Guest Teacher Regularization : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे गेस्ट टीचरों और लेक्चररों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2014 की रेगुलराइजेशन पॉलिसी के तहत करीब 12,700 गेस्ट टीचरों की सेवाएं नियमित की जाएं और उन्हें नौकरी से जुड़े सभी लाभ प्रदान किए जाएं।

हरियाणा के 12,700 गेस्ट टीचरों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 2 महीने में नियमित करने के आदेश; कोर्ट बोला- यह बैकडोर भर्ती नहीं थी
Written by Kajal Panchal • Published on : 27 May 2026
IBN24 News Network : हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि इन शिक्षकों की नियुक्ति किसी “बैकडोर एंट्री” के जरिए नहीं हुई थी। उनकी भर्ती विधिवत विज्ञापन, मेरिट और चयन प्रक्रिया के बाद की गई थी। ऐसे में करीब दो दशक तक लगातार सेवाएं लेने के बाद उन्हें केवल अस्थायी कर्मचारी बताना उचित नहीं माना जा सकता।
2 महीने में कार्रवाई के निर्देश
यह मामला सुखविंदर सिंह और अन्य गेस्ट टीचरों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि उनकी सेवाओं को नियमित किया जाए, क्योंकि वे वर्षों से सरकारी स्कूलों में कार्यरत हैं।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को दो महीने के भीतर सेवाएं नियमित करने और संबंधित शिक्षकों को सभी सेवा लाभ देने के आदेश दिए हैं।
2005-06 में हुई थी नियुक्तियां

सरकार ने क्या कहा ?
राज्य सरकार ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इन शिक्षकों की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी। सरकार का तर्क था कि वे नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे, इसलिए उन्हें नियमित करने का अधिकार नहीं बनता।
हालांकि हाईकोर्ट ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
हाईकोर्ट ने सरकार के तर्क को क्यों खारिज किया ?
अदालत ने कहा कि यदि सरकार की इस दलील को मान लिया जाए तो नियमितीकरण नीति का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि संविदा और गेस्ट कर्मचारी स्वाभाविक रूप से नियमित भर्ती प्रक्रिया से अलग व्यवस्था में नियुक्त किए जाते हैं, इसलिए इस आधार पर उन्हें नियमितीकरण से वंचित नहीं किया जा सकता।
“20 साल तक सेवा लेकर अस्थायी नहीं कह सकते”
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राज्य सरकार खुद यह मान चुकी है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी थी, जिसके चलते इन शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी।
अदालत ने टिप्पणी की कि लगभग 20 वर्षों तक लगातार सेवाएं लेने के बाद अब इन्हें “स्टॉप गैप अरेंजमेंट” कहना पूरी तरह विरोधाभासी और अनुचित है।
शिक्षकों की भूमिका पर अदालत की अहम टिप्पणी
फैसले में अदालत ने शिक्षकों की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं और उन्हें जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर बाद में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक संविदा पर कार्य लेने के बाद सरकार अब यह नहीं कह सकती कि ये केवल अस्थायी कर्मचारी थे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी जिक्र
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के “मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य” मामले का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि सर्वोच्च अदालत पहले ही वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति की वैधता को बरकरार रख चुकी है।
ऐसे में अब इस नीति की वैधता पर कोई विवाद नहीं बचता और याचिकाकर्ता इसके लिए जरूरी शर्तों को पूरा करते हैं।
गेस्ट टीचरों ने फैसले को बताया सम्मान की जीत
प्रदेश में करीब 12,700 गेस्ट टीचर पिछले लगभग 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद गेस्ट टीचरों में खुशी का माहौल है। संगठन ने इसे “सम्मान और संघर्ष की जीत” बताया है।
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