Thalapathy Vijay Government Controversy : तमिलनाडु में नई सरकार बनने के महज एक दिन बाद ही मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay की सरकार विवादों में घिर गई है। शपथ ग्रहण समारोह में राज्य गीत ‘तमिल थाई वाज्थु’ को राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के बाद तीसरे स्थान पर बजाए जाने को लेकर राजनीतिक तकरार शुरू हो गई है। इस मुद्दे ने न सिर्फ विपक्ष बल्कि सरकार को समर्थन दे रही सहयोगी पार्टियों के भीतर भी नाराज़गी पैदा कर दी है। खासतौर पर Communist Party of India ने इसे तमिलनाडु की परंपरा और तमिल अस्मिता के खिलाफ बताते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया है।

CM बनने के 24 घंटे के भीतर ही विवादों में घिरी विजय सरकार, ‘तमिल थाई वाज्थु’ को तीसरे नंबर पर बजाने पर सहयोगी CPI ने उठाए सवाल, TVK ने भी झाड़ा पल्ला
Written by Kajal Panchal • Published on : 11 May 2026
IBN24 News Network : दरअसल, तमिलनाडु में लंबे समय से सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत राज्य गीत ‘तमिल थाई वाज्थु’ से होती रही है और समापन राष्ट्रगान के साथ किया जाता है। लेकिन विजय सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में पहले ‘वंदे मातरम्’, फिर राष्ट्रगान और आखिर में राज्य गीत बजाया गया। यही क्रम विवाद की वजह बन गया। राजनीतिक दलों और तमिल संगठनों ने सवाल उठाया कि जिस गीत को तमिल पहचान का प्रतीक माना जाता है, उसे आखिर तीसरे स्थान पर क्यों रखा गया।
CPI ने कहा- परंपरा तोड़ी गई
सरकार को समर्थन देने वाली CPI के राज्य सचिव M. Veerapandian ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने बयान जारी कर कहा कि यह तमिलनाडु की स्थापित परंपरा का उल्लंघन है।
उन्होंने मांग की कि सरकार जनता को बताए कि इस फैसले के लिए जिम्मेदार कौन था। साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में सभी सरकारी कार्यक्रमों में पहले ‘तमिल थाई वाज्थु’ और अंत में राष्ट्रगान ही बजाया जाना चाहिए।
‘वंदे मातरम्’ पर भी उठे वैचारिक सवाल

सीपीआई ने इस विवाद को सिर्फ प्रोटोकॉल का मामला नहीं बल्कि वैचारिक मुद्दा भी बताया। पार्टी का कहना है कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय ही यह बहस हो चुकी थी कि ‘वंदे मातरम्’ का धार्मिक संदर्भ इसे सर्वस्वीकार्य राष्ट्रगान बनने से रोकता है।
इसी आधार पर CPI नेताओं ने आरोप लगाया कि शपथ समारोह में गीतों का क्रम बदलना केवल प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी माना जा सकता है।
विवाद बढ़ते ही TVK ने बनाई दूरी
विवाद तेज होने के बाद Tamilaga Vettri Kazhagam ने खुद को इस फैसले से अलग कर लिया। पार्टी नेताओं ने साफ कहा कि वे राज्य गीत को तीसरे नंबर पर बजाने के पक्ष में नहीं हैं।

मंत्री Aadhav Arjuna ने कहा कि तमिलनाडु की परंपरा में हमेशा कार्यक्रम की शुरुआत तमिल प्रार्थना गीत से होती रही है और यही सही व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इसी परंपरा का पालन किया जाएगा।
राजभवन के निर्देशों का दिया गया हवाला
टीवीके नेताओं का कहना है कि शपथ ग्रहण समारोह में अपनाया गया क्रम केंद्र सरकार के नए सर्कुलर और राजभवन के निर्देशों के तहत तय किया गया था। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इस “नई व्यवस्था” को जारी नहीं रखा जाएगा।
पार्टी ने भरोसा दिलाया कि आगे सभी सरकारी कार्यक्रमों में पहले ‘तमिल थाई वाज्थु’ और अंत में राष्ट्रगान ही होगा।
सरकार बनने के साथ ही राजनीतिक संदेश ?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय सरकार के सामने यह पहला बड़ा राजनीतिक संकेत है कि सहयोगी दल तमिल पहचान और क्षेत्रीय भावनाओं से जुड़े मुद्दों पर किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं।
ऐसे में मुख्यमंत्री विजय के लिए सत्ता संभालने के साथ-साथ गठबंधन की संवेदनशील राजनीति को संतुलित रखना भी बड़ी चुनौती बनने जा रहा है।
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