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High Court On Forced Marriage : परिवार के दबाव में शादी या अपनी पसंद ? हाईकोर्ट ने किसके अधिकार को माना सही, जानिए हाईकोर्ट ने क्या कहा ?

High Court On Forced Marriage : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी बालिग व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यह तय करना कि कोई व्यक्ति कब शादी करेगा, किससे करेगा या करेगा भी या नहीं, उसका व्यक्तिगत और संवैधानिक अधिकार है।

High Court On Forced Marriage

Written by Kajal Panchal • Published on : 16 June 2026

IBN24 News Network : यह टिप्पणी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने एक एमबीए पास युवती की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। युवती ने अदालत को बताया कि वह नौकरी और उच्च शिक्षा के लिए स्वतंत्र रूप से रह रही है, लेकिन उसके परिवार वाले लगातार अपनी पसंद के युवक से विवाह करने का दबाव बना रहे हैं।

शादी से इनकार पर मारपीट और धमकियों का आरोप

याचिका में युवती ने आरोप लगाया कि जब उसने परिवार द्वारा तय किए गए रिश्ते से शादी करने से मना किया तो उसके साथ मारपीट की गई और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। युवती के अनुसार करीब दो महीने पहले उसे बहाने से घर बुलाया गया, जहां परिवार के सदस्यों ने उस पर विवाह के लिए सहमति देने का दबाव बनाया।

High Court On Forced Marriage

उसने अदालत को बताया कि विरोध करने पर उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने अपनी इच्छा के विरुद्ध शादी करने से साफ इनकार कर दिया।

सुरक्षा के लिए पुलिस से भी लगाई थी गुहार

परिवार से मिल रही लगातार धमकियों के चलते युवती ने 10 जून को मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को लिखित शिकायत देकर सुरक्षा की मांग की थी। हालांकि, उसका आरोप है कि शिकायत के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

इसके बाद युवती ने अपनी जान, सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।

अनुच्छेद-21 के तहत मिला है यह अधिकार

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रत्येक नागरिक को जीवन, गरिमा, निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने की आजादी भी इसी अधिकार का हिस्सा है।

High Court On Forced Marriage

अदालत ने कहा कि विवाह किसी व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय होता है और इसमें किसी भी प्रकार का दबाव, जबरदस्ती या बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता।

राज्य की जिम्मेदारी नागरिकों की सुरक्षा

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के खिलाफ विवाह के लिए मजबूर किया जा रहा है या उसे धमकियां मिल रही हैं, तो राज्य की जिम्मेदारी है कि वह उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करे।

अदालत ने मोहाली के एसएसपी को युवती की शिकायत पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि यदि जांच में किसी प्रकार का खतरा सामने आता है तो युवती को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए और कानून के अनुसार उचित कदम उठाए जाएं।

सवाल आपके लिए:

क्या बालिग बच्चों के विवाह संबंधी फैसलों में परिवार की भूमिका सलाह तक सीमित होनी चाहिए या अंतिम निर्णय परिवार का होना चाहिए?

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