Ram Mandir Gets First CEO : अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर प्रशासन में बड़ा बदलाव किया गया है। पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त किया गया है। ट्रस्ट ने बुधवार को उनके नाम का ऐलान किया।

Written by Kajal Panchal • Published on : 2 September 2026
IBN24 NEWS NETWORK : जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना में करीब 39 साल तक सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया था। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले मिश्रा के पास प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर काम करने का लंबा अनुभव है।
राम मंदिर ट्रस्ट में 3 नए सदस्य भी शामिल
CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इनमें दिल्ली के कारोबारी महेश भागचंदका, अयोध्या के एडवोकेट मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं।
निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी होंगी। इन नियुक्तियों के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है।
एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा का कैसा रहा करियर ?
जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में कमीशन हासिल किया था। वह फाइटर पायलट रहे हैं और उनके पास करीब 3,000 घंटे की उड़ान का अनुभव है। उन्होंने पश्चिमी वायु कमान में एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद पर भी काम किया।

इसके अलावा वह एयर स्टाफ टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट में AOC जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे हैं। उनकी विशेषज्ञता में फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट शामिल हैं। उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से भी सम्मानित किया जा चुका है।
ऑपरेशन सिंदूर में भी निभाई अहम भूमिका

जीतेंद्र मिश्रा का नाम ऑपरेशन सिंदूर से भी जुड़ा रहा है। उन्होंने इस दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया था। वायुसेना में लंबे अनुभव और रणनीतिक नेतृत्व की पृष्ठभूमि को देखते हुए उनकी नियुक्ति को राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एडवोकेट मदन मोहन पांडेय भी बने ट्रस्टी
अयोध्या के एडवोकेट मदन मोहन पांडेय को भी ट्रस्ट में शामिल किया गया है। वह राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े मामले में रामलला की ओर से कानूनी पैरवी करने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं।
उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि से जुड़े मामले में कानूनी पक्ष रखने में भूमिका निभाई थी। जनवरी 2024 में एक इंटरव्यू में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का फैसला अपने 51 साल के कानूनी करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया था।
महेश भागचंदका कौन हैं ?
महेश भागचंदका दिल्ली के कारोबारी हैं और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं। 2020 में राम मंदिर के भूमि पूजन के धार्मिक अनुष्ठानों में वह मुख्य यजमान रहे थे। इसके बाद 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान भी उन्होंने यजमान की भूमिका निभाई थी।

महेश भागचंदका अशोक सिंघल फाउंडेशन से भी जुड़े हैं। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें ‘अशोक सिंघल : हिंदुत्व के पुरोधा’, ‘बोलती अनुभूतियां’ और ‘श्री राम मंदिर काव्य यात्रा’ प्रमुख हैं।
निर्मला यादव बनीं पहली महिला ट्रस्टी
शिकोहाबाद की निर्मला यादव को ट्रस्ट में शामिल किया गया है। वह राम मंदिर ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी होंगी। उनकी नियुक्ति को ट्रस्ट के मौजूदा ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
चढ़ावे की चोरी के मामले के बाद बढ़ी सख्ती
ट्रस्ट में यह बदलाव मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के करीब तीन महीने बाद हुआ है। इस मामले में 8 आरोपी जेल में हैं। इसके बाद 2 जुलाई को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद रिटायर्ड IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी।
अब पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की CEO के तौर पर नियुक्ति से मंदिर प्रशासन में नई व्यवस्था की शुरुआत हुई है।
चढ़ावे की निगरानी के लिए बढ़ाई गई सख्ती
चढ़ावे से जुड़ी पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए मंदिर प्रशासन ने कई नए नियम लागू किए हैं। अब एक बार में सिर्फ एक हुंडी खोली जाती है। हुंडी खोलने से लेकर दान की गिनती तक पूरी प्रक्रिया की 360 डिग्री और DSLR कैमरों से वीडियोग्राफी की जाती है।

दान की गिनती में शामिल कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली डार्क ब्लू वर्दी अनिवार्य की गई है। कर्मचारियों को मोबाइल, बैग और कैमरा अंदर ले जाने की अनुमति नहीं है। दान की गिनती के दौरान कर्मचारियों को जमीन पर बैठकर काम करना होता है, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
कर्मचारियों की कई स्तर पर होती है तलाशी
दान की गिनती वाले हॉल में प्रवेश से पहले कर्मचारियों की 2 से 3 स्तर की तलाशी की जाती है। ड्यूटी पूरी होने तक कर्मचारियों को परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं होती।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए अतिरिक्त जवानों की तैनाती भी की गई है। मंदिर प्रशासन भविष्य में AI और सेंसर आधारित कैमरे लगाने पर भी विचार कर रहा है, ताकि निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।
अब राम मंदिर प्रशासन में क्या बदलेगा ?
पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की CEO के रूप में नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या, चढ़ावे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संभालने की जिम्मेदारी लगातार बढ़ रही है।
ऐसे में सैन्य नेतृत्व और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारी को CEO की जिम्मेदारी सौंपे जाने से मंदिर प्रशासन में सुरक्षा, निगरानी और प्रबंधन को और मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है।
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