Haryana Mental Health Program : हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में पढ़ने वाले मानसिक तनाव (स्ट्रेस) से जूझ रहे छात्रों के लिए बड़ी राहत की पहल की गई है। अब कॉलेजों में ऐसे विद्यार्थियों की समय रहते पहचान कर उन्हें काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी छात्र में गंभीर मानसिक तनाव या अवसाद (डिप्रेशन) के लक्षण पाए जाते हैं, तो उसे विशेषज्ञ मनोचिकित्सक (साइकेट्रिस्ट) के पास इलाज के लिए भेजा जाएगा।

उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए राज्य के सभी सरकारी कॉलेजों में ‘मेंटल हेल्थ एंड वेल-बीइंग ऑफ स्टूडेंट्स’ कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना, उन्हें भावनात्मक सहयोग देना और आत्महत्या जैसे गंभीर कदमों की आशंका को समय रहते रोकना है।
प्रिंसिपल और प्रोफेसर बनेंगे मास्टर ट्रेनर
इस कार्यक्रम के तहत सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपल और प्रोफेसरों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद यही मास्टर ट्रेनर अपने-अपने कॉलेजों में अन्य शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करेंगे, ताकि अधिक से अधिक शिक्षक मानसिक तनाव से जूझ रहे छात्रों की पहचान कर उनकी मदद कर सकें।

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेशों के अनुसार, यह दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (HIPA), गुरुग्राम में आयोजित किया जाएगा। पहले बैच का प्रशिक्षण अब 7 और 8 जुलाई को होगा, जबकि दूसरा बैच 9 और 10 जुलाई को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाएगा।
गंभीर मामलों में साइकेट्रिस्ट से कराया जाएगा इलाज
यदि किसी छात्र में गंभीर मानसिक तनाव, अवसाद या अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के संकेत मिलते हैं, तो उसे विशेषज्ञ मनोचिकित्सक के पास रेफर किया जाएगा। विभाग का मानना है कि समय पर पहचान और उचित उपचार से छात्रों को गंभीर मानसिक समस्याओं से बचाया जा सकता है।
प्रोफेसरों को सिखाया जाएगा दोस्ताना व्यवहार
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को केवल मानसिक तनाव की पहचान ही नहीं, बल्कि छात्रों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने की भी ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें सिखाया जाएगा कि वे छात्रों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनें, उनके साथ दोस्ताना व्यवहार रखें और ऐसा सकारात्मक माहौल तैयार करें, जिससे छात्र बिना झिझक अपनी परेशानियां साझा कर सकें।

इसके अलावा शिक्षकों को काउंसलिंग की शुरुआती तकनीक, संवाद कौशल और मानसिक तनाव के शुरुआती संकेतों को पहचानने का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कॉलेजों में आगे बढ़ेगा प्रशिक्षण अभियान
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मास्टर ट्रेनर अपने-अपने कॉलेजों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। इसके बाद कॉलेज स्तर पर मानसिक तनाव से जूझ रहे छात्रों की पहचान कर उन्हें आवश्यक काउंसलिंग और विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि समय पर हस्तक्षेप से छात्रों में बढ़ रही नकारात्मक सोच, अवसाद और आत्महत्या जैसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
पढ़ाई और करियर का बढ़ता दबाव बना चिंता का कारण
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में छात्रों में मानसिक तनाव और आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। इसके पीछे पढ़ाई का बढ़ता दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, करियर को लेकर अनिश्चितता और सामाजिक परिस्थितियां प्रमुख कारण मानी जा रही हैं।
इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए हरियाणा सरकार ने पहली बार राज्य स्तर पर सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपलों और प्रोफेसरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है, ताकि शिक्षकों की मदद से छात्रों तक समय पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता पहुंचाई जा सके।
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