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Sikh Gurus’ History to Class 8 Syllabus : अब 8वीं के बच्चे पढ़ेंगे सिख गुरुओं का इतिहास, हरियाणा सरकार ने सिलेबस में किया बड़ा बदलाव, जानिए पाठ्यक्रम में क्या-क्या पढ़ाया जाएगा ?

Sikh Gurus’ History to Class 8 Syllabus : हरियाणा सरकार ने राज्य के स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली इतिहास की पुस्तकों में बड़ा बदलाव करते हुए आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं के जीवन, उनके योगदान और शिक्षाओं को शामिल करने का फैसला लागू कर दिया है।

Sikh Gurus’ History to Class 8 Syllabus

Written by Kajal Panchal • Published on : 11 June 2026

IBN24 News Network : इसके तहत छात्रों को गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी तक सभी सिख गुरुओं के जीवन, उनके आदर्शों और समाज के प्रति योगदान के बारे में पढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही वीर योद्धा बाबा बंदा सिंह बहादुर के त्याग, बलिदान और राष्ट्र निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान को भी इतिहास के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।

शहीदी समागम में की गई थी घोषणा

Sikh Gurus’ History to Class 8 Syllabus

मानवता, समानता और सेवा का संदेश

सरकार का मानना है कि सिख गुरुओं के जीवन से विद्यार्थियों को मानवता, समानता, सेवा, करुणा, भाईचारे और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों की सीख मिलेगी।

गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी तक सभी गुरुओं ने समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने और मानव कल्याण के लिए कार्य करने का संदेश दिया। उन्होंने जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर होने वाले भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को एकजुट करने की प्रेरणा दी।

पंजाब चुनाव से जोड़कर भी देखे जा रहे हैं राजनीतिक मायने

हरियाणा सरकार के इस फैसले को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। इस वर्ष के अंत या अगले वर्ष की शुरुआत में पंजाब विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिख इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय पंजाब की राजनीति से भी जुड़ा हो सकता है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पिछले कुछ समय से पंजाब में लगातार जनसभाएं और रैलियां कर रहे हैं, जिससे इस फैसले को चुनावी रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

यमुनानगर में बन रहा बाबा बंदा सिंह बहादुर संग्रहालय

हरियाणा सरकार यमुनानगर जिले के साढौरा स्थित ऐतिहासिक लोहगढ़ में बाबा बंदा सिंह बहादुर संग्रहालय और स्मारक का निर्माण भी करवा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में इसके लिए फंड की घोषणा की गई थी।

इतिहासकारों के अनुसार, लोहगढ़ कभी सिखों की राजधानी हुआ करता था और इसका सिख इतिहास में विशेष महत्व है। संग्रहालय के निर्माण से नई पीढ़ी को बाबा बंदा सिंह बहादुर के संघर्ष, वीरता और ऐतिहासिक योगदान की जानकारी मिल सकेगी।

विद्यार्थियों को मिलेगा प्रेरणादायक इतिहास

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सिख गुरुओं और बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन संघर्षों को पाठ्यक्रम में शामिल करने से विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं और महान व्यक्तित्वों के बारे में गहराई से जानने का अवसर मिलेगा। साथ ही उनमें देशभक्ति, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों का विकास भी होगा।

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