US Tariff on Indian Goods : अगर आपका कारोबार अमेरिका को सामान भेजता है या आप ऐसे उद्योग से जुड़े हैं जो निर्यात पर निर्भर है, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिका ने भारत समेत 54 देशों को ऐसी सूची में रखा है, जिन पर भविष्य में 10% से 12.5% तक अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया जा सकता है। वजह बताई गई है कि ये देश जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं।

Written by Kajal Panchal • Published on : 3 June 2026
IBN24 News Network : यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने के लिए नई दिल्ली में उच्चस्तरीय वार्ता चल रही है। ऐसे में अमेरिकी रिपोर्ट ने व्यापार जगत की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
आखिर अमेरिका को क्या आपत्ति है ?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने सेक्शन 301 के तहत जांच पूरी करने के बाद अपनी रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत समेत कई देशों में जबरन मजदूरी से जुड़े उत्पादों की सप्लाई को रोकने के लिए पर्याप्त और प्रभावी व्यवस्था नहीं है।
अमेरिका का कहना है कि ऐसे उत्पाद वैश्विक बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं और अमेरिकी कंपनियों तथा श्रमिकों को नुकसान पहुंचाते हैं।
भारतीय उत्पादों पर कितना बढ़ सकता है टैक्स ?
USTR ने दो तरह की श्रेणियां बनाई हैं।
- जिन देशों ने नियमों को आंशिक रूप से लागू किया है या भविष्य में सुधार का भरोसा दिया है, उन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है।
- जिन देशों को अमेरिका नियमों के पालन में पूरी तरह कमजोर मानता है, उनके उत्पादों पर 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।

भारत को भी इसी जांच के दायरे में रखा गया है, हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ सकता है ?
पहली नजर में यह मामला सिर्फ सरकारों और बड़े उद्योगों के बीच का लग सकता है, लेकिन इसका असर आम लोगों तक पहुंच सकता है।
यदि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाता है, तो वहां भारतीय सामान महंगे हो जाएंगे। इससे अमेरिका को होने वाला निर्यात प्रभावित हो सकता है। निर्यात कम होने पर कई उद्योगों की आय, उत्पादन और रोजगार पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग उत्पाद, कृषि उत्पाद, स्टील, एल्युमिनियम और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बीच क्यों बढ़ी चिंता ?
यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के अधिकारी व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल हाल ही में कह चुके हैं कि समझौते के अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और केवल कुछ तकनीकी बिंदुओं पर चर्चा बाकी है।
हालांकि अमेरिकी रिपोर्ट के बाद व्यापार वार्ता पर अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका जताई जा रही है।
सेक्शन 301 क्या है ?
सेक्शन 301 अमेरिका के ट्रेड एक्ट 1974 का एक विशेष प्रावधान है। इसके तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय को यह अधिकार मिलता है कि वह किसी भी देश की व्यापारिक नीतियों की जांच कर सके।
यदि जांच में किसी देश की नीति अमेरिकी व्यापार हितों के खिलाफ पाई जाती है, तो अमेरिका उस देश पर अतिरिक्त टैरिफ, व्यापारिक प्रतिबंध या अन्य जवाबी कदम उठा सकता है।
भारत के अलावा कौन-कौन से देश सूची में ?
अमेरिका की सूची में भारत के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे कई प्रमुख देश शामिल हैं।
इसके अलावा कनाडा, यूरोपीय संघ, मैक्सिको, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और इक्वाडोर को भी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी वाली श्रेणी में रखा गया है।
क्या अभी लागू हो गया है नया टैक्स ?
नहीं। फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है। अमेरिका ने जांच रिपोर्ट जारी की है और आगे की प्रक्रिया के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
हालांकि यदि अतिरिक्त 10% से 12.5% तक टैरिफ लागू होता है तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा कठिन हो सकती है।
भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता अब और महत्वपूर्ण हो गई है। भारतीय उद्योग जगत की नजर इस बात पर है कि क्या दोनों देश किसी ऐसे समाधान तक पहुंच पाते हैं जिससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिले और व्यापार समझौता तय समय पर आगे बढ़ सके।
फिलहाल कारोबारियों, निर्यातकों और निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम आने वाले महीनों में सबसे अहम आर्थिक खबरों में से एक माना जा रहा है।
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