Mountaineer Narendra Yadav : हरियाणा के रेवाड़ी जिले के छोटे से गांव नेहरूगढ़ के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही नरेंद्र सिंह यादव अब उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची ज्वालामुखीय चोटी माउंट पिको डी ओरिजाबा पर तिरंगा फहराने की तैयारी में हैं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 27 May 2026
IBN24 News Network : सेवन समिट्स पूरा कर चुके नरेंद्र यादव मेक्सिको में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय अभियान का नेतृत्व करेंगे। वे 26 मई को भारत से रवाना हो चुके हैं और अगले सात दिनों तक चलने वाले इस मिशन में कई देशों के अनुभवी पर्वतारोही हिस्सा लेंगे।
18,491 फीट ऊंची चोटी, माइनस 20 डिग्री तापमान
माउंट पिको डी ओरिजाबा समुद्र तल से 5,636 मीटर यानी 18,491 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची ज्वालामुखीय चोटी मानी जाती है। पर्वतारोहियों के लिए यह मिशन बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां तापमान माइनस 20 डिग्री तक गिर जाता है और तेज बर्फीली हवाएं लगातार मुश्किलें बढ़ाती हैं।

नरेंद्र यादव के अनुसार, इस अभियान में ऑक्सीजन की भारी कमी, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, फिसलन भरे ग्लेशियर और खड़ी बर्फीली ढलानों का सामना करना पड़ता है। छोटी सी गलती भी जानलेवा साबित हो सकती है।
जमापा ग्लेशियर रूट से होगी चढ़ाई
नरेंद्र यादव की टीम पिएद्रा ग्रांडे रिफ्यूज से जमापा ग्लेशियर रूट के जरिए शिखर तक पहुंचेगी। यह रास्ता तकनीकी रूप से बेहद कठिन माना जाता है और इसे पूरा करने में लगभग सात से आठ घंटे लगते हैं।
इस दौरान पर्वतारोहियों को क्रैम्पोन, आइस एक्स और रस्सियों की मदद से 40 से 60 डिग्री तक की बर्फीली ढलानों पर आगे बढ़ना होगा। व्हाइट आउट कंडीशन, ब्लैक आइस और हिमस्खलन का खतरा इस मिशन को और ज्यादा जोखिमपूर्ण बना देता है।
फ्रॉस्टबाइट के बाद भी नहीं टूटा हौसला
नरेंद्र यादव की कहानी संघर्ष और जज्बे की मिसाल है। करीब पांच साल पहले पर्वतारोहण के दौरान वे फ्रॉस्टबाइट का शिकार हो गए थे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों ने उनके पैर काटने तक की सलाह दे दी थी।
करीब दो साल तक इलाज चला। आज भी उनके पैरों की उंगलियां पूरी तरह मुड़ नहीं पातीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दुनिया की सातों महाद्वीपीय सर्वोच्च चोटियों को फतह कर इतिहास रच दिया।
23 विश्व रिकॉर्ड कर चुके अपने नाम

संतोष यादव से मिली प्रेरणा
नरेंद्र यादव ने बताया कि उनकी मौसेरी बहन पद्मश्री संतोष यादव से उन्हें पर्वतारोहण की प्रेरणा मिली। संतोष यादव दुनिया की पहली महिला हैं जिन्होंने माउंट एवरेस्ट को दो बार फतह किया था।
उनकी उपलब्धियों ने नरेंद्र को बचपन से ही बड़े सपने देखने और कठिन चुनौतियों को स्वीकार करने की प्रेरणा दी।
सेना परिवार से रखते हैं ताल्लुक
30 वर्षीय नरेंद्र यादव के पिता कृष्ण कुमार भारतीय सेना की 17 राजपूत रेजिमेंट से सूबेदार पद से रिटायर हुए हैं। उनकी माता रोशनी देवी गृहिणी हैं। बड़े भाई सतपाल हरियाणा पुलिस में हवलदार हैं और फिलहाल गुरुग्राम में तैनात हैं। नरेंद्र की पत्नी ज्योति यादव कंप्यूटर इंजीनियर हैं।
“रन फॉर राम” अभियान से भी जुड़े
पर्वतारोहण के अलावा नरेंद्र यादव “रन फॉर राम” नाम से विशेष अल्ट्रा मैराथन अभियान भी चला रहे हैं। इस अभियान के तहत वे देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों से अयोध्या तक हजारों किलोमीटर की दौड़ पूरी कर चुके हैं।
अब तक वे रामेश्वरम, सोमनाथ और बूढ़ा अमरनाथ से अयोध्या तक कुल 6211 किलोमीटर दौड़ चुके हैं। उनकी अंतिम दौड़ जनवरी 2026 में अरुणाचल प्रदेश के परशुराम कुंड से अयोध्या तक होगी।
अब एक्सप्लोरर्स ग्रैंड स्लैम पर नजर
नरेंद्र यादव का अगला लक्ष्य “एक्सप्लोरर्स ग्रैंड स्लैम” पूरा करना है। इसमें सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों के साथ उत्तर और दक्षिण ध्रुव तक पहुंचना शामिल है।
इसके अलावा वे सातों महाद्वीपों के प्रमुख ज्वालामुखीय पर्वतों पर भी तिरंगा फहराने की तैयारी कर रहे हैं।
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