RBI Plastic Currency : भारत में जल्द ही नोटों का नया दौर शुरू हो सकता है। आपकी जेब में रखे जाने वाले पारंपरिक कागजी नोटों की जगह अब अत्याधुनिक पॉलीमर (Plastic) बैंकनोट भी दिखाई दे सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए पॉलीमर नोटों के लिए ग्लोबल टेंडर (Expression of Interest – EOI) जारी किया है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 18 July 2026
IBN24 News Network : रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो सबसे पहले ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का पायलट ट्रायल शुरू किया जाएगा और सफल परीक्षण के बाद 2027 से पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से इनका विस्तार किया जा सकता है। हालांकि, RBI ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन टेंडर प्रक्रिया ने साफ संकेत दे दिए हैं कि भारत की करेंसी जल्द ही आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रही है।
आखिर क्यों बदल रहा है RBI नोटों का सिस्टम ?
भारत में हर साल करोड़ों कागजी नोट खराब हो जाते हैं। पानी, धूल, नमी और लगातार इस्तेमाल के कारण इनकी लाइफ कम हो जाती है। इससे नए नोट छापने पर सरकार का खर्च भी बढ़ता है।
इसी समस्या का समाधान है पॉलीमर बैंकनोट, जो दुनिया के कई देशों में वर्षों से सफलतापूर्वक इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
₹10 और ₹20 के नोटों से होगी शुरुआत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI सबसे पहले ₹10 और ₹20 के नोटों पर पॉलीमर तकनीक का परीक्षण करेगा।

इस ट्रायल के दौरान जांच होगी कि—
- नोट कितने समय तक चलते हैं।
- भारतीय मौसम में इनकी स्थिति कैसी रहती है।
- लोगों के लिए इन्हें इस्तेमाल करना कितना आसान है।
- बैंकिंग सिस्टम और ATM में इनकी कार्यक्षमता कैसी रहती है।
- नकली नोटों पर रोक लगाने में ये कितने प्रभावी साबित होते हैं।
यदि ट्रायल सफल रहा तो बाद में अन्य मूल्यवर्ग के नोट भी पॉलीमर तकनीक में छापे जा सकते हैं।
RBI ने जारी किया Global Tender

इस परियोजना के लिए RBI की नोट प्रिंटिंग कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने वैश्विक स्तर पर Expression of Interest (EOI) जारी किया है।
टेंडर में दुनिया भर की कंपनियों से Polymer Substrate Sheet की सप्लाई के लिए आवेदन मांगे गए हैं।
टेंडर की मुख्य बातें
- कुल 68,000 रीम पॉलीमर सब्सट्रेट की मांग।
- दो अलग-अलग मूल्यवर्ग के नोटों के लिए 34-34 हजार रीम।
- एक रीम में 500 शीट।
- आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त।
क्या है Polymer Substrate ?

आज के भारतीय नोट कॉटन और लिनेन मिश्रित विशेष कागज पर छपते हैं। जबकि पॉलीमर नोट एक विशेष Biaxially Oriented Polypropylene (BOPP) प्लास्टिक फिल्म पर तैयार किए जाते हैं। यही तकनीक उन्हें सामान्य नोटों से कई गुना अधिक मजबूत बनाती है।
नए नोटों में होंगे हाई-टेक सिक्योरिटी फीचर्स
RBI द्वारा मांगी गई पॉलीमर शीट में कई आधुनिक सुरक्षा फीचर्स होंगे, जिनमें शामिल हैं—
✔ Transparent Window
✔ Portrait Window
✔ Metallic Numeral
✔ Magnetic Pseudo Thread
✔ Shadow Image
✔ Iridescent Pattern
इन फीचर्स की वजह से नकली नोट बनाना लगभग नामुमकिन माना जाता है।
क्या बंद हो जाएंगे पुराने नोट ?
बिल्कुल नहीं।
RBI की योजना के अनुसार—
- पुराने कागजी नोट चलते रहेंगे।
- पॉलीमर और पेपर दोनों नोट बाजार में एक साथ रहेंगे।
- बदलाव धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से होगा।
- किसी भी नोट को अचानक बंद नहीं किया जाएगा।
पॉलीमर नोट क्यों माने जाते हैं बेहतर ?
1. चार गुना तक लंबी लाइफ
पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में 2.5 से 4 गुना अधिक समय तक चलते हैं।
2. पानी से नहीं होंगे खराब
जेब में बारिश हो जाए…
कपड़े धोने में नोट रह जाए…
या पानी में गिर जाए…
फिर भी पॉलीमर नोट आसानी से खराब नहीं होंगे।
3. जल्दी नहीं फटेंगे
इन नोटों को मोड़ना आसान है लेकिन फाड़ना बेहद मुश्किल।
यही वजह है कि ये लंबे समय तक नए जैसे बने रहते हैं।
4. नकली नोटों पर लगेगी लगाम
Transparent Window और Advanced Security Features के कारण इनकी कॉपी बनाना बेहद कठिन होगा।
5. साफ-सफाई भी बेहतर
कागजी नोटों की तुलना में पॉलीमर नोट—
- कम गंदे होते हैं।
- नमी कम पकड़ते हैं।
- बैक्टीरिया कम चिपकते हैं।
पॉलीमर बनाम कागजी नोट
| विशेषता | पॉलीमर नोट | कागजी नोट |
|---|---|---|
| मटेरियल | BOPP प्लास्टिक | कॉटन + लिनेन |
| मजबूती | बहुत ज्यादा | सामान्य |
| पानी | सुरक्षित | खराब हो सकते हैं |
| लाइफ | 2.5–4 गुना ज्यादा | कम |
| सिक्योरिटी | हाई-टेक | सीमित |
| नकली नोट | बनाना बेहद कठिन | अपेक्षाकृत आसान |
| सफाई | बेहतर | जल्दी गंदे |
| शुरुआती लागत | अधिक | कम |
पर्यावरण पर क्या होगा असर ?
अक्सर लोग प्लास्टिक सुनते ही पर्यावरण की चिंता करते हैं।
लेकिन पॉलीमर नोटों को पूरी तरह रिसाइकिल किया जा सकता है और इनसे अन्य प्लास्टिक उत्पाद बनाए जा सकते हैं।
दूसरी ओर कागजी नोट बायोडिग्रेडेबल तो होते हैं, लेकिन उनकी कम लाइफ के कारण बार-बार नए नोट छापने पड़ते हैं, जिससे संसाधनों की खपत बढ़ती है।
दुनिया के किन देशों में चल रहे हैं पॉलीमर नोट ?
भारत अकेला देश नहीं होगा।
दुनिया के कई देशों में यह तकनीक वर्षों से सफल है।
इनमें शामिल हैं—
- 🇦🇺 ऑस्ट्रेलिया
- 🇳🇿 न्यूजीलैंड
- 🇨🇦 कनाडा
- 🇻🇳 वियतनाम
- 🇷🇴 रोमानिया
- 🇧🇳 ब्रुनेई
- 🇵🇬 पापुआ न्यू गिनी
- 🇲🇻 मालदीव
- 🇲🇷 मॉरिटानिया
- 🇳🇮 निकारागुआ
- 🇻🇺 वानुआतु
- 🇹🇹 त्रिनिदाद और टोबैगो
ऑस्ट्रेलिया 1990 में पूरी तरह पॉलीमर नोट अपनाने वाला दुनिया का पहला देश बना था।
क्या होता है Expression of Interest (EOI) ?
EOI एक प्रारंभिक वैश्विक टेंडर प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से RBI दुनिया भर की योग्य कंपनियों से तकनीकी क्षमता, अनुभव और कीमत से जुड़े प्रस्ताव आमंत्रित करता है। इसके बाद चयनित कंपनियों को अंतिम टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।
क्या 2027 से बदल जाएगी भारतीय करेंसी ?
यदि ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का ट्रायल सफल रहता है, तो 2027 से भारत की करेंसी में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध होगी और पुराने कागजी नोट लंबे समय तक नए पॉलीमर नोटों के साथ प्रचलन में बने रहेंगे।
Please also read this article :
Instagram: https://www.instagram.com/ib





