Mirabai Chanu Wins India’s First Gold : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाया। उन्होंने महिलाओं की 48 किलोग्राम भारवर्ग में कुल 190 किलोग्राम (85kg स्नैच + 105kg क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

Written by Kajal Panchal • Published on : 27 July 2026
IBN24 News Network : इस जीत के साथ मीराबाई चानू ने इतिहास रचते हुए लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल जीता। इससे पहले वह गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वहीं, ग्लासगो 2014 में उन्होंने रजत पदक हासिल किया था।
रिकॉर्ड के साथ जीता गोल्ड

मीराबाई चानू की शुरुआत थोड़ी धीमी रही। स्नैच के पहले प्रयास में वह 82 किलोग्राम वजन उठाने में असफल रहीं, लेकिन दूसरे प्रयास में 82 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 85 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बना दिया। क्लीन एंड जर्क के पहले प्रयास में भी उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन दूसरे प्रयास में 105 किलोग्राम वजन उठाकर उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
भारत के खाते में अब 4 पदक

मीराबाई के गोल्ड के साथ भारत के खाते में अब कुल 4 पदक हो गए हैं।
- 🥇 1 गोल्ड
- 🥈 2 सिल्वर
- 🥉 1 ब्रॉन्ज
भारत फिलहाल मेडल तालिका में आठवें स्थान पर है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 17 गोल्ड और कुल 39 पदकों के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है।
ऋषिकांत सिंह ने जीता सिल्वर मेडल

पुरुषों की 60 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में ऋषिकांत सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 264 किलोग्राम (121kg स्नैच + 143kg क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर रजत पदक जीता। यह उनका दूसरा कॉमनवेल्थ गेम्स है। इससे पहले वह बर्मिंघम 2022 में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ऋषिकांत मौजूदा कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप के भी चैंपियन हैं।
मणिपुर से शुरू हुआ सफर
ऋषिकांत ने वर्ष 2009 में मणिपुर स्पोर्ट्स अकादमी से वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की थी। बाद में उनका चयन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) में हुआ। इसके बाद वह भारतीय नौसेना और फिर भारतीय सेना के स्पोर्ट्स सेटअप का हिस्सा बने।
राजा मुथुपांडी ने चोट के बाद की दमदार वापसी

पुरुषों की 65 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में राजा मुथुपांडी ने कुल 286 किलोग्राम (126kg स्नैच + 160kg क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर रजत पदक जीता। इस वर्ग में मलेशिया के अजनील बिन बिदिन मोहम्मद ने 299 किलोग्राम वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता और लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ चैंपियन बने।
राजा मुथुपांडी को वर्ष 2019 में कोहनी के लिगामेंट में गंभीर चोट लगी थी। कोविड-19 महामारी के कारण उनकी वापसी में और देरी हुई। 65 किलोग्राम भारवर्ग शुरू होने के बाद उन्होंने भारतीय टीम में वापसी की और अब ग्लासगो में सिल्वर जीतकर अपने संघर्ष को सफलता में बदल दिया।
भारत को मिले केवल 11 कोटा
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को वेटलिफ्टिंग के लिए 11 कोटा मिले हैं। डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन के कारण यह संख्या पहले के 16 कोटा से घटाकर 11 कर दी गई। वहीं पीठ की चोट के कारण दिलबाग सिंह भारतीय टीम का हिस्सा नहीं बन सके।
बर्मिंघम 2022 में भारत ने जीते थे 10 पदक
बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत के 15 वेटलिफ्टरों ने हिस्सा लिया था। भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक जीते थे, जिनमें:
- 3 गोल्ड
- 3 सिल्वर
- 4 ब्रॉन्ज
शामिल थे।
वेटलिफ्टिंग में विजेता कैसे तय होता है?
वेटलिफ्टिंग में दो प्रकार की प्रतियोगिताएं होती हैं।

1. स्नैच (Snatch)
इसमें खिलाड़ी एक ही मूवमेंट में बारबेल को जमीन से उठाकर सीधे सिर के ऊपर ले जाता है। इसमें गति, संतुलन, ताकत और लचीलापन सबसे अहम होता है।
2. क्लीन एंड जर्क (Clean & Jerk)
यह दो चरणों में पूरा होता है।
क्लीन: बारबेल को जमीन से कंधों तक लाया जाता है।
जर्क: इसके बाद खिलाड़ी बारबेल को सिर के ऊपर पूरी तरह सीधा उठाता है।
दोनों स्पर्धाओं में खिलाड़ियों को तीन-तीन प्रयास मिलते हैं। स्नैच और क्लीन एंड जर्क के सर्वश्रेष्ठ सफल प्रयासों का कुल योग (टोटल) निकाला जाता है। सबसे अधिक कुल वजन उठाने वाला खिलाड़ी विजेता घोषित होता है।
उदाहरण: यदि किसी खिलाड़ी ने स्नैच में 120kg और क्लीन एंड जर्क में 151kg वजन उठाया, तो उसका कुल वजन 271kg माना जाएगा।
1934 में पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में उतरा था भारत

भारत ने 1934 में पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया था। देश को पहला गोल्ड मेडल 1958 में मिला। इसके बाद से भारतीय खिलाड़ियों ने वेटलिफ्टिंग समेत कई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई चानू ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह भारत की सबसे सफल वेटलिफ्टर्स में से एक हैं। उनके ऐतिहासिक गोल्ड मेडल के साथ भारत ने शानदार शुरुआत की है। वहीं ऋषिकांत सिंह और राजा मुथुपांडी के सिल्वर मेडल ने भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम की मजबूती को भी साबित किया। अब देश को आने वाले मुकाबलों में खिलाड़ियों से और अधिक पदकों की उम्मीद रहेगी।
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