Samay Raina Supreme Court Fine : दिव्यांगों पर कथित आपत्तिजनक और असंवेदनशील टिप्पणी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्टैंड-अप कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना, रणवीर अलाहाबादिया, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर, निशांत जगदीश तंवर पर 3 लाख रुपए जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा कि उसके पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया और कोर्ट को गुमराह किया गया।

Written by Kajal Panchal • Published on : 14 July 2026
IBN24 News Network : मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि अदालत ने सुधार का अवसर दिया था, लेकिन उसके बावजूद निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
कोर्ट ने कहा- आदेशों का खुलेआम उल्लंघन हुआ
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समय रैना ने अदालत के निर्देशों के बावजूद अपने शो में किसी दिव्यांग व्यक्ति को शामिल नहीं किया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अदालत को गुमराह किया गया और उसके आदेशों का खुलेआम उल्लंघन हुआ।
कोर्ट ने तीनों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और निर्देश दिया कि यह राशि दो सप्ताह के भीतर जमा कराई जाए।
किस याचिका पर हुई सुनवाई ?
यह मामला क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका पर आधारित है। संस्था ने आरोप लगाया कि समय रैना के शो में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के खर्च को लेकर असंवेदनशील टिप्पणी की गई और दिव्यांगों का मजाक उड़ाया गया, जिससे उनकी गरिमा को ठेस पहुंची।

संस्था की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि समय रैना ने कोर्ट के निर्देशों के बावजूद किसी भी दिव्यांग व्यक्ति या संस्था से संपर्क नहीं किया और न ही उन्हें अपने कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर दिया।
याचिका में क्या मांग की गई ?
याचिका में मांग की गई है कि दिव्यांगों के सम्मान, गरिमा और अधिकारों का उल्लंघन करने वाले ऑनलाइन कंटेंट के प्रसारण को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और नियम बनाए जाएं।
यह याचिका नवंबर 2025 में दाखिल की गई थी।
2025 में कोर्ट ने दिए थे विशेष निर्देश
साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य स्टैंड-अप कॉमेडियनों को निर्देश दिया था कि वे हर महीने दो शो आयोजित कर दिव्यांगों के इलाज के लिए फंड जुटाएं। साथ ही अदालत ने यह भी कहा था कि इन कार्यक्रमों में दिव्यांग व्यक्तियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाए, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए।
कैसे शुरू हुआ था विवाद ?
यह विवाद फरवरी 2025 में समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ से शुरू हुआ था। शो में गेस्ट जज के रूप में पहुंचे रणवीर अलाहाबादिया द्वारा एक प्रतियोगी से माता-पिता के निजी संबंधों पर आपत्तिजनक सवाल पूछे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।

वीडियो सामने आने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और महाराष्ट्र, असम सहित कई राज्यों में समय रैना, रणवीर अलाहाबादिया तथा अन्य पैनलिस्टों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। शिकायतों में शो में अश्लील और अभद्र सामग्री प्रस्तुत करने के आरोप लगाए गए।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोहराया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है। सार्वजनिक मंच पर बोलने वाले लोगों की सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है। अदालत ने कहा कि लोकप्रियता के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है और सार्वजनिक मंचों पर शालीनता बनाए रखना आवश्यक है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कुछ युवा स्वयं को “बहुत ओवरस्मार्ट” समझते हैं, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ किसी समुदाय या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है।
मामले पर आगे क्या ?
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिव्यांगों की गरिमा और सम्मान की रक्षा से जुड़े व्यापक दिशा-निर्देशों पर सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।
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