Police Takes Sonam Wangchuk to Hospital : राजधानी के जंतर-मंतर पर पिछले तीन सप्ताह से जारी सोनम वांगचुक का आमरण अनशन शनिवार को नए मोड़ पर पहुंच गया। स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस उन्हें मेडिकल निगरानी के लिए सफदरजंग अस्पताल ले गई। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

Written by Kajal Panchal • Published on : 18 July 2026
IBN24 News Network : इस बीच आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके भी भूख हड़ताल पर बैठ गए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने वांगचुक के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल ले जाया गया। साथ ही उन्होंने स्वयं के साथ भी धक्का-मुक्की होने का आरोप लगाया।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी है आंदोलन
सोनम वांगचुक और उनके समर्थक NEET पेपर लीक प्रकरण में जवाबदेही तय करने, निष्पक्ष जांच कराने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 21 दिनों से अनशन पर बैठे हैं।

लंबे समय से भोजन नहीं लेने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर होती गई। चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार उनका वजन लगभग 9.5 किलोग्राम तक कम हो चुका है, जिसके बाद स्वास्थ्य संबंधी चिंता और बढ़ गई।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी मेडिकल निगरानी
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वांगचुक की नियमित मेडिकल जांच सुनिश्चित की जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि उनकी हालत उपचार की मांग करती है तो आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसी क्रम में शनिवार को पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर पहुंची।
तीन छात्र अब भी अनशन पर डटे
वांगचुक के साथ अनशन कर रहे ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्र—नेहा, आमीन और मनीष—अब भी जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं।
मेडिकल टीम के अनुसार नेहा में हाइपोग्लाइसीमिया के गंभीर लक्षण पाए गए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी गई है। वहीं अन्य दो छात्रों की तबीयत भी लगातार गिर रही है।
क्या किसी अनशनकारी को जबरन इलाज दिया जा सकता है ?
लंबे समय तक चलने वाले अनशन के दौरान अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या डॉक्टर किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध ड्रिप या पोषण दे सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि अनशनकारी पूरी तरह होश में है और अपने फैसले के परिणाम समझते हुए इलाज से इनकार करता है, तो उसकी इच्छा का सम्मान किया जाता है। हालांकि यदि वह बेहोश हो जाए, निर्णय लेने की क्षमता खो दे या अदालत जीवन बचाने के लिए निर्देश दे, तो डॉक्टर आवश्यक चिकित्सा हस्तक्षेप कर सकते हैं।
क्या ड्रिप लगने से अनशन समाप्त माना जाता है ?
इस विषय पर कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है। कई मामलों में जीवन बचाने के उद्देश्य से दी गई ड्रिप को अनशन समाप्त नहीं माना जाता। यह परिस्थितियों और संबंधित व्यक्ति के रुख पर निर्भर करता है।
संविधान क्या कहता है ?
भारतीय संविधान में भूख हड़ताल को लेकर अलग से कोई कानून नहीं है। हालांकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार नागरिकों को प्राप्त है। दूसरी ओर राज्य की जिम्मेदारी नागरिक के जीवन की रक्षा करना भी है। यही कारण है कि गंभीर स्वास्थ्य स्थिति में प्रशासन हस्तक्षेप कर सकता है।
लंबे अनशन का शरीर पर क्या असर पड़ता है ?

चिकित्सकों के अनुसार लगातार भोजन न मिलने पर शरीर पहले ऊर्जा के लिए ग्लूकोज का उपयोग करता है। इसके बाद वसा टूटने लगती है और धीरे-धीरे मांसपेशियां भी प्रभावित होती हैं। लंबे समय तक अनशन जारी रहने पर लो ब्लड प्रेशर, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, विटामिन की कमी और कई अंगों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।
भारत में लंबे अनशन का इतिहास
देश में अपनी मांगों को लेकर कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल, पर्यावरणविद् स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद (जी.डी. अग्रवाल), स्वतंत्रता सेनानी जतिन दास, पोट्टी श्रीरामुलु और महात्मा गांधी के अनशन भारतीय इतिहास में प्रमुख उदाहरण माने जाते हैं।
वहीं सबसे लंबा अनशन इरोम शर्मिला ने किया था। उन्होंने मणिपुर से AFSPA हटाने की मांग को लेकर करीब 16 वर्षों तक आंदोलन जारी रखा। इस दौरान चिकित्सकीय निगरानी में उन्हें नाक के माध्यम से तरल पोषण दिया जाता रहा।
फिलहाल क्या है स्थिति ?
सोनम वांगचुक अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं, जबकि उनके तीन साथी अब भी जंतर-मंतर पर अनशन जारी रखे हुए हैं। दूसरी ओर अभिजीत दीपके के भी भूख हड़ताल पर बैठने से आंदोलन ने नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम ले लिया है। आने वाले दिनों में अदालत, प्रशासन और आंदोलनकारियों के रुख पर इस पूरे मामले की दिशा निर्भर करेगी।
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