Haryana PG Policy 2026 : हरियाणा सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकारी डॉक्टरों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नई संशोधित नीति के तहत अब सरकारी सेवा में रहते हुए क्लिनिकल विषयों में पोस्टग्रेजुएट (PG) डिग्री प्राप्त करने वाले डॉक्टरों को बॉन्ड भरने की आवश्यकता नहीं होगी। साथ ही, पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें किसी अन्य विभाग में स्थानांतरित नहीं किया जाएगा और वे अपने मूल विभाग में ही सेवाएं देते रहेंगे।

Written by Kajal Panchal • Published on : 3 June 2026
IBN24 News Network : स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यह फैसला राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखने और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को दूर करने के उद्देश्य से लिया गया है।
मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर करने पर फोकस
हरियाणा सरकार ने वर्ष 2022 की उस नीति में संशोधन किया है, जिसके तहत सरकारी डॉक्टरों को सेवा के दौरान पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई के लिए आरक्षण का लाभ दिया जाता है। नई व्यवस्था के अनुसार नॉन-क्लिनिकल और पैरा-क्लिनिकल विषयों में पीजी करने वाले डॉक्टरों को मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग के अंतर्गत संचालित मेडिकल संस्थानों में तीन वर्ष तक शिक्षण कार्य करना होगा।
इस अवधि के बाद डॉक्टरों को विभाग में स्थायी रूप से शामिल होने का विकल्प भी दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में योग्य शिक्षकों की संख्या बढ़ेगी और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
क्लिनिकल स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को मिली विशेष छूट
नई नीति में क्लिनिकल विषयों में पीजी करने वाले डॉक्टरों को विशेष राहत दी गई है। ऐसे डॉक्टरों को हरियाणा सिविल मेडिकल एजुकेशन बॉन्ड भरने की आवश्यकता नहीं होगी। वे अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद सीधे अपने मूल विभाग में वापस जाकर सेवाएं जारी रख सकेंगे।

सरकार का मानना है कि इससे सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बनी रहेगी और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
नए मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के बीच लिया गया फैसला
हरियाणा में हाल के वर्षों में कई नए सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं। इसके चलते एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे विषयों में प्रशिक्षित फैकल्टी की मांग तेजी से बढ़ी है।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के मानकों को पूरा करने और मेडिकल शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार को बड़ी संख्या में योग्य शिक्षकों की आवश्यकता है। इसी जरूरत को देखते हुए नीति में बदलाव किया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा दोनों को मिलेगा लाभ
डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, संशोधित नीति का उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों में बढ़ती फैकल्टी की जरूरत और अस्पतालों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के बीच संतुलन स्थापित करना है।
सरकार को उम्मीद है कि नॉन-क्लिनिकल विशेषज्ञों को शिक्षण संस्थानों में अवसर देने और क्लिनिकल विशेषज्ञों को अस्पतालों में बनाए रखने से मेडिकल शिक्षा और मरीजों की देखभाल दोनों क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी।
क्या होगा फायदा ?
- सरकारी डॉक्टरों को पीजी के बाद बॉन्ड से राहत मिलेगी।
- क्लिनिकल स्पेशलिस्ट अपने मूल विभाग में सेवाएं जारी रख सकेंगे।
- मेडिकल कॉलेजों में योग्य फैकल्टी की संख्या बढ़ेगी।
- सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी नहीं होगी।
- मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।
- नए मेडिकल कॉलेजों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
राज्य सरकार का यह कदम मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में हरियाणा की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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