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US Deportation of Indians : अमेरिका में भारतीयों पर डिपोर्टेशन का शिकंजा, कनाडा में भी 1500 छात्रों पर संकट, आखिर क्यों बढ़ी मुश्किलें ?

US Deportation of Indians : अमेरिका और कनाडा में पढ़ाई और नौकरी के लिए गए भारतीयों के सामने इमिग्रेशन से जुड़ी चुनौतियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के दौरान अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई तेज हुई है, जबकि कनाडा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) को लेकर बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की चिंता बढ़ी है।

US Deportation of Indians

Written by Kajal Panchal • Published on : 20 August 2026

IBN24 NEWS NETWORK : हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका ने 2025 में 3,567 भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेजा था। 2026 में 31 जुलाई तक यह संख्या 1,273 थी। यानी 2025 और जुलाई 2026 तक कुल 4,840 भारतीय अमेरिका से डिपोर्ट किए जा चुके थे।

अमेरिका में इमिग्रेशन कार्रवाई तेज

अमेरिकी प्रशासन ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। भारतीय नागरिकों के डिपोर्टेशन के मामलों में भी तेजी देखी गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच डिपोर्टेशन, माइग्रेशन और मोबिलिटी से जुड़े मुद्दों पर लगातार बातचीत हो रही है।

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भारत सरकार का कहना है कि अवैध प्रवास पर रोक लगाने के साथ-साथ वैध तरीके से होने वाले रोजगार, शिक्षा और यात्रा पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े, यह भी महत्वपूर्ण है।

2025 में 3,567 भारतीय नागरिकों का डिपोर्टेशन पिछले 16 वर्षों में सबसे अधिक बताया गया है। इससे पहले 2009 में 734 भारतीयों को अमेरिका से वापस भेजा गया था।

2026 में अब तक 1,273 भारतीय वापस भेजे गए

विदेश मंत्रालय के 31 जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 31 जुलाई तक 1,273 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से भारत वापस भेजा गया। वहीं, 2025 में 3,567 भारतीय नागरिक डिपोर्ट हुए थे।

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MEA के मुताबिक, जब किसी भारतीय नागरिक को किसी देश से डिपोर्ट किए जाने का मामला भारत के सामने आता है, तो उसकी राष्ट्रीयता की जांच की जाती है। पुष्टि होने के बाद ही भारत उसकी वापसी की प्रक्रिया में सहयोग करता है।

2025 में सैन्य विमान से हुई थी डिपोर्टेशन

अमेरिका से भारतीयों की डिपोर्टेशन को लेकर फरवरी 2025 में भी बड़ा विवाद हुआ था। 5 फरवरी 2025 को अमेरिका से 104 भारतीय नागरिकों को सैन्य विमान के जरिए अमृतसर लाया गया था। इनमें कुछ लोगों को हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां लगाए जाने की तस्वीरें सामने आई थीं, जिसके बाद भारत में इस पर राजनीतिक विवाद हुआ।

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इसके बाद भारत सरकार ने अमेरिका के सामने यह मुद्दा उठाया कि डिपोर्ट किए जा रहे भारतीय नागरिकों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए।

कनाडा में PGWP को लेकर भारतीय छात्रों की मुश्किल बढ़ी

दूसरी ओर, कनाडा के अल्बर्टा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट को लेकर बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्र परेशानी में हैं। यह विवाद खास तौर पर उन कार्यक्रमों से जुड़ा है जिन्हें छात्रों ने PGWP के लिए पात्र मानकर पूरा किया था।

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रिपोर्टों के मुताबिक करीब 1,500 अंतरराष्ट्रीय ग्रेजुएट इस विवाद से प्रभावित हो सकते हैं और इनमें बड़ी संख्या भारतीय छात्रों की बताई जा रही है। कई छात्रों के PGWP आवेदन इसलिए खारिज हुए हैं क्योंकि उनके कार्यक्रमों को गैर-क्रेडिट (non-credit) माना गया।

छात्रों का आरोप- नियम स्पष्ट नहीं थे

प्रभावित छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने अपने कोर्स में दाखिला लिया था, तब उन्हें यह भरोसा दिलाया गया था कि उनका कार्यक्रम पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट के लिए योग्य है। पढ़ाई पूरी करने और भारी फीस खर्च करने के बाद PGWP आवेदन खारिज होने से उनके सामने नौकरी और कनाडा में रहने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

कैलगरी में इस मुद्दे को लेकर भारतीय छात्रों समेत प्रभावित अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने प्रदर्शन और भूख हड़ताल भी की है। छात्रों की मांग है कि उनके मामलों की दोबारा समीक्षा की जाए और उन्हें उचित समाधान दिया जाए।

कनाडा सरकार का क्या कहना है ?

कनाडाई इमिग्रेशन अधिकारियों का कहना है कि गैर-क्रेडिट कार्यक्रम सामान्य तौर पर PGWP के लिए पात्र नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार जून 2026 में वेबसाइट पर की गई जानकारी को स्पष्ट किया गया था, जबकि पात्रता से जुड़ा नियम पहले से मौजूद था। दूसरी ओर, प्रभावित छात्रों का कहना है कि उन्हें दाखिले के समय अलग जानकारी मिली थी।

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अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने भी कहा है कि जिन छात्रों का वैध स्टेटस या परमिट समाप्त हो जाता है और जिन्हें कनाडा में रहने का कोई अन्य वैध आधार नहीं मिलता, उन्हें देश छोड़ना होगा। हालांकि, जिन लोगों के पास वैध इमिग्रेशन स्टेटस है, उनके मामले अलग हो सकते हैं।

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