Political turmoil intensifies over government formation in Tamil Nadu : कांग्रेस, CPI, CPI(M) और VCK के समर्थन के बाद विजय बहुमत के आंकड़े के करीब

Tamil Nadu Political Twist LIVE : कांग्रेस-वाम दलों के समर्थन से बहुमत के करीब पहुंचे विजय, शाम 6 बजे राज्यपाल से मिलेंगे TVK प्रमुखतमिलनाडु की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जारी असमंजस अब एक निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) अब सरकार बनाने के बेहद करीब पहुंच गई है। कांग्रेस, CPI, CPI(M) और वीसीके के समर्थन के बाद विधानसभा में पार्टी का आंकड़ा बहुमत के जादुई नंबर तक पहुंचता दिख रहा है।IBN24 News Network
Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026
Tamil Nadu Political Twist LIVE : सूत्रों के मुताबिक, TVK प्रमुख विजय शुक्रवार शाम 6 बजे राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात करेंगे और सरकार बनाने का दावा दोबारा पेश कर सकते हैं। इस बैठक पर पूरे तमिलनाडु की नजर टिकी हुई है। 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत है। चुनाव परिणामों में TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसके पास 107 विधायक थे। शुरुआत में बहुमत से दूर दिख रही विजय की पार्टी को अब विपक्षी दलों का साथ मिल गया है।
कांग्रेस के 5 विधायक, CPI और CPI(M) के 2-2 विधायक तथा VCK के 2 विधायकों ने TVK को समर्थन देने का फैसला किया। इसके बाद विजय के समर्थन में कुल संख्या 118 तक पहुंच गई, जो सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह समर्थन तमिलनाडु की सत्ता की तस्वीर पूरी तरह बदल सकता है।
राज्यपाल के फैसले से बढ़ा विवाद
एक दिन पहले तक स्थिति बिल्कुल अलग थी। राज्यपाल ने विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने से इनकार कर दिया था। राजभवन की ओर से कहा गया था कि TVK पर्याप्त समर्थन दिखाने में असफल रही है।

इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति गरमा गई। विपक्षी दलों ने भाजपा और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस और वाम दलों ने कहा कि संवैधानिक परंपरा के तहत सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए था।
TVK समर्थकों ने भी राजभवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और राज्यपाल के फैसले को “लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ” बताया।
खड़गे की एंट्री से बदले हालात
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने खुद वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन से बातचीत की और विजय को समर्थन देने की अपील की। इसके बाद तमिलनाडु में विपक्षी दलों के बीच तेज राजनीतिक गतिविधियां शुरू हो गईं।

जल्द ही CPI और CPI(M) की बैठकों में भी TVK को समर्थन देने पर सहमति बन गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल विजय को समर्थन देने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका मकसद भाजपा और राज्यपाल पर दबाव बनाना भी था।
इसी के बाद तमिलनाडु की राजनीति में अचानक सत्ता का समीकरण बदल गया।
समर्थन के साथ सख्त संदेश भी
हालांकि विजय को समर्थन मिल गया है, लेकिन सहयोगी दलों ने उन्हें खुली चेतावनी भी दी है। वीसीके नेता सिंथानई सेल्वन ने भाजपा पर लोकतांत्रिक संस्थाओं का इस्तेमाल कर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने विजय की राजनीतिक शैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद विजय को व्यक्तिगत रूप से सहयोगी दलों से संपर्क करना चाहिए था। केवल व्हाट्सऐप संदेश भेजकर समर्थन मांगना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। सेल्वन ने यह भी आरोप लगाया कि विजय के आसपास मौजूद कुछ नेता उन्हें बाकी दलों से दूर कर रहे हैं।
फिर चर्चा में आई ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’
तमिलनाडु में एक बार फिर “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” की चर्चा तेज हो गई है। खबरें हैं कि TVK ने अपने विधायकों को एक सुरक्षित स्थान पर रखा है ताकि किसी तरह की तोड़फोड़ या राजनीतिक दबाव से बचा जा सके। हालांकि पार्टी ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में विधायकों की सुरक्षा और एकजुटता सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
वहीँ कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि सबसे बड़ी पार्टी बहुमत का दावा कर रही है, तो उसे विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र और कर्नाटक के पुराने उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी कई सरकारें शपथ लेने के बाद सदन में बहुमत साबित करती रही हैं। ऐसे में तमिलनाडु में अलग प्रक्रिया अपनाना सवाल खड़े करता है। विपक्षी दलों का भी यही कहना है कि बहुमत का परीक्षण राजभवन में नहीं बल्कि विधानसभा में होना चाहिए।
शाम 6 बजे की बैठक पर सबकी नजर
अब तमिलनाडु की राजनीति की सबसे अहम घड़ी शाम 6 बजे मानी जा रही है, जब विजय राज्यपाल से मुलाकात करेंगे।

यदि राज्यपाल उन्हें सरकार बनाने का न्योता देते हैं, तो जल्द ही फ्लोर टेस्ट की तारीख भी तय हो सकती है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय अब मुख्यमंत्री पद की दहलीज पर खड़े नजर आ रहे हैं। लेकिन तमिलनाडु की सत्ता का अंतिम फैसला अब राजभवन और विधानसभा की अगली कार्रवाई तय करेगी।
BJP ने क्या कहा?
वहीं भाजपा ने राज्यपाल के फैसले का बचाव किया है। पार्टी प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने कहा कि राज्यपाल पूरी तरह संवैधानिक नियमों के तहत काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समर्थन देने वाले दल औपचारिक रूप से विजय के पक्ष में दस्तावेज पेश करते हैं, तो स्थिर सरकार बनने का रास्ता साफ हो सकता है।भाजपा का कहना है कि इस पूरे मामले को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
DMK अभी भी मैदान में
हालांकि विजय बहुमत के करीब पहुंच गए हैं, लेकिन DMK अभी पूरी तरह पीछे हटती नहीं दिख रही। सूत्रों के मुताबिक, निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपने सहयोगी दलों से गठबंधन में बने रहने की अपील की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तमिलनाडु की राजनीति में आखिरी क्षण तक समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में सरकार गठन की प्रक्रिया अभी पूरी तरह खत्म नहीं मानी जा सकती।
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