Rampal on Premanand Maharaj : सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल ने आध्यात्मिक संत प्रेमानंद महाराज को लेकर विवादित टिप्पणी की है। रामपाल ने प्रेमानंद महाराज की साधना पद्धति पर सवाल उठाते हुए उन्हें “जीरो ज्ञान” वाला बताया और आरोप लगाया कि वह कृष्ण नाम के बजाय लोगों से “राधा-राधा” नाम का जाप करवा रहे हैं। रामपाल का दावा है कि इस तरह की साधना शास्त्रों के अनुरूप नहीं है और इससे मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 26 August 2026
IBN24 NEWS NETWORK : रामपाल की यह टिप्पणी उनके सोशल मीडिया पेज ‘स्प्रीचुअल लीडर संत रामपाल’ पर साझा किए गए वीडियो के संदर्भ में सामने आई है। हालांकि, प्रेमानंद महाराज की ओर से इन टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है।
प्रेमानंद महाराज पर क्या बोले रामपाल ?
रामपाल ने कहा कि प्रेमानंद महाराज कृष्ण नाम को छोड़कर लोगों से राधा-राधा नाम का जाप करवा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रेमानंद महाराज को शास्त्रों का ज्ञान नहीं है और उनके द्वारा बताई जा रही साधना शास्त्र-विरुद्ध है।

रामपाल ने अपने तर्क को समझाने के लिए मेडिकल साइंस का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह किसी बीमारी के इलाज के लिए सही दवा जरूरी होती है, उसी तरह आध्यात्मिक क्षेत्र में भी सही साधना जरूरी है। उनके मुताबिक, यदि डॉक्टर गलत दवा देगा तो बीमारी ठीक नहीं होगी और इसी तरह गलत साधना से मोक्ष प्राप्त नहीं हो सकता।
गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23-24 का दिया हवाला
रामपाल ने अपनी बात के समर्थन में श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23 और 24 का हवाला दिया। गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23 में कहा गया है कि जो व्यक्ति शास्त्र-विधि को छोड़कर अपनी इच्छा के अनुसार आचरण करता है, उसे न सिद्धि, न सुख और न ही परम गति प्राप्त होती है। श्लोक 24 में कर्तव्य और अकर्तव्य के निर्धारण में शास्त्र को प्रमाण मानने की बात कही गई है।
रामपाल का तर्क है कि भक्ति और साधना भी शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए। उनके अनुसार, शास्त्रानुकूल साधना के बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है।
नाम जाप को बताया मोक्ष का आधार
रामपाल ने कहा कि भक्ति का मूल आधार नाम जाप है। उन्होंने गुरु नानक देव जी की वाणी “नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला” का उदाहरण देते हुए नाम जाप को महत्वपूर्ण बताया।

रामपाल के अनुसार, शास्त्रों में बताए गए सही नाम का जाप करने से ही जीव का कल्याण और मोक्ष संभव है। उनका दावा है कि शास्त्रों के विपरीत साधना करने से आध्यात्मिक लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
करीब एक महीने पहले भगवान श्रीराम को लेकर भी की थी टिप्पणी
रामपाल इससे पहले भगवान श्रीराम और अयोध्या स्थित राम मंदिर को लेकर की गई टिप्पणी के कारण भी चर्चा में आए थे। उनके द्वारा कथित तौर पर मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और भगवान श्रीराम की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए गए थे।

रामपाल ने अपने तर्क में कहा था कि यदि मंदिर में स्थापित मूर्ति में वास्तव में प्राण प्रतिष्ठित होते तो मंदिर में चोरी नहीं होती। उन्होंने इस आधार पर प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
इन टिप्पणियों को लेकर भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई थी और धार्मिक मुद्दों पर रामपाल के बयान को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।
रामपाल से जुड़े पुराने विवाद भी रहे हैं चर्चा में
रामपाल लंबे समय से विवादों में रहे हैं। वर्ष 2006 में करौंथा आश्रम विवाद के दौरान आर्य समाज के अनुयायियों और रामपाल के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई थी और इसके बाद रामपाल के खिलाफ मामला दर्ज हुआ।
इसके बाद वर्ष 2014 में हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में पुलिस कार्रवाई के दौरान हिंसा हुई। इस घटना में आश्रम परिसर में पांच महिलाओं और एक बच्चे की मौत हुई थी। इन मामलों में रामपाल और उनके समर्थकों के खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप लगे थे।
11 साल से ज्यादा समय जेल में रहने के बाद अप्रैल 2026 में रिहाई
रामपाल को अप्रैल 2026 में हिसार की सेंट्रल जेल से रिहा किया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने करीब 11 साल से ज्यादा समय जेल में बिताया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद 10 अप्रैल 2026 को उनकी रिहाई हुई।

रिपोर्टों के अनुसार, हत्या से जुड़े मामलों में मिली उम्रकैद की सजा पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी, जबकि देशद्रोह से जुड़े मामले में उन्हें जमानत मिली थी। रिहाई के बाद रामपाल सोनीपत के धनाना स्थित सतलोक आश्रम पहुंचे थे।
अब प्रेमानंद महाराज पर बयान से फिर चर्चा में
जेल से बाहर आने के बाद रामपाल लगातार अपने आध्यात्मिक विचारों और बयानों के कारण चर्चा में हैं। अब प्रेमानंद महाराज की साधना और नाम जाप को लेकर की गई उनकी टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।

रामपाल ने अपने बयान में गीता के श्लोकों को आधार बनाकर अपनी साधना पद्धति को सही बताया और दूसरी साधना पद्धतियों पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल, प्रेमानंद महाराज या उनके प्रतिनिधियों की ओर से रामपाल के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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