Haryana Fire Department : दिल्ली के एक होटल और रोहतक की मार्केट में हाल ही में हुई भीषण आग की घटना के बाद हरियाणा सरकार अलर्ट मोड में आ गई है। सरकार अब बड़े और प्रमुख शहरों में वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम विकसित करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत 500 से 800 वायरलेस सेट खरीदे जाएंगे। इसके अलावा 16 नई हाइड्रोलिक मशीनें भी लाई जाएंगी।

Written by Kajal Panchal • Published on : 13 June 2026
IBN24 News Network : दरअसल, हरियाणा में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बहुमंजिला इमारतों के निर्माण के बावजूद फायर विभाग उसी अनुपात में अपडेट नहीं हो पाया है। हालात ऐसे हैं कि अधिकांश जिलों में ऊंची इमारतों तक पहुंचने वाली हाइड्रोलिक लैडर तक उपलब्ध नहीं हैं। कई बार आग बुझाने के लिए दूसरे जिलों से वाहन मंगाने पड़ते हैं।
लेकिन सवाल यह भी है कि जब विभाग में 50 प्रतिशत से ज्यादा पद खाली हों और दमकल वाहनों की भी भारी कमी हो, तो क्या केवल नई मशीनें और उपकरण व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत कर पाएंगे?
जल्द खरीदे जाएंगे आधुनिक उपकरण
अग्निशमन विभाग के निदेशक आईएफएस शेखर विद्यार्थी के अनुसार विभाग में संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए कई प्रस्तावों पर काम चल रहा है। विभाग प्रदेशभर के फायर स्टेशनों पर वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत करीब 500 से 800 वायरलेस उपकरणों की खरीद की जाएगी।
इसके अलावा फायर सूट, कंबी टूल और अन्य आधुनिक उपकरण भी खरीदे जाएंगे ताकि अग्निशमन कर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ाई जा सके।
16 नई हाइड्रोलिक मशीनें खरीदने की तैयारी
विभाग ने 16 नए हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और टर्नटेबल लैडर खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया है। इनमें विभिन्न ऊंचाई क्षमता वाले उपकरण शामिल हैं।

- 104 मीटर ऊंचाई तक पहुंचने वाले हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म
- 90 मीटर क्षमता वाले प्लेटफॉर्म
- 70 मीटर क्षमता वाले प्लेटफॉर्म
- 68 मीटर क्षमता वाले प्लेटफॉर्म
- 55 मीटर क्षमता की टर्नटेबल लैडर
- 42 मीटर क्षमता की टर्नटेबल लैडर
- फोम टेंडर
- वाटर मिस्ट सिस्टम
हालांकि इनकी खरीद प्रक्रिया अभी प्रारंभिक स्तर पर है और फिलहाल कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है।

ऊंची इमारतों तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती
गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला और अन्य शहरी जिलों में सैकड़ों बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। लेकिन आग लगने की स्थिति में ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं हैं।
विभाग के पास वर्तमान में ऐसी सीमित मशीनें हैं, जो लगभग 137 फीट तक पहुंच सकती हैं। वहीं गुरुग्राम में कई इमारतें 500 फीट तक ऊंची हैं।
आपात स्थिति में विभाग को डीएलएफ की 295 फीट ऊंची मशीन जैसी निजी संसाधनों पर भी निर्भर रहना पड़ता है।
अंबाला, पंचकूला और चंडीगढ़ क्षेत्र में केवल एक-एक हाइड्रोलिक लैडर उपलब्ध होने के कारण बड़े हादसों की स्थिति में प्रतिक्रिया समय बढ़ सकता है।
दूसरे जिलों से बुलानी पड़ती हैं गाड़ियां
कई जिलों में संसाधनों की कमी इतनी है कि बड़ी आग लगने पर अन्य जिलों से फायर वाहन बुलाने पड़ते हैं। इससे आग पर नियंत्रण पाने में देरी होती है।
कई मामलों में वाहनों को 10 से 15 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तय करके मौके पर पहुंचना पड़ता है, जिससे शुरुआती “गोल्डन टाइम” प्रभावित होता है।
क्या सिर्फ उपकरणों की खरीद से बदल जाएगी तस्वीर ?
सरकार द्वारा फायर विभाग को आधुनिक बनाने की तैयारी निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन विभाग के सामने चुनौती केवल उपकरणों की नहीं, बल्कि कर्मचारियों, वाहनों और बुनियादी ढांचे की भी है।
जब तक रिक्त पद नहीं भरे जाते, दमकल वाहनों की संख्या नहीं बढ़ती और तेजी से विकसित हो रहे शहरों के अनुरूप संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक आग जैसी आपात स्थितियों से निपटना बड़ी चुनौती बना रह सकता है।
यही कारण है कि सरकार की नई योजना को लेकर एक बड़ा सवाल बना हुआ है—क्या 16 नई हाइड्रोलिक मशीनें, 800 वायरलेस सेट और आधुनिक उपकरण हरियाणा की फायर सेफ्टी व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत कर पाएंगे, या फिर इसके लिए मानव संसाधन और बुनियादी ढांचे पर भी उतना ही बड़ा निवेश करना होगा?
Please also read this article : Gold Price Today: गिरावट के बाद संभला बाजार, जानिए देशभर में कहां पर कितना है सोने का भाव
Instagram: https://www.instagram.com/ibn24newsnetwork





