22 Crore Overbridge Cracks After First Rain : छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बने दो नए रेलवे ओवरब्रिज पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए। सबसे गंभीर मामला बरगा रेलवे ओवरब्रिज का है, जहां उद्घाटन के महज 15 दिन बाद पुल की सड़क बीच से फट गई और करीब 60 से 70 फीट लंबी तथा 10 से 12 सेंटीमीटर चौड़ी दरार पड़ गई। इस घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 7 July 2026
IBN24 News Network : दूसरी ओर आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज पर भी सड़क बहने, बाउंड्री क्षतिग्रस्त होने और कई जगह बेस धंसने की घटनाएं सामने आई हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बैरिकेडिंग कर दी है।
22 करोड़ की लागत से बने थे दोनों ओवरब्रिज
राजनांदगांव और डोंगरगढ़ के बीच बरगा और आलीवारा रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण लगभग 20 से 22 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। दोनों पुलों को जून 2026 में आम लोगों के लिए खोला गया था, लेकिन पहली ही भारी बारिश के बाद दोनों की स्थिति खराब हो गई।
बरगा ओवरब्रिज पर सड़क बीच से दो हिस्सों में बंट गई, जबकि आलीवारा ओवरब्रिज पर सड़क का हिस्सा बह गया और कई स्थानों पर पुल का बेस धंस गया।
ग्रामीणों ने जताया हादसे का डर
दरारें सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीण और वाहन चालक पुल पर एकत्र हो गए और निर्माण कार्य में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि पुल की हालत देखकर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद काफी देर तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुल निर्माण में घटिया गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि सड़क की गिट्टी और डामर हाथ से ही उखड़ रहे हैं, जबकि सीमेंट भी मजबूत होने के बजाय टुकड़ों जैसा दिखाई दे रहा है।

स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों एवं ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
रेलवे अधिकारियों ने क्या कहा ?
गोंदिया रेलवे के असिस्टेंट इंजीनियर मिथिलेश कुमार ने कहा कि शुरुआती बारिश के दौरान कुछ स्थानों पर मिट्टी बैठने (Settlement) की वजह से यह स्थिति बनी है। उनके अनुसार टेक्निकल टीम और डिजाइन विशेषज्ञ मौके का निरीक्षण करेंगे तथा आवश्यक मरम्मत की जाएगी।
उन्होंने कहा कि फिलहाल यह सामान्य तकनीकी समस्या प्रतीत होती है और निरीक्षण के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

निर्माण कंपनी ने दी सफाई
निर्माण कार्य करने वाली घई कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर राजेंद्र सिंह घई ने कहा कि पुल के गिरने का कोई खतरा नहीं है। उनके अनुसार बारिश के कारण दोनों ओर की मिट्टी बैठने से दबाव बना, जिससे सड़क की ऊपरी परत प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि बारिश समाप्त होने के बाद ऊपरी परत हटाकर दोबारा मरम्मत की जाएगी।
नागपुर मंडल रेलवे ने मांगी रिपोर्ट
नागपुर मंडल के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) फैज खान ने बताया कि उन्हें मीडिया के माध्यम से घटना की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को मामले से अवगत कराया जा रहा है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कोरबा में भी पहली बारिश में टूटा 3 करोड़ का पुल
राजनांदगांव के अलावा कोरबा जिले में भी पहली बारिश ने निर्माण कार्यों की पोल खोल दी। करतला विकासखंड के ग्राम भैसामुड़ा स्थित जोगीनाला पर लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से बनी पुलिया तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गई।

पुलिया का एक हिस्सा बह जाने से सड़क पर बड़े गड्ढे बन गए और आवागमन बाधित हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान अनियमितताओं की शिकायतें पहले भी की गई थीं, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
निर्माण एजेंसी की जानकारी भी नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर किसी प्रकार का सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है। ऐसे में यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि पुलिया का निर्माण किस विभाग, एजेंसी या ठेकेदार ने कराया। ग्रामीणों ने इसे पारदर्शिता की कमी बताते हुए मामले की जांच की मांग की है।
ग्राम पंचायत के सरपंच आनंद बिंझवार के अनुसार करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से बनी यह पुलिया अभी एक वर्ष भी पूरी नहीं कर सकी थी और पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई।
निर्माण गुणवत्ता पर उठे बड़े सवाल
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर अधिकारी इसे सामान्य तकनीकी समस्या बता रहे हैं, वहीं स्थानीय लोग इसे लापरवाही और घटिया निर्माण का परिणाम मान रहे हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।
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