Red Tape Carry Bag Charges : अगर आप किसी शोरूम या बड़े रिटेल स्टोर में खरीदारी करते हैं और सामान रखने के लिए कैरी बैग के नाम पर आपसे अलग से पैसे लिए जाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हरियाणा के एक कंज्यूमर कोर्ट ने कैरी बैग के लिए ग्राहक से ₹30 वसूलने के मामले में फैशन कंपनी Red Tape को जिम्मेदार ठहराते हुए ग्राहक के पक्ष में फैसला दिया है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 14 August 2026
IBN24 NEWS NETWORK : कोर्ट ने कंपनी को ₹30 वापस करने के साथ-साथ 9 प्रतिशत सालाना ब्याज, मानसिक परेशानी के लिए ₹15,000 और मुकदमे के खर्च के लिए ₹11,000 देने का आदेश दिया है। यानी ग्राहक को कुल ₹26,000 की राशि मिलेगी, इसके अलावा ₹30 और उस पर निर्धारित ब्याज भी देना होगा।
₹4,713 की खरीदारी, कैरी बैग के लिए अलग से लिए ₹30
यह मामला 31 अगस्त 2025 का है। शिकायत के मुताबिक, एक ग्राहक गुरुग्राम स्थित Red Tape के शोरूम में खरीदारी करने पहुंचा था। ग्राहक ने शोरूम से कुल ₹4,713 का सामान खरीदा।

खरीदारी के बाद सामान को ले जाने के लिए ग्राहक को तीन कैरी बैग दिए गए। इन तीन बैग के लिए शोरूम ने ग्राहक से ₹30 अलग से चार्ज किए।
ग्राहक ने इस अतिरिक्त शुल्क पर आपत्ति जताई। उसका कहना था कि उसने शोरूम से सामान खरीदा है और सामान को सुरक्षित तरीके से ले जाने के लिए बैग की जरूरत है। ग्राहक ने शोरूम से कैरी बैग मुफ्त उपलब्ध कराने की मांग भी की, लेकिन उसकी मांग नहीं मानी गई।
ग्राहक ने क्यों किया कंज्यूमर कोर्ट का रुख ?
ग्राहक ने कैरी बैग के लिए अलग से पैसे वसूले जाने को लेकर कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में ग्राहक का मुख्य तर्क था कि जब कोई व्यक्ति किसी दुकान या शोरूम से सामान खरीदता है, तो खरीदे गए सामान को ग्राहक तक ले जाने योग्य तरीके से उपलब्ध कराना विक्रेता की जिम्मेदारी का हिस्सा होना चाहिए। ग्राहक के अनुसार, कैरी बैग के लिए अलग से पैसा वसूलना उचित नहीं था।
मामले की सुनवाई के दौरान कैरी बैग के लिए अलग से शुल्क वसूलने से जुड़े पुराने उपभोक्ता मामलों का भी हवाला दिया गया।
कोर्ट ने Red Tape को क्यों ठहराया जिम्मेदार ?

मामले में कोर्ट ने कंपनी की ओर से कैरी बैग के लिए अलग से राशि वसूलने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के दायरे में माना। कोर्ट की टिप्पणी का मुख्य आधार यह था कि ग्राहक द्वारा खरीदे गए सामान को ले जाने के लिए आवश्यक पैकेजिंग की लागत को केवल कैरी बैग के नाम पर ग्राहक पर डालना उचित नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब ग्राहक ने सामान खरीद लिया हो और उसे ले जाने के लिए बैग आवश्यक हो।
कोर्ट ने यह भी माना कि ग्राहकों से कैरी बैग के नाम पर नियमित रूप से अलग शुल्क वसूलने की प्रथा उपभोक्ता अधिकारों के सवाल खड़े कर सकती है।
₹30 वापस करने के साथ 9% ब्याज भी
कोर्ट ने Red Tape को ग्राहक से लिए गए ₹30 वापस करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही इस ₹30 की राशि पर 31 अगस्त 2025 से वास्तविक भुगतान की तारीख तक 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का भी आदेश दिया गया है।
यानी कंपनी को सिर्फ वही ₹30 वापस नहीं करने हैं जो ग्राहक से लिए गए थे, बल्कि निर्धारित अवधि के लिए उस रकम पर ब्याज भी देना होगा।
मानसिक परेशानी के लिए ₹15,000
इस मामले में कोर्ट ने ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी और असुविधा को भी ध्यान में रखा। इसके लिए कंपनी को ग्राहक को ₹15,000 बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।इसके अलावा ग्राहक को कानूनी कार्रवाई के दौरान हुए खर्च के लिए भी राशि देने का निर्देश दिया गया।
मुकदमे के खर्च के लिए ₹11,000
कोर्ट ने ₹11,000 मुकदमे/कानूनी खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है। इस तरह ₹15,000 मानसिक परेशानी और ₹11,000 मुकदमे के खर्च को जोड़ने पर कंपनी को ₹26,000 का भुगतान करना होगा। इसके अलावा ₹30 की मूल राशि और उस पर निर्धारित 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी अलग से देय होगा।
ग्राहक को मिलने वाली राशि
- कैरी बैग के लिए वसूली गई राशि: ₹30
- मानसिक परेशानी का मुआवजा: ₹15,000
- मुकदमे का खर्च: ₹11,000
- कुल मुआवजा/खर्च: ₹26,000
- ₹30 पर ब्याज: 31 अगस्त 2025 से भुगतान तक 9% सालाना
कंपनी को 45 दिनों में करना होगा भुगतान
कोर्ट के आदेश के मुताबिक Red Tape को आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा। अगर निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो उपभोक्ता कानून के तहत उपलब्ध आगे की कार्रवाई का रास्ता खुला रह सकता है।
क्या हर कैरी बैग का चार्ज लेना गैरकानूनी है ?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। इस मामले को देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि हर परिस्थिति में कैरी बैग के लिए कोई भी शुल्क लेना स्वतः गैरकानूनी है। कैरी बैग शुल्क से जुड़े मामलों में शोरूम की नीति, खरीदारी की परिस्थितियां, ग्राहक को शुल्क की जानकारी किस तरह दी गई, बिल में शुल्क का उल्लेख और मामले के अन्य तथ्यों को देखा जा सकता है।
इसलिए किसी ग्राहक से कैरी बैग के लिए शुल्क लिया गया है तो वह अपने मामले के तथ्यों के आधार पर उपभोक्ता अधिकारों के तहत शिकायत कर सकता है।
ग्राहक अपने अधिकारों की रक्षा कैसे करें ?
अगर किसी शोरूम में आपसे कैरी बैग के नाम पर अलग से पैसा लिया जाता है और आपको लगता है कि यह अनुचित है, तो सबसे पहले बिल और भुगतान की रसीद संभालकर रखें। ग्राहक को यह भी देखना चाहिए कि कैरी बैग का शुल्क बिल में अलग से दर्ज किया गया है या नहीं। जरूरत पड़ने पर शोरूम से लिखित शिकायत/रिफंड की मांग की जा सकती है।
अगर विवाद का समाधान नहीं होता है, तो उपभोक्ता संबंधित Consumer Commission के समक्ष शिकायत करने के विकल्प पर विचार कर सकता है।
₹30 की वसूली बनी ₹26,000 के मुआवजे की वजह
इस पूरे मामले की सबसे बड़ी बात यही है कि विवाद की शुरुआत महज ₹30 के कैरी बैग शुल्क से हुई थी, लेकिन उपभोक्ता अदालत तक मामला पहुंचने के बाद कंपनी पर ग्राहक के पक्ष में ₹26,000 का मुआवजा और खर्च, साथ ही ₹30 की वापसी और उस पर ब्याज का आदेश हुआ।
यह मामला ग्राहकों के लिए भी एक संदेश है कि छोटी रकम होने के बावजूद अगर उन्हें लगता है कि उनके साथ अनुचित व्यवहार हुआ है, तो वे अपने उपभोक्ता अधिकारों के बारे में जानकारी लेकर उचित कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।
नोट: इस खबर में कोर्ट के फैसले से संबंधित वही तथ्य शामिल किए गए हैं जो उपलब्ध मामले की जानकारी में दिए गए हैं। किसी विशेष कानूनी नियम को सभी दुकानों/शोरूम पर समान रूप से लागू मानने से पहले संबंधित मामले के आदेश और मौजूदा उपभोक्ता कानून की जांच करना जरूरी है।
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