Karnal Paddy Scam : करनाल जिले की अनाज मंडियों में धान उठान से जुड़े कथित घोटाले की जांच के दौरान एक नया और अहम खुलासा सामने आया है। जीपीएस रिकॉर्ड की पड़ताल में कई ऐसी गाड़ियां चिन्हित हुई हैं, जिनके बारे में कागजों में धान ढोने का दावा किया गया, जबकि डिजिटल रिकॉर्ड के अनुसार वे एक किलोमीटर भी नहीं चलीं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 6 July 2026
IBN24 News Network : इस खुलासे के बाद विभाग ने लगभग 35 प्रतिशत वाहनों से संबंधित भुगतान रोक दिया है, जिसकी अनुमानित राशि करीब 20 करोड़ रुपये बताई जा रही है। पूरे मामले की रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी गई है और अब अंतिम निर्णय उच्च स्तर पर लिया जाएगा।
जीपीएस डेटा ने उठाए कई सवाल
जांच के दौरान अधिकारियों के सामने प्रस्तुत जीपीएस रिकॉर्ड में कई ऐसे वाहन सामने आए, जिनकी मूवमेंट शून्य दर्ज हुई। इसके बावजूद इन वाहनों के जरिए धान उठाने का दावा किया गया था। इस स्थिति ने मंडियों की पूरी लिफ्टिंग प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि वाहन चले ही नहीं, तो रिकॉर्ड में दर्ज धान आखिर मिलों तक कैसे पहुंचा।
ट्रांसपोर्टर्स ने तकनीकी खामी का दिया हवाला
मामले में सवाल उठने के बाद ट्रांसपोर्ट ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपनी प्रस्तुति दी। उनका कहना है कि जीपीएस सिस्टम में तकनीकी समस्याओं के कारण कई वाहनों की वास्तविक लोकेशन रिकॉर्ड नहीं हो सकी और इसी वजह से वे शून्य किलोमीटर चलते दिखाई दिए।

हालांकि सूत्रों के मुताबिक कुछ ट्रांसपोर्टर्स ने उन वाहनों का भुगतान लेने का दावा भी वापस लेना शुरू कर दिया है, जिनकी आवाजाही रिकॉर्ड में नहीं मिली। इससे पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि एसआईटी मंडियों से जारी किए गए आउटर गेट पास का गहराई से सत्यापन करती है, तो पूरे मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जिन वाहनों की मूवमेंट नहीं हुई, उनके नाम पर दर्ज धान वास्तव में किस माध्यम से उठाया गया और वह कहां पहुंचा।
छह एफआईआर दर्ज, पुलिस कर रही विस्तृत जांच
धान उठान मामले में अब तक अलग-अलग थानों में छह एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस विभिन्न पहलुओं की जांच में जुटी हुई है और अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। इस दौरान अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
फर्जी गेट पास और एमएसपी प्रणाली पर सवाल
प्रारंभिक जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि कुछ मामलों में कथित रूप से फर्जी गेट पास तैयार कर कागजों में धान खरीद और उठान दर्शाया गया। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह किसानों को मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। जांच एजेंसियां फर्जी खरीद, फर्जी उठान और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।

45 अधिकारियों और कर्मचारियों पर हो चुकी कार्रवाई
सरकार इस मामले में पहले ही सख्त रुख अपना चुकी है। करनाल में धान खरीद और उठान से जुड़े कथित घोटाले में खरीद एजेंसियों के कर्मचारियों से लेकर मंडी सचिव स्तर तक कई अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। अब तक 45 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है तथा कई लोगों को जेल भी भेजा गया है। धान सीजन समाप्त हुए करीब आठ महीने बीत जाने के बावजूद एसआईटी की जांच लगातार जारी है।
ट्रांसपोर्ट व्यवस्था भी जांच के घेरे में
इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद अभी तक विभाग ने कथित फर्जी उठान के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्टर्स की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं परिवहन व्यवस्था का उपयोग भी अनियमितताओं को अंजाम देने में तो नहीं किया गया।
डीएफएससी मुकेश ने क्या कहा ?
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) मुकेश ने बताया कि ट्रांसपोर्टर्स ने अपनी ओर से तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए विभाग के सामने अपना पक्ष रखा है। पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है और अब आगे की कार्रवाई तथा अंतिम निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा।
सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
धान उठान में सामने आई इन अनियमितताओं ने पूरी खरीद और परिवहन व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर लगभग 20 करोड़ रुपये का भुगतान फिलहाल रोका गया है, वहीं दूसरी ओर जांच लगातार नए पहलुओं की ओर इशारा कर रही है। अब सभी की निगाहें सरकार के अंतिम फैसले पर हैं, जिससे यह तय होगा कि इस मामले में आगे किस स्तर की कार्रवाई की जाएगी।
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