Nepal Floods : नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ के बाद तबाही का सिलसिला जारी है। अब तक 289 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 1,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें लगातार सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 27 August 2026
IBN24 NEWS NETWORK : भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें 73 लोग त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम करते हैं। वहीं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से 21 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया है, जिनमें से 11 की पहचान हो चुकी है।
ल्हेंदे नदी में कैसे बनी झील ?
बुधवार सुबह नेपाल-चीन सीमा के पास पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिर गया। भारी मात्रा में मलबा नदी में आने से पानी का बहाव रुक गया। नदी का रास्ता बंद होने के बाद पानी पीछे की तरफ जमा होने लगा और देखते ही देखते वहां एक अस्थायी झील बन गई। पानी का स्तर लगातार बढ़ने से दबाव भी बढ़ता गया।

आखिरकार पानी के दबाव से मलबे की रुकावट टूट गई। इसके बाद बड़ी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान और कीचड़ तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहा, जिससे आसपास के इलाकों में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई।
5.2 तीव्रता के झटके से मचा था भ्रम
बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआत में इसे भूकंप माना गया था और शुरुआती रिपोर्टों में इसकी तीव्रता 4.4 बताई गई।

बाद के विश्लेषण में सामने आया कि पहाड़ से बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के अचानक टूटकर गिरने से यह झटका पैदा हुआ था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS ने इसे करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके के रूप में दर्ज किया।
लैंडस्लाइड से बाढ़ तक ऐसे हुई पूरी घटना
स्टेप 1: ग्लेशियर और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटा और नदी में गिर गया।
स्टेप 2: भारी मलबे ने ल्हेंदे खोला नदी का रास्ता रोक दिया।
स्टेप 3: नदी का पानी पीछे जमा होने लगा और अस्थायी झील बन गई।
स्टेप 4: पानी का दबाव बढ़ने से मलबे की प्राकृतिक रुकावट टूट गई।
स्टेप 5: पानी, चट्टान, बर्फ और कीचड़ का तेज बहाव नीचे की ओर आया और भोटेकोशी नदी क्षेत्र में तबाही मचा दी।
21 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया
नेपाल में चलाए जा रहे राहत और बचाव अभियान के दौरान 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें से 11 लोगों की पहचान हो चुकी है।
भारत सरकार लगातार नेपाल के अधिकारियों और भारतीय दूतावास के माध्यम से प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटा रही है। तिब्बत क्षेत्र में मौजूद करीब 200 भारतीयों ने भी सहायता और निकासी के लिए संपर्क किया है।
288 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं
विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें 73 लोग त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट से जुड़े हुए हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र कैलाश मानसरोवर यात्रा के रास्ते में भी आता है। ऐसे में बड़ी संख्या में भारतीय यात्रियों और कामगारों के प्रभावित होने की चिंता बनी हुई है।
पुल और सड़कें भी बाढ़ की चपेट में
तेज पानी और मलबे के बहाव ने कई इलाकों में सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचाया है। कई जगह सड़क संपर्क टूटने से राहत और बचाव टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।

नदी किनारे बसे कई इलाकों में घरों, वाहनों, दुकानों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की खबर है।
सेना और पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी
नेपाल में सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें लगातार लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में हेलिकॉप्टरों की मदद से फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लापता लोगों को खोजने, प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने की है।
आगे भी भूस्खलन और बाढ़ का खतरा
आपदा के बाद पहाड़ी इलाकों में दोबारा भूस्खलन और अचानक बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है। नदी के रास्ते में जमा मलबे और ऊपरी क्षेत्रों में बने जलभराव पर भी नजर रखी जा रही है।
मृतकों और लापता लोगों की संख्या राहत एवं बचाव अभियान के साथ बदल सकती है। अधिकारियों की ओर से जारी होने वाले नए आंकड़ों के आधार पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
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