Archana Gupta Controversy : हरियाणा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के एक बयान को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक और पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रो. संपत सिंह ने हिसार के पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर अर्चना गुप्ता के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 17 August 2026
IBN24 NEWS NETWORK : संपत सिंह का आरोप है कि 11 अगस्त को पानीपत में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. अर्चना गुप्ता ने जाट समुदाय को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिससे समाज में रोष पैदा हुआ है। उनका कहना है कि बयान से जाट और गैर-जाट समुदायों के बीच तनाव बढ़ सकता है और सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
वहीं, डॉ. अर्चना गुप्ता ने अपने बयान को लेकर स्पष्टीकरण भी दिया था। इससे पहले जून 2026 में भी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि भाजपा किसी व्यक्ति, परिवार या विशेष वर्ग की पार्टी नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के संगठन के रूप में काम करती है।
संपत सिंह ने पुलिस को क्या शिकायत दी ?
प्रो. संपत सिंह ने हिसार SP को दी शिकायत में कहा है कि 11 अगस्त को पानीपत में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. अर्चना गुप्ता ने जाट समुदाय को अपमानित करने, नीचा दिखाने और बदनाम करने वाली टिप्पणी की।
शिकायत के अनुसार, संपत सिंह का आरोप है कि इस तरह की टिप्पणी का उद्देश्य जाट और गैर-जाट समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करना और हरियाणा में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना था। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और डॉ. अर्चना गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है।
BNS की इन धाराओं में FIR की मांग
संपत सिंह ने अपनी शिकायत में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 196, 197 और 356 की उपधाराओं 3 और 4 के तहत कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में संबंधित वीडियो और बयान की जांच करने का भी अनुरोध किया गया है। हालांकि, FIR दर्ज करने और धाराएं लगाने पर अंतिम फैसला पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
‘विशेष वर्ग’ बताकर INLD नेताओं का नाम लेने का आरोप
संपत सिंह का आरोप है कि डॉ. अर्चना गुप्ता ने अपने बयान में जाट समुदाय को ‘विशेष वर्ग’ के रूप में बताया और इस संदर्भ में पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला तथा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नाम भी लिया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जाट समुदाय से जुड़े लोगों के लिए बिचौलिये, दलाल और लुटेरे जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इन आरोपों के बाद ही मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है।
सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप
संपत सिंह ने शिकायत में कहा कि हरियाणा में जाट समुदाय की आबादी करीब 22 प्रतिशत है। उनके अनुसार, इस तरह की टिप्पणी से समुदाय के लोगों में रोष पैदा हुआ है। उन्होंने पुलिस से कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए FIR दर्ज करना जरूरी है। साथ ही, उन्होंने डॉ. अर्चना गुप्ता और बयान से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच करने की मांग की है।
सोशल मीडिया से वीडियो हटाने की मांग
संपत सिंह ने पुलिस को प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़े वीडियो भी उपलब्ध कराने की बात कही है। उनकी मांग है कि समाचार चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद संबंधित वीडियो और कंटेंट को हटवाया जाए। उनका तर्क है कि वीडियो के लगातार शेयर होने से विवाद और आगे बढ़ सकता है। अब पुलिस शिकायत पर क्या कार्रवाई करती है, इस पर नजर बनी हुई है।
अर्चना गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा था ?
विवाद की शुरुआत पानीपत में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बयान से हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डॉ. अर्चना गुप्ता ने पिछली हुड्डा और इनेलो सरकारों के दौरान एक विशेष वर्ग के लोगों के प्रभाव का जिक्र किया था।
उन्होंने कहा था कि उस समय कुछ लोग सुबह-सुबह कलफ लगे कुर्ते-पायजामे पहनकर लघु सचिवालय पहुंच जाते थे। उनके अनुसार, ऐसे लोग बिचौलियों और दलालों के तौर पर काम करते थे तथा सरकारी कामों में ‘सेटिंग’ कराने की भूमिका निभाते थे। हालांकि, इस बयान को लेकर संपत सिंह और अन्य नेताओं ने आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि यह टिप्पणी जाट समुदाय को निशाना बनाती है।
भाजपा सरकार में पारदर्शी भर्ती का दावा
डॉ. अर्चना गुप्ता ने अपने बयान में भाजपा सरकार की भर्ती प्रक्रिया का भी जिक्र किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पिछली सरकारों के दौरान सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार होता था। उनके अनुसार, लोगों को नौकरी पाने के लिए जमीन, घर या मां के जेवर तक बेचने पड़ते थे।
वहीं, उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार के आने के बाद भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाई गई है। उन्होंने कहा था कि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई है और अब किसी विशेष वर्ग के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
‘कुर्ते-पायजामे खूंटियों पर टंग गए’ वाला बयान
डॉ. अर्चना गुप्ता ने यह भी कहा था कि भाजपा सरकार आने के बाद बिचौलियों की दुकानदारी बंद हो गई है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि अब उनके कुर्ते-पायजामे खूंटियों पर टंग गए हैं।
यही बयान बाद में राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन गया। हालांकि, डॉ. अर्चना गुप्ता ने बाद में अपने बयान को लेकर स्पष्टीकरण भी दिया था। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य किसी जाति या समुदाय को निशाना बनाना नहीं था।
दिग्विजय चौटाला ने भी साधा निशाना
इस विवाद में जननायक जनता पार्टी के नेता दिग्विजय चौटाला भी डॉ. अर्चना गुप्ता पर निशाना साध चुके हैं। दिग्विजय चौटाला ने कथित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि विशेष वर्ग की बात करके राजनीति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि राजनीति 36 बिरादरी के साथ होनी चाहिए।
उन्होंने डॉ. अर्चना गुप्ता की शैक्षणिक और राजनीतिक समझ पर भी टिप्पणी की। दिग्विजय ने उन्हें ‘पढ़ी-लिखी अनपढ़’ तक कहा था। उन्होंने यह भी कहा था कि डॉक्टर को समाज में भगवान का रूप माना जाता है और डॉक्टर की कोई जाति या धर्म नहीं होता।
अर्चना गुप्ता कौन हैं ?
डॉ. अर्चना गुप्ता हरियाणा भाजपा की प्रदेशाध्यक्ष हैं। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार, वह गोल्ड मेडलिस्ट रेडियोलॉजिस्ट हैं और उनका जन्म 20 जनवरी 1968 को पानीपत के समालखा में हुआ था।
उन्होंने पीजीआई रोहतक से 1994 में रेडियोलॉजी में डिग्री हासिल की। इसके बाद 1994-95 से पानीपत में रह रही हैं। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में भी वह सक्रिय रही हैं। उन्होंने 2010 से 2016 तक विश्व हिंदू परिषद की जिला संयोजक की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2020 में पानीपत की महिला विंग की जिला अध्यक्ष बनीं।
वर्ष 2024 में वह भाजपा हरियाणा की जनरल सेक्रेटरी बनीं और बाद में उन्हें प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली।
परिवार में भी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ाव
डॉ. अर्चना गुप्ता के परिवार में भी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग हैं। उनके पति डॉ. अनिल गुप्ता नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं।
उनका बेटा अविरल लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई कर चुका है, जबकि उनकी बेटी डॉ. आरुषी मैक्स अस्पताल, दिल्ली में कार्यरत हैं।
अब पुलिस कार्रवाई पर नजर
संपत सिंह की शिकायत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल पुलिस की अगली कार्रवाई को लेकर है। क्या पुलिस शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करेगी? क्या पुलिस प्रेस कॉन्फ्रेंस की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच करेगी? और क्या विवादित बयान को लेकर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी?
फिलहाल मामला शिकायत के स्तर पर है। इसलिए डॉ. अर्चना गुप्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अभी आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। FIR या जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
राजनीतिक विवाद बढ़ने के संकेत
इस मामले में एक तरफ इनेलो नेता संपत सिंह ने पुलिस कार्रवाई की मांग की है। दूसरी तरफ, JJP नेता दिग्विजय चौटाला भी अर्चना गुप्ता के बयान पर सवाल उठा चुके हैं।
वहीं, भाजपा की ओर से विवादित बयान को लेकर दिया गया स्पष्टीकरण भी सामने आया है। इसलिए आने वाले दिनों में यह मुद्दा हरियाणा की राजनीति में और चर्चा का विषय बन सकता है।
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