Nitin Gadkari on E20 Petrol : देशभर में E20 पेट्रोल, एथेनॉल ब्लेंडिंग और वाहनों के माइलेज को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ी के इंजन पर असर पड़ता है या माइलेज कम हो जाती है।

Written by Kajal Panchal • Published on : 15 July 2026
IBN24 News Network : इन सभी सवालों पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने विस्तार से जवाब देते हुए कहा कि 2004 से भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है और अब तक इससे गाड़ियों को नुकसान होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
उन्होंने कहा कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन केवल पेट्रोल का विकल्प नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
2004 से मिल रहा है एथेनॉल, नुकसान का कोई प्रमाण नहीं

नितिन गडकरी ने कहा कि सोशल मीडिया पर एथेनॉल को लेकर कई तरह की भ्रामक बातें फैलाई जा रही हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि भारत में पिछले दो दशकों से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है। अब तक किसी भी आधिकारिक अध्ययन या परीक्षण में यह साबित नहीं हुआ कि इससे गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने बताया कि किसी भी नए ईंधन को लागू करने से पहले 3 से 4 वर्षों तक ऑटोमोबाइल कंपनियां, ARAI और तकनीकी संस्थान उसकी विस्तृत जांच करते हैं। सभी मानकों पर सफल होने के बाद ही उसे मंजूरी दी जाती है।
माइलेज कम होने पर क्या कहा ?
E20 पेट्रोल को लेकर कई वाहन चालकों की शिकायत है कि इससे माइलेज घट जाती है। इस पर गडकरी ने कहा कि माइलेज कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे सड़क की स्थिति, ट्रैफिक, वाहन की कंडीशन और ड्राइविंग स्टाइल।

उन्होंने माना कि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (कैलोरी वैल्यू) पेट्रोल से थोड़ी कम होती है, इसलिए कुछ मामलों में हल्का अंतर आ सकता है। हालांकि उनका कहना है कि भविष्य में फ्लेक्स-फ्यूल इंजन आने के बाद यह अंतर और कम हो जाएगा।
भारत में एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ी
गडकरी के अनुसार, देश को हर वर्ष लगभग 1450 करोड़ लीटर एथेनॉल की जरूरत होती है, जबकि वर्तमान उत्पादन क्षमता 1750 से 1800 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि एथेनॉल केवल गन्ने से ही नहीं बल्कि कई अन्य कृषि उत्पादों और अवशेषों से भी तैयार किया जा रहा है।

एथेनॉल बनाने के प्रमुख स्रोत
- गन्ना और मोलासेस
- मक्का
- टूटे चावल
- पराली
- बांस
- कृषि अपशिष्ट
एथेनॉल से देश को क्या फायदा ?
गडकरी ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से कई बड़े लाभ मिल रहे हैं।

- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो रही है।
- विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है।
- वायु प्रदूषण में कमी आ रही है।
- किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल रहा है।
- देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि इस योजना से भारत को लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के तेल आयात में बचत हुई है।
- पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं हुआ ?

एथेनॉल अपेक्षाकृत सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल की कीमतों में बड़ी कमी नहीं आने के सवाल पर गडकरी ने कहा कि पेट्रोल की कीमत तय करना पेट्रोलियम मंत्रालय का विषय है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी पेट्रोल के दामों को प्रभावित करती हैं।
- भारत की आगे की योजना
भारत ने तय समय से पहले देशभर में E20 पेट्रोल की आपूर्ति शुरू कर दी है। अब सरकार का लक्ष्य 2030 तक पेट्रोल में 30 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण तक पहुंचना है।
- E20 पेट्रोल क्या है ?

E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। एथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे कृषि उत्पादों और कृषि अवशेषों से तैयार किया जाता है। इसका उद्देश्य पेट्रोल पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाना है।
भारत में उपलब्ध प्रमुख एथेनॉल मिश्रण
| ईंधन | मिश्रण |
|---|---|
| E5 | 5% एथेनॉल + 95% पेट्रोल |
| E10 | 10% एथेनॉल + 90% पेट्रोल |
| E20 | 20% एथेनॉल + 80% पेट्रोल |
| E85 | 85% एथेनॉल + 15% पेट्रोल (फ्लेक्स फ्यूल) |

सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से न केवल कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। वहीं गाड़ियों के खराब होने और माइलेज को लेकर उठ रही चिंताओं पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि अब तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहन खराब होते हैं।
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