Zepto Zomato Price Hike : ऑनलाइन शॉपिंग और फूड डिलीवरी करने वाले ग्राहकों के लिए खर्च बढ़ सकता है। क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto ने फ्री डिलीवरी के लिए मिनिमम ऑर्डर वैल्यू बढ़ाकर ₹199 कर दी है। वहीं, Zomato पर पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग का इस्तेमाल बढ़ने से खाने के ऑर्डर की लागत 10% से 30% तक बढ़ सकती है। Zepto ने फ्री डिलीवरी के लिए मिनिमम ऑर्डर वैल्यू ₹149 से बढ़ाकर ₹199 कर दी है। यानी अब ग्राहकों को बिना डिलीवरी चार्ज के सामान मंगाने के लिए कम से कम ₹199 का ऑर्डर करना होगा।

Written by Kajal Panchal • Published on : 19 August 2026
IBN24 NEWS NETWORK : इस बदलाव के बाद Zepto का फ्री डिलीवरी बेस मिनिमम ऑर्डर Blinkit और Instamart जैसे प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म के करीब पहुंच गया है। हालांकि, पीक डिमांड के दौरान यह मिनिमम ऑर्डर वैल्यू ₹299 तक पहुंच सकती है। इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो पहले छोटी जरूरतों के लिए क्विक कॉमर्स ऐप्स से कम कीमत का सामान मंगाते थे।
कंपनी ने क्यों बदला नियम ?
क्विक कॉमर्स कंपनियों के लिए छोटे ऑर्डर की डिलीवरी करना अपेक्षाकृत महंगा पड़ सकता है। किसी ऑर्डर में सामान की कीमत कम होने के बावजूद पैकेजिंग, स्टोर से सामान तैयार करने और डिलीवरी से जुड़े खर्च लगभग बने रहते हैं। इसलिए कंपनियां अब केवल ऑर्डर की संख्या बढ़ाने के बजाय औसत ऑर्डर वैल्यू यानी Average Basket Value बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही हैं।
नए नियम के बाद ग्राहक फ्री डिलीवरी पाने के लिए अपने कार्ट में अतिरिक्त सामान जोड़ सकते हैं। इससे प्रति ऑर्डर कंपनी की कमाई और डिलीवरी लागत के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।
Zomato पर भी बढ़ सकता है खाने का खर्च
वहीं, ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato पर भी ग्राहकों का खर्च बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसकी वजह ऑर्डर की डिलीवरी में इस्तेमाल होने वाली पैकेजिंग है।

Zomato की चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर अंजलि रवि कुमार के मुताबिक, प्लास्टिक पैकेजिंग से ज्यादा पर्यावरण-अनुकूल और बायोडिग्रेडेबल विकल्पों की तरफ बढ़ने पर ग्राहकों के लिए खाने की लागत बढ़ सकती है। बताया गया है कि ऐसे पैकेजिंग विकल्पों के इस्तेमाल से ऑर्डर की कुल लागत 10% से 30% तक बढ़ सकती है।
पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग क्यों महंगी ?
फूड डिलीवरी में पैकेजिंग एक महत्वपूर्ण लागत है। वर्तमान में कई रेस्टोरेंट प्लास्टिक कंटेनर, रैपिंग और अन्य पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल करते हैं।

इसके मुकाबले टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग सामग्री की कीमत अधिक हो सकती है। ऐसे में अगर रेस्टोरेंट इन विकल्पों को बड़े स्तर पर अपनाते हैं तो अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंच सकता है। हालांकि, पैकेजिंग की वास्तविक लागत रेस्टोरेंट, ऑर्डर के आकार और इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
ग्राहकों की जेब पर कितना असर ?
Zepto के मामले में ₹149 की जगह ₹199 का मिनिमम ऑर्डर होने का मतलब है कि ग्राहकों को फ्री डिलीवरी के लिए पहले की तुलना में ₹50 ज्यादा का सामान खरीदना होगा।

पीक डिमांड के दौरान ₹299 की सीमा लागू होने पर यह अंतर और बढ़ सकता है। ऐसे में केवल एक-दो छोटी चीजें मंगाने वाले ग्राहकों को फ्री डिलीवरी के लिए अतिरिक्त सामान खरीदना पड़ सकता है या फिर डिलीवरी चार्ज देना पड़ सकता है। दूसरी ओर, Zomato पर पैकेजिंग लागत बढ़ने का असर ऑर्डर के कुल बिल पर पड़ सकता है। हालांकि, यह असर हर ऑर्डर पर एक जैसा नहीं होगा।
क्विक कॉमर्स कंपनियों का बदलता मॉडल
भारत में क्विक कॉमर्स सेक्टर तेजी से बढ़ा है। कंपनियों ने कुछ ही मिनटों में किराना और रोजमर्रा का सामान पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर डिलीवरी नेटवर्क तैयार किए हैं। हालांकि, तेज डिलीवरी मॉडल में डार्क स्टोर, कर्मचारियों, पैकेजिंग और डिलीवरी से जुड़े खर्च भी होते हैं। इसलिए कंपनियां अब ज्यादा टिकाऊ बिजनेस मॉडल की तरफ बढ़ रही हैं।
मिनिमम ऑर्डर वैल्यू बढ़ाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। इससे कंपनियां कम मूल्य वाले ऑर्डर की संख्या घटाकर बड़े ऑर्डर पर फोकस कर सकती हैं।
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