Sikh families protest outside Rahul Gandhi’s residence : 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस और सिख समुदाय के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। शनिवार को सिख नेताओं और 1984 दंगों से प्रभावित परिवारों के सदस्यों ने राहुल गांधी के दिल्ली स्थित आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और पुतला भी जलाया। उनका विरोध कांग्रेस नेताओं की ओर से पूर्व कांग्रेस नेता और 1984 दंगों के मामलों में दोषी रहे सज्जन कुमार के निधन के बाद दिए गए बयानों को लेकर है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 22 August 2026
IBN24 NEWS NETWORK : प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने सज्जन कुमार को सम्मानजनक शब्दों में याद करते हुए उन्हें ‘हीरो’ और ‘रोल मॉडल’ बताया, जिससे 1984 दंगों में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों की भावनाएं आहत हुई हैं। सिख नेताओं ने कांग्रेस से इन बयानों पर सफाई देने और माफी मांगने की मांग की है।
क्यों भड़का विवाद ?
विवाद की शुरुआत सज्जन कुमार के निधन के बाद कांग्रेस नेताओं की ओर से दी गई श्रद्धांजलियों से हुई। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सज्जन कुमार के निधन को बड़ी क्षति बताते हुए उनके बारे में सकारात्मक टिप्पणी की थी। कांग्रेस नेता उदित राज ने भी उनके निधन को पार्टी के लिए नुकसान बताते हुए उनके काम की तारीफ की।
इन बयानों के बाद सिख संगठनों और 1984 दंगा पीड़ित परिवारों की नाराजगी सामने आई। पंजाब कांग्रेस ने दीपेंद्र हुड्डा की टिप्पणी से दूरी बनाते हुए इसे उनका व्यक्तिगत विचार बताया और कहा कि पार्टी 1984 हिंसा के पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ खड़ी है।
सिख नेताओं ने राहुल गांधी से पूछे सवाल
प्रदर्शन का नेतृत्व दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने किया। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि क्या 1984 दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार को पार्टी आज भी अपना ‘हीरो’ या ‘रोल मॉडल’ मानती है।

सिख नेताओं ने कहा कि 42 साल बाद भी दंगा पीड़ित परिवारों के जख्म पूरी तरह नहीं भरे हैं। ऐसे में किसी दोषी व्यक्ति के सम्मान में दिए गए बयान उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
20 अगस्त को 80 साल की उम्र में हुआ सज्जन कुमार का निधन
पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का 20 अगस्त 2026 को 80 साल की उम्र में निधन हो गया। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे और दिसंबर 2018 से जेल में थे। निधन के समय वह दिल्ली की जेल में बंद थे। उन्हें इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित किया गया।
सज्जन कुमार को 1984 हिंसा से जुड़े दो मामलों में उम्रकैद की सजा मिली थी। वहीं, कुछ अन्य मामलों में उन्हें बरी या डिस्चार्ज किया गया था। इसलिए उनके खिलाफ दर्ज सभी मामलों का परिणाम एक जैसा नहीं रहा।
1984 के सिख विरोधी दंगे क्या थे ?
31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा भड़की थी। दिल्ली में बड़ी संख्या में सिखों की हत्या हुई और संपत्तियों, दुकानों तथा धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया।
इन घटनाओं की जांच के लिए समय-समय पर कई आयोग और जांच एजेंसियां गठित की गईं। बाद के वर्षों में कुछ पुराने मामलों को दोबारा खोला गया और विशेष जांच दल (SIT) ने भी बंद हो चुके मामलों की पुनः जांच की।
सज्जन कुमार के खिलाफ प्रमुख मामलों का क्या हुआ ?
1. राज नगर केस: 2018 में उम्रकैद
दिल्ली कैंट के राज नगर और पालम कॉलोनी से जुड़े मामले में एक सिख परिवार के पांच सदस्यों की हत्या और गुरुद्वारे को जलाने के आरोप थे। ट्रायल कोर्ट ने 2013 में सज्जन कुमार को बरी कर दिया था।
इसके बाद CBI की अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद उन्होंने अदालत में सरेंडर किया और जेल चले गए। यही वह मामला था जिसके चलते वह दिसंबर 2018 से जेल में रहे।
2. सुल्तानपुरी केस: 2023 में बरी
सुल्तानपुरी से जुड़े 1984 हिंसा के मामले में सज्जन कुमार पर दंगे और हत्या समेत कई आरोप लगाए गए थे। 20 सितंबर 2023 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया।
इससे स्पष्ट है कि 1984 से जुड़े उनके सभी मामलों में उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया था।
3. सरस्वती विहार केस: 2025 में दूसरी उम्रकैद
सरस्वती विहार से जुड़े मामले में 1 नवंबर 1984 को जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या का मामला था।
इस पुराने मामले की दोबारा जांच SIT ने की। 12 फरवरी 2025 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार को दोषी ठहराया और 25 फरवरी 2025 को उम्रकैद की सजा सुनाई। यह उनकी दूसरी बड़ी सजा थी।
अदालत ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य समेत परिस्थितियों को देखते हुए मृत्युदंड नहीं दिया।
4. जनकपुरी-विकासपुरी केस: जनवरी 2026 में राहत
जनकपुरी और विकासपुरी से जुड़े मामले में 1984 की हिंसा के दौरान हत्या, आगजनी और लूटपाट के आरोप थे।
22 जनवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जनकपुरी मामले में सज्जन कुमार को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की घटनास्थल पर मौजूदगी और अपराध में उसकी भूमिका को संदेह से परे विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं कर पाया। विकासपुरी से जुड़े हिस्से में पहले ही उन्हें डिस्चार्ज किया जा चुका था और उस आदेश के खिलाफ रिवीजन लंबित होने की जानकारी फैसले में दर्ज है।
चार प्रमुख मामलों का नतीजा एक नजर में
सज्जन कुमार से जुड़े 1984 दंगा मामलों में अदालतों के फैसले अलग-अलग रहे। राज नगर मामले में उन्हें उम्रकैद, सरस्वती विहार मामले में दूसरी उम्रकैद मिली, जबकि सुल्तानपुरी मामले में वह बरी हुए और जनकपुरी मामले में भी जनवरी 2026 में बरी कर दिए गए। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि 1984 से जुड़े हर मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था।
अब कांग्रेस से क्या मांग है ?
सिख संगठनों और दंगा पीड़ित परिवारों की मांग है कि कांग्रेस नेतृत्व सज्जन कुमार के बारे में दिए गए विवादित बयानों पर स्पष्ट रुख सामने रखे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिन लोगों ने 1984 की हिंसा में अपने परिवार खोए हैं, उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस को ऐसे बयानों से दूरी बनानी चाहिए और सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
वहीं, पंजाब कांग्रेस द्वारा दीपेंद्र सिंह हुड्डा की टिप्पणी को उनका व्यक्तिगत विचार बताए जाने के बाद अब राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है।
नोट: 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में अलग-अलग अदालतों के फैसले और आरोपों के परिणाम अलग रहे हैं। इसलिए किसी व्यक्ति की कानूनी स्थिति बताते समय प्रत्येक मामले के न्यायिक फैसले को अलग-अलग देखना जरूरी है।
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