Ebola Virus Alert : दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे इबोला वायरस के मामलों के बीच भारत में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर युगांडा से पहुंची 28 वर्षीय महिला को एहतियातन आइसोलेशन में रखा गया है। महिला के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि केंद्र सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल भारत में इबोला का कोई भी पुष्ट मामला सामने नहीं आया है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 27 May 2026
IBN24 News Network : स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक महिला 23 मई को युगांडा से बेंगलुरु पहुंची थी। एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग के दौरान उसमें थकान और शरीर दर्द जैसे हल्के लक्षण दिखाई दिए। इसके बाद एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसके सैंपल लिए और उसे निगरानी में रखा।
सूत्रों के अनुसार महिला पहले शहर के एक होटल में रुकी थी, लेकिन बाद में उसे इंदिरानगर स्थित सरकारी महामारी रोग अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। फिलहाल वह डॉक्टरों की निगरानी में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती है।
पुणे लैब भेजे गए सैंपल

महिला के सैंपल पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। जरूरत पड़ने पर दोबारा टेस्ट भी किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार महिला की हालत अभी स्थिर है और उसमें गंभीर लक्षण नहीं पाए गए हैं।
भारत सरकार ने क्या कहा ?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि भारत में अभी तक इबोला वायरस का कोई कन्फर्म केस नहीं मिला है। मंत्रालय ने बताया कि WHO के दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं और राज्यों के साथ मिलकर निगरानी रखी जा रही है।
सरकार ने यह भी कहा कि एयरपोर्ट्स और सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
जागरूकता और बचाव ही सबसे बड़ा हथियार
इबोला वायरस रोग पहली बार वर्ष 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। यह एक गंभीर एवं जानलेवा वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के रक्त एवं अन्य शारीरिक द्रवों के संपर्क से फैलती है। लक्षण आने से पहले मरीज संक्रमण नहीं फैलाता, लेकिन जब तक शरीर में वायरस मौजूद रहता है तब तक संक्रमण का खतरा बना रहता है।

इस बीमारी का ऊष्मायन काल सामान्यतः 2 से 21 दिनों तक हो सकता है। संक्रमण की पुष्टि RT-PCR, ELISA तथा अन्य विशेष लैब जांचों द्वारा की जाती है।
करनाल सिविल हॉस्पिटल से माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. पारुल ने कहा कि इबोला के मरीजों में समय पर उपचार, पर्याप्त पोषण, दर्द का सही प्रबंधन तथा सह-संक्रमणों जैसे मलेरिया का इलाज बहुत महत्वपूर्ण होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा Ansuvimab एवं Inmazeb जैसी मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवाओं के उपयोग की सिफारिश की गई है।
इबोला से ठीक हो चुके पुरुषों के वीर्य में वायरस लंबे समय तक मौजूद रह सकता है, इसलिए सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाना आवश्यक है। बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से बचना, मरीज को अलग उपचार केंद्र में रखना, सुरक्षित अंतिम संस्कार करना तथा संपर्क में आए लोगों की निगरानी जरूरी है। साथ ही संक्रमित जंगली जानवरों एवं उनके कच्चे मांस के सेवन से बचना चाहिए।
जन-जागरूकता, स्वच्छता एवं सही जानकारी ही इबोला जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
क्यों बढ़ा इबोला का खतरा ?
हाल ही में अफ्रीकी देशों, खासकर युगांडा और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इसको लेकर वैश्विक चिंता जताई है।
इसी वजह से भारत समेत कई देशों ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की स्क्रीनिंग और हेल्थ सर्विलांस को सख्त कर दिया है।
क्या होता है इबोला वायरस ?

इबोला वायरस डिजीज (EVD) एक गंभीर और जानलेवा वायरल बीमारी है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ, संक्रमित जानवरों या दूषित सतहों के संपर्क से फैलता है।
इबोला के सामान्य लक्षण
- तेज बुखार
- शरीर दर्द और कमजोरी
- सिरदर्द
- गले में खराश
- उल्टी और दस्त
- गंभीर मामलों में ब्लीडिंग
विशेषज्ञों के अनुसार समय पर पहचान और आइसोलेशन से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।
कर्नाटक सरकार ने जारी की एडवाइजरी
कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने इबोला प्रभावित देशों से लौटने वाले यात्रियों को 21 दिनों तक सेल्फ मॉनिटरिंग करने की सलाह दी है। किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल में रिपोर्ट करने को कहा गया है।
बेंगलुरु में राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट डिजीज को आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है, जबकि इंदिरानगर स्थित महामारी रोग अस्पताल को क्वारंटाइन और इलाज केंद्र के रूप में तैयार किया गया है।
क्या भारत में बढ़ गया है खतरा ?
फिलहाल भारत में इबोला का कोई पुष्टि किया गया मामला नहीं है, लेकिन अफ्रीकी देशों में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सरकार पूरी तरह सतर्क है। एयरपोर्ट स्क्रीनिंग, आइसोलेशन और लैब टेस्ट जैसी व्यवस्थाएं इसी सतर्कता का हिस्सा हैं, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।
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