TVK vs DMK-AIADMK : विवाद के बीच तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी संकट गहरा गया है। सूत्रों के अनुसार, 107 सीटें जीतने वाली विजय की पार्टी ने दावा किया है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उसे सरकार बनाने का मौका नहीं दिया जा रहा। 107 विधायकों के इस्तीफे की चेतावनी

TVK vs DMK-AIADMK : तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद अब सत्ता का संघर्ष और भी नाटकीय होता जा रहा है। अभिनेता विजय की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) ने गुरुवार शाम ऐसा राजनीतिक दांव चला, जिसने राज्य की सियासत को नई दिशा दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने संकेत दिया है कि अगर Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) और All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करती हैं, तो TVK के सभी 107 विधायक इस्तीफा दे सकते हैं।यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में सरकार गठन को लेकर लगातार राजनीतिक बैठकों और अंदरूनी रणनीतियों का दौर चल रहा है। TVK का आरोप है कि राज्य की दो पारंपरिक द्रविड़ पार्टियां मिलकर उस पार्टी को सत्ता से दूर रखने की कोशिश कर रही हैं, जिसे सबसे ज्यादा जनसमर्थन मिला है।
IBN24 News Network
Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026
TVK vs DMK-AIADMK : 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में TVK ने 107 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया। हालांकि पार्टी बहुमत के आंकड़े 118 से अभी 10 सीट दूर है, लेकिन उसका दावा है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल को सरकार बनाने का पहला मौका उसे देना चाहिए।

सूत्रों के अनुसार, विजय ने राज्यपाल R. V. Arlekar से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें यह कहते हुए मना कर दिया गया कि उनके पास फिलहाल बहुमत नहीं है। बताया जा रहा है कि राज्यपाल ने स्पष्ट रूप से 118 विधायकों के समर्थन पत्र प्रस्तुत करने की मांग की है। राजभवन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वर्तमान स्थिति में सरकार गठन के लिए आवश्यक बहुमत समर्थन उपलब्ध नहीं है।
कांग्रेस साथ, बाकी समर्थन की तलाश जारी
TVK को पहले ही Indian National Congress के पांच विधायकों का समर्थन मिल चुका है। पार्टी अब वामपंथी दलों और कुछ छोटे क्षेत्रीय दलों से बातचीत कर रही है। सूत्रों का कहना है कि अगर संवैधानिक स्तर पर गतिरोध बना रहता है तो TVK अदालत का दरवाजा भी खटखटा सकती है। पार्टी के भीतर यह भावना मजबूत हो रही है कि जनता ने पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से हटकर नया विकल्प चुना है और उसे सत्ता से दूर रखना जनादेश का अपमान होगा।
क्या DMK बना रही है वैकल्पिक रणनीति ?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच DMK की गतिविधियां भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। पार्टी ने गुरुवार सुबह अहम बैठक कर चार प्रस्ताव पारित किए। इनमें एक प्रस्ताव ऐसा भी था, जिसमें पार्टी प्रमुख M. K. Stalin को “आपातकालीन निर्णय” लेने का अधिकार दिया गया। बैठक के बाद जारी बयान में DMK ने कहा कि उसकी प्राथमिकता राज्य में राजनीतिक अस्थिरता रोकना और दोबारा चुनाव से बचना है। पार्टी ने सभी विधायकों को 10 मई तक चेन्नई में मौजूद रहने का निर्देश भी दिया है।
हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा उस संभावित फार्मूले की हो रही है, जिसके तहत AIADMK नेता Edappadi K. Palaniswami मुख्यमंत्री बन सकते हैं और DMK बाहर से समर्थन दे सकती है। सूत्रों के मुताबिक, DMK के भीतर इस प्रस्ताव को लेकर मतभेद हैं। पार्टी के कुछ युवा नेताओं को डर है कि अगर विजय सत्ता में आ गए, तो वह तमिल राजनीति में उसी तरह स्थायी प्रभाव छोड़ सकते हैं जैसा कभी M. G. Ramachandran (एमजीआर) ने छोड़ा था।
AIADMK फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ मोड में
AIADMK ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है। पार्टी नेतृत्व ने विधायकों से शांत रहने और स्थिति पर नजर बनाए रखने को कहा है। पलानीस्वामी के साथ हुई बैठक में 45 से अधिक विधायक शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर एक वर्ग TVK के साथ संभावित गठबंधन का समर्थन कर रहा है, लेकिन वरिष्ठ नेताओं ने फिलहाल ऐसी किसी संभावना से इनकार किया है। विधायकों से कहा गया है कि अगले दो दिनों तक किसी भी तरह की राजनीतिक बयानबाजी से बचें।
राज्यपाल के फैसले पर बढ़ता विवाद
राज्यपाल के रुख को लेकर कई दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

Communist Party of India (CPI) की तमिलनाडु इकाई ने कहा है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते TVK को विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के एस.आर. बोम्मई फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संवैधानिक परंपरा यही कहती है कि सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का मौका दिया जाए। वहीं Thol. Thirumavalavan ने भी राज्यपाल के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि शपथ ग्रहण से पहले समर्थन पत्रों की मांग करना उचित नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि सत्ता से बाहर हो रही DMK के कुछ नेताओं ने भी राज्यपाल के फैसले को “जनादेश का अपमान” बताया है। अभिनेता और नेता Kamal Haasan ने भी विजय के समर्थन में बयान दिया है।
अब आगे क्या?
तमिलनाडु की राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां हर घंटे समीकरण बदल रहे हैं। एक तरफ विजय की TVK खुद को जनता का नया विकल्प बता रही है, वहीं दूसरी तरफ दशकों से राजनीति पर कब्जा जमाए द्रविड़ दल सत्ता बचाने के लिए नए समीकरण तलाश रहे हैं। अगर TVK अपने इस्तीफे की चेतावनी पर कायम रहती है, तो राज्य में संवैधानिक और राजनीतिक संकट और गहरा सकता है। वहीं यदि DMK और AIADMK किसी साझा फार्मूले पर आगे बढ़ते हैं, तो यह तमिलनाडु की राजनीति का सबसे अप्रत्याशित गठबंधन साबित हो सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या तमिलनाडु बदलाव की राजनीति की ओर बढ़ रहा है, या फिर पुराने राजनीतिक खिलाड़ी एक बार फिर सत्ता का रास्ता निकाल लेंगे?
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