Doctors Unique ID Registration : देशभर में डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव हो सकता है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने हर रजिस्टर्ड डॉक्टर को केंद्रीय स्तर पर एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UID) देने का प्रस्ताव रखा है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो डॉक्टरों को एक राज्य में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद दूसरे राज्य में प्रैक्टिस करने के लिए अलग से रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी।

Written by Kajal Panchal • Published on : 20 August 2026
IBN24 NEWS NETWORK : NMC ने यह प्रस्ताव 2026 के ड्राफ्ट रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस लाइसेंस नियमों में रखा है। फिलहाल ये नियम अंतिम नहीं हैं और इन पर सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत डॉक्टर का पहला रजिस्ट्रेशन संबंधित राज्य मेडिकल काउंसिल करेगी। इसके बाद NMC का एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड (EMRB) डॉक्टर को UID जारी करेगा। यह UID डॉक्टर को नेशनल मेडिकल रजिस्टर (NMR) से जोड़ देगा। इसके बाद डॉक्टर देश के किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में बिना नया लाइसेंस लिए मेडिकल प्रैक्टिस कर सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाना और अलग-अलग राज्यों में बार-बार होने वाली कागजी प्रक्रिया को कम करना है।
30 दिन में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने का प्रस्ताव

डॉक्टर को EMRB के यूनिफाइड रजिस्ट्रेशन पोर्टल के जरिए आवेदन करना होगा। प्रस्ताव के मुताबिक, संबंधित राज्य मेडिकल काउंसिल को 30 दिनों के भीतर आवेदन पर कार्रवाई करनी होगी। रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस लाइसेंस मिलने के बाद EMRB की ओर से UID जारी किया जाएगा। यही नंबर डॉक्टर की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनेगा। UID में संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश का कोड और राज्य मेडिकल रजिस्टर में दर्ज रजिस्ट्रेशन नंबर शामिल होगा।
राज्य और राष्ट्रीय रजिस्टर आपस में जुड़े रहेंगे
प्रस्तावित सिस्टम में राज्य मेडिकल रजिस्टर और नेशनल मेडिकल रजिस्टर को आपस में जोड़ने की योजना है। इसका फायदा यह होगा कि डॉक्टर की जानकारी में कोई बदलाव होने पर दोनों रजिस्टर में रिकॉर्ड अपडेट किया जा सकेगा। इससे डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और पेशेवर रिकॉर्ड की जानकारी एक ही सिस्टम में उपलब्ध रहने की उम्मीद है।
डॉक्टर पर कार्रवाई हुई तो पूरे देश में दिखेगी

प्रस्तावित व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा डॉक्टरों के खिलाफ होने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई का रिकॉर्ड भी है। अगर किसी डॉक्टर पर पेशेवर लापरवाही, गलत आचरण या मेडिकल नेग्लिजेंस का आरोप लगता है, तो संबंधित राज्य मेडिकल काउंसिल मामले की जांच करेगी।
अगर किसी डॉक्टर के खिलाफ किसी दूसरे राज्य में कार्रवाई होती है, तो उसका रिकॉर्ड नेशनल मेडिकल रजिस्टर में अपडेट किया जाएगा। यह जानकारी डॉक्टर के मूल राज्य के मेडिकल रजिस्टर में भी दर्ज हो सकेगी। इससे किसी डॉक्टर के खिलाफ हुई कार्रवाई की जानकारी केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगी।
5 साल के लिए वैध होगा प्रैक्टिस लाइसेंस

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, डॉक्टर का मेडिसिन प्रैक्टिस लाइसेंस 5 साल तक वैध रखने का प्रस्ताव है। लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद निर्धारित समय के भीतर इसका रिन्यूअल कराना होगा। प्रस्ताव के मुताबिक, अगर डॉक्टर 3 महीने के भीतर लाइसेंस रिन्यू नहीं कराता है तो उसका रजिस्ट्रेशन इनएक्टिव किया जा सकता है। इसके बाद डॉक्टर के प्रैक्टिस करने पर रोक होगी और उसकी स्थिति नेशनल मेडिकल रजिस्टर में भी अपडेट हो जाएगी।
पुराने डॉक्टरों को भी मिलेगा UID

इस प्रस्ताव का फायदा सिर्फ नए डॉक्टरों को ही नहीं, बल्कि पहले से रजिस्टर्ड डॉक्टरों को भी मिलेगा। जो डॉक्टर पहले से इंडियन मेडिकल रजिस्टर या किसी राज्य मेडिकल रजिस्टर में रजिस्टर्ड हैं, लेकिन उनके पास UID नहीं है, उनके लिए एक बार का अपडेट अभियान चलाने का प्रस्ताव है। ऐसे डॉक्टर EMRB पोर्टल पर अपनी जानकारी अपडेट करके UID हासिल कर सकेंगे। प्रस्ताव के अनुसार, इसके लिए EMRB की ओर से कोई फीस नहीं ली जाएगी।
विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स भी होंगे शामिल
विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले भारतीय डॉक्टरों के लिए भी इस व्यवस्था में प्रावधान रखा गया है। FMGE या लागू होने के बाद नेशनल एग्जिट टेस्ट (NEXT) पास करने वाले विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट संबंधित नियम और अन्य जरूरी शर्तें पूरी करने के बाद नेशनल मेडिकल रजिस्टर में रजिस्ट्रेशन के लिए पात्र हो सकते हैं। इससे विदेश से मेडिकल शिक्षा हासिल करके भारत में प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के लिए भी राष्ट्रीय स्तर की रजिस्ट्रेशन व्यवस्था तैयार हो सकती है।
अभी अंतिम नियम लागू नहीं हुए
NMC का यह प्रस्ताव फिलहाल ड्राफ्ट स्तर पर है। आयोग ने नियमों पर लोगों और संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। इसलिए अभी डॉक्टरों के लिए देशभर में एक UID के जरिए प्रैक्टिस की यह व्यवस्था लागू नहीं हुई है। अंतिम नियम जारी होने और लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इसमें क्या बदलाव किए जाते हैं और डॉक्टरों के लिए नई व्यवस्था किस तरह काम करेगी।
क्या डॉक्टरों के लिए बदल जाएगा प्रैक्टिस का तरीका?
अगर NMC का प्रस्तावित सिस्टम अंतिम रूप में लागू होता है, तो डॉक्टरों को अलग-अलग राज्यों में प्रैक्टिस के लिए बार-बार रजिस्ट्रेशन कराने की प्रक्रिया से राहत मिल सकती है। साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर डॉक्टरों के लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और अनुशासनात्मक रिकॉर्ड को ट्रैक करना भी आसान हो सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल यह केवल प्रस्तावित ड्राफ्ट नियम हैं। अंतिम फैसला और लागू होने वाली व्यवस्था NMC की ओर से जारी अंतिम नियमों के बाद ही स्पष्ट होगी।
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