है, जबकि रेड बुल का प्रसिद्ध स्लोगन “Gives You Wings” वर्षों से उसकी पहचान बना हुआ है। कंपनियों का कहना है कि ‘एनर्जी ड्रिंक’ श्रेणी हटने से उनकी ब्रांड इमेज और बिक्री दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

इंडियन बेवरेज एसोसिएशन ने भी FSSAI से इस फैसले को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि अचानक नियम बदलने से उद्योग और उपभोक्ताओं दोनों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
राजस्थान में कार्रवाई, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को भी निर्देश
FSSAI के निर्देशों के बाद राजस्थान में स्टिंग, रेड बुल और कैम्पा एनर्जी की हजारों बोतलें जब्त की गई हैं। साथ ही अमेजन, फ्लिपकार्ट, ब्लिंकिट और स्विगी इंस्टामार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को भी इन उत्पादों को ‘Energy Drink’ के रूप में प्रमोट नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार इन पेय पदार्थों में कैफीन, शुगर और टॉरिन की मात्रा सामान्य पेय पदार्थों की तुलना में अधिक हो सकती है। अधिक मात्रा में इनका सेवन करने से ब्लड शुगर बढ़ना, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना, हृदय पर दबाव, फैटी लिवर, किडनी पर असर और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण दुनियाभर के कई नियामक संस्थान ऐसे उत्पादों के प्रचार और बिक्री को लेकर सख्त नियम बना रहे हैं।
दुनिया के कई देशों में पहले से सख्त नियम

इंग्लैंड में अगले वर्ष अप्रैल से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए हाई-कैफीन ड्रिंक्स की बिक्री पर प्रतिबंध लागू होने जा रहा है। वहीं पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों में ऐसे पेय पदार्थों पर ‘Stimulant Drink’ लिखना अनिवार्य किया गया है। भारत में भी FSSAI का यह फैसला इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
आगे क्या होगा ?
FSSAI और कंपनियों के बीच हुई चर्चा के बाद उद्योग ने नियमों का पालन करने पर सहमति जताई है। अब कंपनियों को अगले 90 दिनों के भीतर अपने उत्पादों की पैकेजिंग, बोतलों और प्रचार सामग्री से ‘Energy Drink’ शब्द और उससे जुड़े दावों को हटाना होगा। इसके बाद बाजार में केवल संशोधित लेबल वाले उत्पाद ही बेचे जा सकेंगे।
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