Stray Dogs Removal Order : देशभर में बढ़ते डॉग बाइट और आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा और सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने अपने 7 नवंबर 2025 के उस आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया, जिसमें स्कूल, अस्पताल, कॉलेज, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक संस्थानों से स्ट्रे डॉग्स हटाने का निर्देश दिया गया था।

Written by Kajal Panchal • Published on : 19 May 2026
IBN24 News Network : सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि वह “जमीनी हकीकत से आंखें बंद नहीं कर सकता।” कोर्ट के मुताबिक देश में आवारा कुत्तों के हमले अब गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा संकट बन चुके हैं और सबसे ज्यादा खतरा बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों को है।
तीन जजों की बेंच ने कहा कि कई मामलों में छोटे बच्चों को कुत्तों ने बुरी तरह नोचा, बुजुर्गों पर हमला हुआ और विदेशी पर्यटक भी डॉग अटैक का शिकार बने। कोर्ट ने माना कि ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और इससे साफ है कि प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चूक हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम Court ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को सुरक्षित माहौल में सार्वजनिक स्थानों पर आने-जाने का अधिकार है।

कोर्ट ने कहा “हर नागरिक को बिना डर के सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचने और स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार है। लोगों को इस भय में नहीं जीना चाहिए कि कहीं भी कुत्ते हमला कर सकते हैं।”
बेंच ने आगे कहा कि राज्य सरकारें और स्थानीय निकाय “मूकदर्शक” बनकर नहीं बैठ सकते, जबकि लोगों की जान को टाला जा सकने वाला खतरा लगातार बढ़ रहा हो।
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया था ?
7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक आदेश देते हुए राज्यों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया था कि:
- स्कूलों, अस्पतालों, कॉलेजों और एजुकेशनल कैंपस से आवारा कुत्तों को हटाया जाए
- स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों से भी स्ट्रे डॉग्स हटाए जाएं
- नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद कुत्तों को उसी जगह दोबारा छोड़ने पर रोक लगाई जाए
- हटाए गए कुत्तों को निर्धारित शेल्टर होम में रखा जाए
कोर्ट ने यह भी कहा था कि हाई फुटफॉल एरिया में Animal Birth Control (ABC) Rules के तहत लागू “Capture-Sterilise-Vaccinate-Release” यानी CSVR मॉडल लागू नहीं होगा।
इस मॉडल के तहत पहले आवारा कुत्तों को पकड़ा जाता था, फिर उनकी नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद उन्हें उसी इलाके में छोड़ दिया जाता था। सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक संस्थानों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
आदेश बदलने की मांग वाली याचिकाएं खारिज
मंगलवार को कोर्ट ने उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें नवंबर 2025 के आदेश में बदलाव या नरमी की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद कुत्तों को वापस छोड़ा जा सके, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
बेंच ने दो टूक कहा कि सार्वजनिक जगहों से हटाए गए कुत्तों को दोबारा वहीं नहीं छोड़ा जा सकता और उन्हें शेल्टर में ही रखा जाएगा।
“Survival of the Fittest” जैसी स्थिति पैदा हो गई
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा हालात में “Darwinian principle of survival of the fittest” यानी “ताकतवर ही बचेगा” जैसी स्थिति बन गई है।
कोर्ट ने कहा कि बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर लोग खुद को बचाने के लिए अकेले छोड़ दिए गए हैं, जबकि सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
एयरपोर्ट और रिहायशी इलाकों तक पहुंचा खतरा
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आवारा कुत्तों का खतरा अब सिर्फ गलियों या सड़कों तक सीमित नहीं है।
बेंच ने कहा कि डॉग बाइट की घटनाएं अब एयरपोर्ट, रिहायशी कॉलोनियों और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच चुकी हैं। इससे साफ है कि पहले दिए गए निर्देशों के पालन में गंभीर कमियां हैं।
कोर्ट ने राज्यों को क्या संदेश दिया ?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारों का पहला कर्तव्य लोगों की सुरक्षा करना है। कोर्ट ने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों को डर के माहौल में नहीं छोड़ा जा सकता। अगर कानून और व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करना राज्यों की जिम्मेदारी है।
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