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Supreme Court Cancels Jantar Mantar Protest FIRs : सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी सभी FIR रद्द कीं, नई FIR भी नहीं होगी, क्या 5 सितंबर का मार्च लिया वापस, जानिए क्या हुआ फैसला ?

Supreme Court Cancels Jantar Mantar Protest FIRs : सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने इस अवधि के दौरान दर्ज सभी FIR को रद्द करने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस मामले से संबंधित नई FIR भी दर्ज नहीं की जाएगी।

Supreme Court Cancels Jantar Mantar Protest FIRs

Written by Kajal Panchal • Published on : 1 September 2026

IBN24 NEWS NETWORK : हालांकि, जिन प्रदर्शनकारियों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है, उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज संबंधित मामलों पर लागू होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च वापस लेने का फैसला किया है। संगठन के मुताबिक, केंद्र सरकार के आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मार्च वापस लिया गया है।

अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट ने इस्तेमाल की विशेष शक्ति

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि FIR रद्द करने का फैसला इस मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। इसे दूसरे मामलों के लिए मिसाल या बाध्यकारी फैसला नहीं माना जाएगा।

कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह राहत दोनों पक्षों के बीच कोर्ट के सामने हुए समझौते की शर्तों के पालन पर आधारित है। अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक आदेश देने की विशेष शक्ति देता है।

सरकार ने दाखिल किया था अंतरिम आवेदन

Supreme Court Cancels Jantar Mantar Protest FIRs

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल अंतरिम आवेदन पर आया। अंतरिम आवेदन उस स्थिति में दाखिल किया जाता है, जब किसी मामले की सुनवाई के दौरान किसी विशेष मुद्दे पर तत्काल राहत या आदेश की मांग की जाती है।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि 25 जुलाई के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस प्रदर्शन से जुड़े 13 FIR को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। यानी पुलिस इन मामलों में आगे की कार्रवाई जारी रखने के बजाय उन्हें खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 5 सितंबर का मार्च वापस

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च वापस लेने का ऐलान किया। संगठन का कहना है कि सरकार के साथ बातचीत और अदालत के फैसले के बाद प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं रह गई है।

Supreme Court Cancels Jantar Mantar Protest FIRs

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अगस्त की शुरुआत में सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने संगठन से बातचीत बंद कर दी थी। इसके बाद संगठन को लगा कि उसके साथ विश्वासघात किया जा सकता है और इसी वजह से 5 सितंबर को मार्च निकालने का फैसला लिया गया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि पूरे देश में प्रदर्शन से जुड़े FIR रद्द किए गए हैं।

अभिजीत दीपके बोले- छात्रों की जीत

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अभिजीत दीपके ने इसे छात्रों की जीत बताया। CJP की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ चल रहे मुकदमों को खत्म कर दिया है। संगठन ने कहा कि उसकी मांगों को सुना गया है और आगे किसी छात्र को इस तरह की कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।

20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों में हुई थी झड़प

20 जुलाई को CJP के नेतृत्व में दिल्ली में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। इसके बाद छात्रों का आंदोलन देश के कई शहरों तक फैल गया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी शामिल था।

20 जून से शुरू हुआ था आंदोलन

CJP का आंदोलन 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। संगठन की ओर से सरकार के सामने कई मांगें रखी गई थीं। आंदोलन के दौरान दिल्ली समेत कई स्थानों पर प्रदर्शन किए गए। बाद में सरकार की ओर से संगठन की कुछ मांगों को स्वीकार किए जाने और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त कर दिया गया था।

अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदर्शन से जुड़े FIR रद्द किए जाने और 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस लिए जाने से इस पूरे विवाद में एक नया मोड़ आ गया है।

क्या है अनुच्छेद 142 ?

संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में “पूर्ण न्याय” करने के लिए जरूरी आदेश और निर्देश जारी करने की विशेष शक्ति देता है। अदालत इसका इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में करती है, ताकि लंबित विवाद का प्रभावी समाधान किया जा सके।

इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी विशेष संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शन से जुड़े FIR को रद्द करने का आदेश दिया है।

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