TCS Nashik Case में गिरफ्तार निदा खान पर महिला कर्मचारियों पर धर्म परिवर्तन का दबाव, मानसिक उत्पीड़न और कथित नेटवर्क चलाने के आरोप हैं। SIT अब डिजिटल सबूतों, 9 FIR और मानव तस्करी एंगल की गहन जांच कर रही है।

TCS Nashik Conversion Case : कॉरपोरेट दफ्तरों की चमकती दुनिया के पीछे क्या कभी ऐसा नेटवर्क भी छिपा हो सकता है, जिसकी परतें खुलते ही पुलिस, अदालत और जांच एजेंसियां एक साथ सक्रिय हो जाएं ? Nashik से सामने आया कथित धार्मिक परिवर्तन और कार्यस्थल उत्पीड़न का मामला फिलहाल पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस केस में अब सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब महाराष्ट्र पुलिस ने 40 दिनों से फरार चल रही 26 वर्षीय निदा खान को Chhatrapati Sambhajinagar से गिरफ्तार कर लिया।IBN24 News Network
Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026
TCS Nashik Conversion Case : Tata Consultancy Services (TCS) की नाशिक बीपीओ यूनिट में काम करने वाली निदा खान को पुलिस इस कथित नेटवर्क की “मुख्य साजिशकर्ता” बता रही है। गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर नाशिक लाया गया, जहां अब SIT उससे लगातार पूछताछ कर रही है।
एक टेली-कॉलर… या पूरे नेटवर्क का चेहरा?
दिसंबर 2021 में TCS से जुड़ी निदा खान कंपनी में प्रोसेस एसोसिएट के तौर पर काम कर रही थी। शुरुआती रिपोर्टों में उसे HR विभाग से जुड़ा बताया गया, लेकिन बाद में कंपनी ने साफ किया कि वह केवल सेल्स डिपार्टमेंट में टेली-कॉलर थी और उसके पास कोई प्रशासनिक अधिकार नहीं थे। लेकिन जांच एजेंसियों का दावा इससे कहीं बड़ा है।

पुलिस के मुताबिक, निदा खान अपने सह-आरोपियों दानिश शेख और तौसीफ अत्तार के साथ मिलकर कथित तौर पर महिला कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रभावित करने, धार्मिक पहचान बदलने और विशेष धार्मिक प्रथाएं अपनाने के लिए दबाव डालती थी। दोनों सह-आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत में हैं।
“तुम्हारा नाम अब हानिया होगा…”
इस केस की सबसे चौंकाने वाली बात पीड़िताओं के बयान हैं। एक शिकायतकर्ता के अनुसार, निदा खान ने उसका नाम बदलकर “हानिया” रखने को कहा। इतना ही नहीं, उसे मलेशिया में नौकरी दिलाने का सपना दिखाया गया और कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए लगातार दबाव बनाया गया। शिकायत में दावा है कि मना करने पर परिवार के साथ “कुछ बुरा होने” जैसी बातें कही गईं। FIR के अनुसार, कुछ पीड़िताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें नमाज पढ़ना सिखाया गया, सिर पर स्कार्फ पहनने को कहा गया और घर में इस्लामी प्रतीक रखने के लिए प्रेरित किया गया। कुछ महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि खान-पान और पहनावे तक बदलने का दबाव बनाया गया।
धार्मिक टिप्पणियों से लेकर मानसिक दबाव तक
जांच में शामिल अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों पर हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करने के भी आरोप हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बातचीत के दौरान भगवान कृष्ण, द्रौपदी और शिवलिंग को लेकर आपत्तिजनक बातें कही जाती थीं, ताकि मानसिक रूप से प्रभावित किया जा सके। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता अदालत में पेश सबूतों और जांच के बाद ही तय होगी।
TCS ने बनाई दूरी
मामला सामने आने के बाद TCS ने 9 अप्रैल को निदा खान को सस्पेंड कर दिया।

कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि आरोप गंभीर हैं और जांच पूरी होने तक उसे कार्य से अलग रखा जाएगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि निदा खान किसी नेतृत्वकारी पद पर नहीं थी और उसके पास संस्थागत अधिकार नहीं थे।
केस में ‘ह्यूमन ट्रैफिकिंग’ एंगल भी?
मामला तब और गंभीर हो गया जब SIT ने इसमें संभावित मानव तस्करी के एंगल की भी जांच शुरू कर दी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एक पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे नशीला पदार्थ देकर कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने की कोशिश की गई थी। फिलहाल पुलिस इस दावे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
40 दिन तक कैसे बचती रही?
- 26 मार्च को पहला मामला दर्ज होते ही निदा खान फरार हो गई थी। इसके बाद महाराष्ट्र के कई शहरों में पुलिस टीमें भेजी गईं। इस दौरान अदालत में उसकी अग्रिम जमानत याचिका भी दाखिल हुई, लेकिन नाशिक सेशंस कोर्ट ने मामले को “गंभीर” मानते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।
- बचाव पक्ष ने अदालत में यह दलील भी दी कि निदा खान गर्भवती है, इसलिए उसे राहत मिलनी चाहिए। लेकिन अदालत ने कहा कि मामले की प्रकृति को देखते हुए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
- आखिरकार 7 मई को पुलिस ने उसे छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार कर लिया।
अब आगे क्या?
अब तक इस मामले में नौ FIR दर्ज हो चुकी हैं और आठ आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस का मानना है कि निदा खान की गिरफ्तारी के बाद पूरे कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली, संपर्क और संभावित डिजिटल सबूतों के बारे में अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। यह मामला सिर्फ एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि कॉरपोरेट कार्यस्थलों में सुरक्षा, मानसिक दबाव और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे सवाल भी खड़े कर रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि SIT की जांच अदालत में कितनी मजबूत साबित होती है — और क्या यह मामला आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे करेगा?
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