America Iran War : मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंचता जा रहा है। अमेरिका ने रविवार को ईरान के 140 ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने सोमवार को कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला करने का दावा किया।

Written by Kajal Panchal • Published on : 13 July 2026
IBN24 News Network : इस बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान के कड़े बयान और रूस के विशेष सैन्य विमान के तेहरान पहुंचने की खबरों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिका ने किन-किन इलाकों में किए हमले ?
अमेरिका ने रविवार को ईरान के कई रणनीतिक सैन्य और लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया। हमले जिन प्रमुख क्षेत्रों में किए गए, उनमें शामिल हैं—
- किश्म (Qeshm)
- सीरिक (Sirik)
- बंदर अब्बास
- जास्क
- बुशेहर
- खोंदाब
- बंदर महशहर
- बेहबहान
- अंदीमेश्क
- देजफुल
- अहवाज
- अबादान
- खुर्रमशहर
अमेरिकी हमलों में मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरान का दावा- कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर किया हमला
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया।

कुवैत में निशाना बने ये सैन्य ठिकाने
IRGC के अनुसार—
- अली अल-सलेम एयरबेस के ईंधन टैंक पर हमला।
- पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया।
- अहमद अल-जाबेर एयरबेस के रडार सिस्टम पर भी हमला किया गया।
बहरीन में भी कार्रवाई का दावा
IRGC ने दावा किया कि बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर भी हमला किया गया, जहां—

- हेलिकॉप्टर मेंटेनेंस सेंटर
- अमेरिकी P-8 विमान का हैंगर
- ड्रोन कमांड एंड कंट्रोल सेंटर
को निशाना बनाया गया।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
‘होर्मुज स्ट्रेट परमाणु बमों से भी ज्यादा अहम’

ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहसिन रेजाई ने कहा कि—
“होर्मुज स्ट्रेट ईरान के लिए कई परमाणु बमों से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसकी हर हाल में रक्षा की जाएगी।”
उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि यदि जरूरत पड़ी तो ईरान इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए किसी भी स्तर तक जा सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट ?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है।
- दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
- खाड़ी देशों से यूरोप और एशिया तक तेल सप्लाई का प्रमुख मार्ग।
- इस रास्ते के बंद होने पर वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
- भारत सहित कई देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट
1. ओमान के पास जहाज पर हमला, 1 भारतीय लापता
ओमान के पास ‘GFS Galaxy’ नामक जहाज पर हुए हमले में 11 भारतीय सवार थे। इनमें से 10 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि एक भारतीय अभी भी लापता है। भारत सरकार ने नागरिक जहाजों पर हमलों की निंदा करते हुए इन्हें तुरंत रोकने की अपील की।
2. अमेरिका का दावा- 300 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर हमला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, पिछले तीन दिनों में अमेरिका ने ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
3. इजराइल ने दक्षिणी लेबनान पर फिर किया हमला
इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के नबातियेह जिले के कफर तेबनित कस्बे में गोलीबारी की। फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है।
4. कुवैत की सीमा चौकियों को नुकसान
कुवैत की सेना ने पुष्टि की कि हालिया हमलों में देश के उत्तरी हिस्से की तीन सीमा चौकियों को नुकसान पहुंचा है।
5. ईरान के वाटर प्रोजेक्ट पर हमला
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, महशहर शहर में एक वाटर प्रोजेक्ट पर प्रोजेक्टाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए।
रूस का ‘डूम्सडे प्लेन’ तेहरान पहुंचा?
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच रूस के विशेष सैन्य विमान Tu-214PU के तेहरान पहुंचने का दावा किया जा रहा है।
इस विमान को रूस का ‘एयरबोर्न कमांड पोस्ट’ या ‘डूम्सडे प्लेन’ भी कहा जाता है।
Tu-214PU की खासियत
- भीषण युद्ध या परमाणु युद्ध जैसी परिस्थितियों के लिए तैयार।
- राष्ट्रपति और शीर्ष सैन्य अधिकारी हवा में रहते हुए भी सेना को आदेश दे सकते हैं।
- अत्याधुनिक एन्क्रिप्टेड संचार प्रणाली।
- अधिकतम गति लगभग 850 किमी प्रति घंटा।
- बिना रुके करीब 6,500 किलोमीटर तक उड़ान भरने में सक्षम।
हालांकि रूस ने अब तक इस उड़ान के उद्देश्य पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
क्या बढ़ सकता है वैश्विक संकट?
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हो रहे हमलों, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ती बयानबाजी, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले के दावों तथा रूस की बढ़ती सक्रियता ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव को और गंभीर बना दिया है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री सुरक्षा और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
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